The Haunted Beach of Goa | गोवा के भूतिया बीच का रहस्य

गोवा का समुद्र, उसकी लहरें, रेत, और सूरज की हलकी रोशनी हर पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। गोवा का बीच किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता था, लेकिन उस बीच के पीछे एक डरावनी कहानी भी छिपी थी। एक ऐसी कहानी जो सालों से वहाँ के स्थानीय लोग और कुछ यात्री सुनते आ रहे थे, लेकिन वे इसे सिर्फ अफवाह मानते थे। यह कहानी पणजी के पास स्थित एक छोटे से गाँव के समुद्र तट पर घटित हुई थी।

आरव और सिया, दोनों अच्छे दोस्त, गोवा छुट्टियों पर आए थे। वे दोनों अक्सर साथ में यात्रा करते थे और गोवा के खूबसूरत बीच का लुत्फ़ उठाने के लिए यहाँ आए थे। वे रेत पर पैदल चलते हुए समुद्र के किनारे पर बैठे थे, और समुद्र की लहरों के शांत संगीत में खो गए थे।

आरव: (सिया से) “यह बीच तो वाकई अद्भुत है! यहाँ की शांति, लहरें, सूरज की हल्की सी रोशनी, सब कुछ शानदार है।”

सिया: (मुस्कुराते हुए) “हाँ, लेकिन यहाँ की रातें भी बहुत खूबसूरत होती हैं। सुना है यहाँ रात को एक अजीब सी आवाज़ सुनाई देती है।”

आरव: (हँसते हुए) “अरे, तुम भी न! यह सब लोककथाएँ हैं, सिया। कोई भी आवाज़ बस हवा की वजह से होती है।”

सिया हँसी में कहती है, “तुम सही कह रहे हो, आरव। लेकिन गाँव वाले कहते हैं कि यहाँ किसी एक लड़की की आत्मा भटकती है, जो समुद्र में डूबकर मर गई थी।”

आरव ने सिया की बातों को नजरअंदाज किया और दोनों बीच पर समय बिताने लगे। लेकिन जैसे-जैसे शाम का वक्त पास आ रहा था, अजीब सी खामोशी पूरे बीच पर फैलने लगी। अचानक, एक हल्की सी आवाज़ आई, जो पहले तो बहुत दूर सुनाई दी, लेकिन धीरे-धीरे पास आती गई।

सिया: (चौंकते हुए) “तुमने यह आवाज़ सुनी? क्या वह किसी इंसान की आवाज़ थी?”

आरव थोड़ा असहज होकर कहता है, “मुझे नहीं लगता, शायद यह समुद्र की लहरों की आवाज़ होगी।”

लेकिन दोनों को यह साफ महसूस हो रहा था कि यह आवाज़ इंसान जैसी थी। अचानक, वही आवाज़ तेज़ हो गई और समुद्र की लहरों से भी ज्यादा घनी लगने लगी। जैसे ही वे उस आवाज़ की दिशा में देखने लगे, उन्हें एक धुंधली आकृति दिखाई दी, जो समुद्र के किनारे से निकल रही थी।

सिया: (घबराते हुए) “क्या तुमने वह देखा? वहाँ कोई खड़ा था!”

आरव को यकीन नहीं हो रहा था, लेकिन वह भी डर महसूस करने लगा। उसने सिया को दिलासा देते हुए कहा, “शायद यह कोई और व्यक्ति होगा, जो पानी में खेल रहा होगा।”

लेकिन जब वे फिर से उस दिशा में देखने लगे, आकृति गायब हो चुकी थी। वे दोनों अब असमंजस में थे। क्या यह सचमुच कोई इंसान था, या कुछ और था?

आरव और सिया उस दिन की घटनाओं के बाद अब पूरी तरह से घबराए हुए थे। उन्होंने जो सुनी थी, वह आवाज़ सामान्य नहीं लग रही थी। वे दोनों एक-दूसरे से बात कर रहे थे कि क्या यह केवल उनका भ्रम था या फिर कुछ सचमुच था, जो उन्होंने देखा। उनका मन यह मानने को तैयार नहीं था कि यह कुछ अदृश्य था, लेकिन फिर भी उनकी दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं।

वह दोनों बीच के किनारे पर खड़े होकर उस अजीब सी आवाज़ के बारे में सोच रहे थे, जो अब तक उनके दिमाग में गूंज रही थी। सिया ने कुछ सोचा और आरव से कहा:

सिया: (घबराते हुए) “आरव, मुझे लगता है हमें गाँववालों से इस बारे में पूछना चाहिए। उन्होंने जो हमें बताया था, वह सच हो सकता है।”

आरव: (सोचते हुए) “क्या तुम सच में सोचती हो कि हम गाँववालों से इस बारे में बात करें? वे लोग शायद हमारी बातों को पागलपन समझेंगे।”

लेकिन सिया ने ठान लिया था कि उन्हें इस रहस्य का समाधान खोजना होगा। वे दोनों गाँव की ओर चल पड़े, जहाँ वे कुछ स्थानीय लोगों से मिल सकते थे। गाँव में घुसते ही, एक अजीब सी खामोशी थी। लोग अपनी-अपनी जगहों पर खामोशी से बैठे थे, जैसे वे कुछ छिपा रहे हों।

वे सबसे पहले गाँव के प्रधान से मिले, जिन्होंने एक पुरानी और खामोश मुस्कान के साथ उनका स्वागत किया। लेकिन जैसे ही सिया और आरव ने उससे हवेली और समुद्र तट पर हो रही घटनाओं के बारे में पूछा, प्रधान का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।

प्रधान: (धीरे से) “तुम दोनों के लिए यह अच्छा नहीं होगा अगर तुम उस रहस्य में और घुसे। वहाँ कुछ ऐसा है जो तुम दोनों को नहीं समझ सकते।”

आरव: (उत्सुक होकर) “क्या आप कुछ और बता सकते हैं? हमें लगता है कि कुछ बहुत अजीब हो रहा है।”

प्रधान: (सिर झुका कर) “यह मामला बहुत पुराना है। यह कहानी कई सालों से इस गाँव में चली आ रही है। लोग कहते हैं कि समुद्र के पास जो आवाज़ें सुनाई देती हैं, वह किसी औरत की आत्मा की हैं। वह आत्मा कभी इस गाँव के एक लड़की की थी, जो बहुत साल पहले इस समुद्र में डूब गई थी।”

सिया: (डरी हुई) “तो वह आत्मा अब भी इस बीच पर है?”

प्रधान: “हाँ, लेकिन यह कहानी केवल गाँववालों तक सीमित नहीं रही। यह अब पर्यटकों तक पहुँच चुकी है, और जिन लोगों ने उस आवाज़ को सुना है, उनकी ज़िंदगी में कुछ अजीब घटनाएँ घटने लगती हैं। कुछ लोग कहते हैं कि जो भी उस आवाज़ को सुनता है, वह जल्द ही या तो गायब हो जाता है, या फिर उनकी ज़िंदगी में अजीब घटनाएँ घटने लगती हैं।”

आरव: (चौंकते हुए) “क्या आप यह कह रहे हैं कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है?”

प्रधान: (गंभीर होकर) “यह सब कुछ नहीं है, लेकिन हमारी सलाह यह है कि तुम दोनों वह जगह छोड़ दो।”

लेकिन सिया और आरव का मन अब और भी ज्यादा उत्सुक हो गया। उन्होंने प्रधान से और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की, लेकिन प्रधान ने ज्यादा कुछ नहीं बताया। वे दोनों यह सोचते हुए बाहर आए कि गाँव वालों ने जानबूझकर उन्हें और जानकारी नहीं दी।

अब, दोनों ने तय किया कि वे अकेले ही इस रहस्य को सुलझाएंगे। वे शाम को फिर से समुद्र के पास गए, जहाँ से वह अजीब सी आवाज़ आ रही थी। हवा में एक अजीब सी गंदगी थी, और समुद्र की लहरें भी कुछ ज्यादा ही शोर कर रही थीं। जैसे-जैसे वे समुद्र के करीब गए, आवाज़ फिर से सुनाई दी – वह हल्की सी चीख, जैसे कोई मदद मांग रहा हो।

सिया: (डरी हुई) “यह वही आवाज़ है, आरव! हम इस दिशा में और क्यों बढ़ रहे हैं?”

आरव: (साहसिक होकर) “हम यहाँ आए हैं, और अब हमें इसका सामना करना होगा। यह आवाज़ हमें कहीं न कहीं ले जाएगी।”

दोनों धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़े जहाँ से आवाज़ आ रही थी। अचानक, उन्हें समुद्र के किनारे पर एक पुरानी नाव दिखाई दी, जो किसी समय इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन अब वह जंग खा चुकी थी। नाव के पास एक पुराना बक्सा रखा हुआ था, जो काफी घिसा हुआ और तंत्र-मंत्र से भरा हुआ था। बक्से के पास एक रेशमी धागा लटका हुआ था, जिसमें कुछ संकेत थे।

आरव: (चौंकते हुए) “यह क्या है? यह तो एक तंत्र-मंत्र जैसा लगता है!”

सिया: (डरी हुई) “मुझे नहीं लगता कि हमें इसे छूना चाहिए, यह किसी बुरी शक्ति से जुड़ा हुआ हो सकता है।”

लेकिन आरव ने उस बक्से को खोला, और जैसे ही उसने बक्सा खोला, अचानक एक तेज़ हवा का झोंका आया और दोनों को झकझोर दिया। बक्से के अंदर एक पुरानी किताब थी, जिसमें काले जादू और तंत्र-मंत्र के बारे में लिखा हुआ था।

सिया: (घबराते हुए) “आरव, हमें इसे तुरंत बंद कर देना चाहिए! यह तो वही किताब है, जो प्रधान ने हमें चेतावनी दी थी!”

आरव: (पढ़ते हुए) “यह किताब पिशाचिनी से जुड़ी हुई लगती है। लेकिन इसमें एक मंत्र भी लिखा है, जो इस आत्मा को शांत कर सकता है।”

अचानक, दोनों ने महसूस किया कि समुद्र की लहरें तेज़ हो गईं, और आसमान में अजीब सी बादल छा गए। एक हल्की सी चीख फिर से सुनाई दी, और दोनों ने देखा कि समुद्र के पानी से एक धुंधली आकृति उभरने लगी थी। वह आकृति धीरे-धीरे उन्हें अपनी ओर खींचने लगी, और एक डरावनी आवाज़ फिर से गूंजने लगी।

आरव और सिया को अब यह महसूस हो गया था कि वे केवल एक छुट्टी पर नहीं आए थे, बल्कि एक खतरनाक रहस्य से जूझने आए थे। वे जिस आवाज़ का पीछा कर रहे थे, वह अब सीधे समुद्र से निकलती हुई एक अजीब सी आकृति में बदल गई थी। वह आकृति धीरे-धीरे उन्हें अपनी ओर खींच रही थी। उनके कदम रेत पर भारी हो गए थे, जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें जकड़ लिया हो।

सिया का दिल तेज़ी से धड़क रहा था, और आरव की आँखों में घबराहट थी। उन्होंने वह पुरानी किताब खोल ली थी, जिसे वे बक्से से निकाल लाए थे। उसमें एक मंत्र था, जो उस आत्मा को शांति देने का दावा करता था। लेकिन क्या वे इसे सही से उच्चारण कर पाएंगे?

आरव: (काँपते हुए) “यह मंत्र… क्या हम इसे सही से उच्चारण कर पाएंगे?”

सिया: (सख्त आवाज में) “अगर हम इसे सही नहीं बोले, तो क्या होगा? हम इसे नहीं जाने दे सकते, आरव। यह आत्मा हमारे साथ नहीं खेल रही है।”

आरव और सिया दोनों एक साथ मंत्र का उच्चारण करने लगे। जैसे ही मंत्र के शब्द उनके होठों से निकले, समुद्र की लहरें एक अजीब सी आवाज़ में बदल गईं। हलकी सी गूंज उनके कानों में सुनाई देने लगी, जैसे सागर का रुदन हो।

मगर तभी, अचानक वह अजीब सी आकृति उनके सामने पूरी तरह से उभर आई। यह एक औरत की आकृति थी, जो समुद्र के पानी से बाहर निकलकर धीरे-धीरे उनके पास आने लगी। उसके बाल पानी में लहर रहे थे, और उसकी आँखें सन्नाटे जैसी काली थीं।

आत्मा (Pisachini): (सर्द और गहरी आवाज़ में) “तुम दोनों… क्या तुम मुझे शांत करोगे? क्या तुम समझते हो कि तुम मुझे खत्म कर सकते हो?”

सिया: (डरी हुई) “तुम कौन हो? तुम्हें क्या चाहिए?”

आत्मा की आँखों में एक अजीब सी चमक थी। वह धीरे-धीरे और करीब आई और कहा:

आत्मा (Pisachini): “मैं शिकारा थी, एक लड़की जो समुद्र में डूबकर मर गई। मैंने बहुत कुछ सहा, और मेरी आत्मा अब कभी शांति नहीं पा सकी। यह समुद्र, यह जगह मेरे लिए सिर्फ दर्द और अभिशाप बन गई है।”

आरव: (आत्मा से) “तो तुम जो भी कर रही हो, वह सिर्फ अपनी आत्मा को शांत करने के लिए है?”

शिकारा (Pisachini): “हाँ, लेकिन यह तुम्हारा काम नहीं है, तुम मुझे छोड़ दो। मैं किसी और को भी अपने रास्ते से हटा दूँगी, जो इस सागर के पास आएगा।”

उसके शब्दों में घृणा और गुस्सा था, और आरव को यह समझ में आ गया कि यह आत्मा सिर्फ खुद को शांत करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी पीड़ा और दुःख से बचने के लिए सब कुछ कर रही थी। लेकिन उसके कारण बाकी लोग भी परेशान हो रहे थे।

जैसे ही सिया और आरव मंत्र को उच्चारित करने में व्यस्त थे, आत्मा ने अपनी शक्ति से वेदी को हिला दिया। अचानक, एक खौ़फनाक चीख ने चारों ओर फैल गई और आसमान में अजीब सी घनघनाहट होने लगी। समुद्र के पानी ने अपना रंग बदल लिया था और एक भयंकर तूफान उफान मारने लगा। हवाएँ तेज़ हो गईं, और हर जगह अंधेरा छाने लगा।

आत्मा (Pisachini): “तुम दोनों की कोशिशों का कोई फायदा नहीं है। तुम मुझे नहीं हरा सकते!”

लेकिन सिया और आरव ने डर को नकारते हुए मंत्र का उच्चारण पूरी ताकत से जारी रखा। उनका विश्वास था कि अगर वे सही तरीके से मंत्र बोलते हैं, तो आत्मा को मुक्ति मिल सकती है।

आरव: “हम तुमसे डरने वाले नहीं हैं, शिकारा! हम तुम्हारी आत्मा को शांति देंगे।”

आत्मा की आकृति धीरे-धीरे और कमजोर होती गई, जैसे कि उसकी ताकत कम हो रही हो। अब वह पूरी तरह से उनींदे और दुखी दिख रही थी। उसकी आँखों में कुछ ऐसा था, जो आरव और सिया को समझने में मदद करता था – वह दुख और अकेलापन, जो कभी खत्म नहीं हो सकता था।

जैसे ही मंत्र के अंतिम शब्द उच्चारित हुए, समुद्र की लहरें शांत हो गईं, और हवाएँ भी थम गईं। एक अजीब सी चुप्पी फैल गई थी। आरव और सिया ने देखा कि आत्मा अब धीरे-धीरे पारदर्शी होती जा रही थी।

शिकारा (Pisachini): (धीरे से) “धन्यवाद… तुम दोनों ने मुझे मेरी मुक्ति दे दी। अब मैं शांति से जा सकती हूँ।”

फिर वह पूरी तरह से गायब हो गई, और समुद्र की लहरों में एक हलकी सी आवाज़ आई, जैसे वह धन्यवाद कह रही हो। वह बुरी आत्मा अब शांति में थी, और क्यूबोशि बीच पर जो अजीब घटनाएँ हो रही थीं, वह भी अब समाप्त हो गई थीं।

आरव और सिया दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। वे जानते थे कि उन्होंने सही किया था। अब, क्यूबोशि गाँव और उसका समुद्र फिर से सुरक्षित हो गया था।

आरव और सिया के लिए क्यूबोशि बीच पर जो कुछ भी हुआ, वह अब उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका था। उन्होंने पिशाचिनी की आत्मा को शांति दी, और समुद्र के अजीब तंत्र-मंत्र और भयावह शक्तियों का सामना किया। लेकिन, जैसे ही वे क्यूबोशि गाँव छोड़ने के लिए तैयार हुए, एक नई हलचल ने उनका ध्यान खींच लिया। क्या सब कुछ सचमुच खत्म हो चुका था, या फिर कुछ और रहस्य सामने आने वाला था?

आरव: (सिया से) “क्या तुम सच में सोचती हो कि अब सब कुछ खत्म हो गया है? क्या वह आत्मा अब वापस नहीं आएगी?”

सिया: (मुस्कुराते हुए) “हाँ, हमें अब किसी और खौ़फ का सामना नहीं करना होगा। हम सही रास्ते पर हैं, आरव।”

लेकिन सिया के शब्दों में भी एक अजीब सा डर छुपा हुआ था। वे दोनों अब गोवा के समुद्र के किनारे चल रहे थे, जहाँ एक शांत वातावरण था, लेकिन आरव को ऐसा महसूस हो रहा था कि क्यूबोशि का रहस्य अभी तक पूरी तरह से सुलझा नहीं था। वह जानता था कि जब तक कोई और खौ़फनाक सच्चाई सामने न आए, वह शांति महसूस नहीं कर सकता।

अचानक, समुद्र की लहरें तेज़ हो गईं, और हवा का झोंका आया। जैसे ही वे समुद्र के पास पहुँचे, सिया ने कुछ देखा। सामने, समुद्र के पानी में एक हल्की सी धुंध बनती हुई नजर आई। वह धुंध धीरे-धीरे एक आकृति में बदलने लगी, जो पहले से कहीं ज्यादा डरावनी लग रही थी।

सिया: (घबराकर) “आरव, यह क्या है? क्या तुम भी यह देख रहे हो?”

आरव ने घबराकर उस दिशा में देखा और उसे भी वही आकृति दिखाई दी। यह वही आकृति थी, जिसे वे पहले देख चुके थे – पिशाचिनी, लेकिन इस बार वह अलग थी। उसकी आँखों में अब कोई दर्द नहीं था, बल्कि एक अजीब सी क्रूरता और ग़ुस्सा था।

पिशाचिनी (Pisachini): “तुम दोनों ने मुझे शांति दी, लेकिन तुम यह नहीं जानते कि मेरी शक्ति के बिना, यह समुद्र और यह जगह अब और भी खतरनाक हो जाएगी। तुमने जो किया, वह कोई हल्का काम नहीं था। अब तुम्हारी आत्माएँ मेरी हो जाएंगी।”

आकृति की आवाज़ से समुद्र की लहरें और तेज़ हो गईं, और अंधेरा फिर से घेरने लगा। आरव और सिया दोनों डर के बावजूद एक-दूसरे को देखकर ठान चुके थे कि वे इस बार फिर से उस पिशाचिनी को हराएंगे।

आरव: (डरे हुए लेकिन साहसिक) “तुम हमारी आत्माओं को नहीं ले सकती, पिशाचिनी। हम तुम्हारी शक्ति को फिर से नष्ट करेंगे।”

सिया ने अपनी जेब से वही पुरानी किताब निकाली, जिसमें मंत्र था। वह जानती थी कि अब वे आखिरी बार उस मंत्र का उच्चारण करके ही इस आत्मा को पूरी तरह से नष्ट कर सकते हैं।

अंतिम लड़ाई और मुक्ति

आरव और सिया ने एक साथ मंत्र का उच्चारण किया, जैसे ही उन्होंने मंत्र के अंतिम शब्द कहे, पिशाचिनी की आकृति एक तेज़ चीख मारते हुए पूरी तरह से जलने लगी। समुद्र का पानी उफान मारने लगा और आसमान में बिजली कड़कने लगी। इस बार पिशाचिनी की शक्ति पूरी तरह से खत्म हो रही थी। उसकी आकृति धीरे-धीरे जलती हुई राख में बदलने लगी और समुद्र में समाहित हो गई।

पिशाचिनी: (चीखते हुए) “तुम मुझे खत्म नहीं कर सकते! मैं हमेशा के लिए यहाँ रहूँगी!”

लेकिन जैसे ही मंत्र का असर हुआ, पिशाचिनी की आवाज़ गायब हो गई और समुद्र शांत हो गया। आसमान में घना अंधेरा था, लेकिन अब वह अंधेरा डरावना नहीं था। धीरे-धीरे चारों ओर रोशनी फैलने लगी और हवाएँ शांत हो गईं। यह सब कुछ अब खत्म हो चुका था।

आरव: (साँस छोड़ते हुए) “क्या हमने सचमुच इसे खत्म कर दिया? क्या अब सब कुछ शांत होगा?”

सिया: (आश्वस्त होकर) “हाँ, आरव। अब यह जगह सुरक्षित है। हम क्यूबोशि गाँव और गोवा के बीच को अब शांति से छोड़ सकते हैं।”

आरव और सिया ने महसूस किया कि उनकी यात्रा अब समाप्त हो चुकी थी। गोवा के बीच की हलकी सी धुंध अब एक शांत वातावरण में बदल चुकी थी। गाँव के लोग, जो पहले डर के साए में जी रहे थे, अब स्वतंत्र थे। कोई और भूतिया घटना नहीं घटने वाली थी। क्यूबोशि गाँव में फिर से शांति लौट आई थी।

सिया: (मुस्कुराते हुए) “हमने यह किया, आरव। हमने न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि इस जगह को फिर से सुरक्षित भी किया।”

आरव: “हाँ, अब हमें वापस लौटना होगा। लेकिन इस अनुभव ने हमें यह सिखाया कि कभी भी अंधकार से डरने की बजाय उसे समझकर उसका सामना करना चाहिए।”

वे दोनों गोवा के समुद्र को आखिरी बार देखा और गाँव की ओर वापस चल पड़े। उनकी यात्रा अब समाप्त हो चुकी थी, लेकिन जो उन्होंने सीखा था, वह हमेशा उनके साथ रहेगा।

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