मुंबई का भूतिया सिनेमा हॉल | The Mystery of the Old Theatre

मुंबई, भारत का दिल और फिल्म इंडस्ट्री का गढ़, जहाँ हर किसी की जिंदगी फिल्मों के इर्द-गिर्द घूमती है। शहर के कोलाहल और हंसी-खुशी के बीच कई ऐसी जगहें हैं जो अजीब और डरावनी घटनाओं से भरी हुई हैं। यह कहानी एक पुराने, वीरान पड़े सिनेमा हॉल की है, जिसे ‘राजश्री सिनेमा’ कहा जाता था। […]

नैनीताल का खौ़फनाक होटल

नैनीताल, उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन, अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। लेकिन इसके शांत और मनोरम दृश्यों के पीछे कुछ ऐसे रहस्य छुपे हैं जिन्हें जानकर हर कोई दहशत में आ जाएगा। यह कहानी एक ऐसे होटल की है जो नैनीताल के बाहरी इलाके में स्थित था। यह होटल कभी

सोनोवाड़ी का भूतिया मंदिर

उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव, सोनोवाड़ी, में एक पुराना मंदिर था। यह मंदिर गाँव के बाहर, एक घने जंगल में स्थित था। पहले यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध था, लेकिन समय के साथ यह बुरी तरह से जर्जर हो गया और अब वहाँ जाने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी। गाँववालों का कहना

अल्मोड़ा का भूतिया घर

अल्मोड़ा, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में स्थित एक शांत और सुंदर स्थान था, जहां की हवाओं में हमेशा ठंडक होती थी और प्राकृतिक सुंदरता मन को सुकून देती थी। लेकिन इस गांव के बाहरी इलाके में एक पुराना, खंडहर घर था, जिसे “काली हवेली” कहा जाता था। यह घर पूरी तरह से जर्जर हो चुका

नगालैंड की भूतिया गुफा

नगालैंड के एक छोटे से गाँव में एक प्राचीन गुफा थी, जिसे ‘कालापानी गुफा’ कहा जाता था। गाँववाले कहते थे कि इस गुफा में कुछ ऐसा था, जिसे कोई भी इंसान जीवित बाहर नहीं लौट सकता था। गुफा के पास का क्षेत्र घना जंगल था, जहाँ अजीब आवाजें आती थीं। गाँववाले इस गुफा के पास

भूतिया महल की कहानी

असम के एक दूरदराज के गाँव में एक प्राचीन महल था। यह महल कई दशकों से खंडहर में तब्दील हो चुका था, और गाँववालों का कहना था कि वहाँ कुछ अजीब घटनाएँ घटित होती थीं। लोग कहते थे कि महल के भीतर एक बुरी आत्मा बसी हुई थी, जो रात के समय बाहर निकलकर गाँववालों

असम की रहस्यमयी जंगल की कहानी

असम के एक छोटे से गाँव में स्थित जंगल के बारे में गाँववालों के बीच एक खौ़फनाक कहानी थी। यह जंगल एक बहुत घना और रहस्यमयी स्थान था, जिसे लोग ‘काला जंगल’ कहते थे। गाँववालों का कहना था कि जो भी उस जंगल में प्रवेश करता था, वह या तो गायब हो जाता था या

तहख़ाने का श्राप (डायरी के पन्नों से)

(भाग 1 – हवेली में पहला कदम) आज मैं इस डायरी की शुरुआत कर रहा हूँ।मैं नहीं जानता कि इसे कभी कोई पढ़ पाएगा या नहीं।लेकिन अगर पढ़े… तो यह मेरी आख़िरी गवाही होगी। दिन 1आज मैं “शवपुर हवेली” पहुँचा।गाँव के बाहरी हिस्से में यह हवेली अकेली खड़ी है।दीवारों पर काई और जाले चिपके हैं।टूटी

अंधकार की परछाइयाँ

अध्याय 1 : शवपुर की दहलीज़ घना अंधेरा फैला हुआ था। हवा सरसराते हुए सूखे पेड़ों से टकरा रही थी और दूर कहीं से किसी अज्ञात प्राणी की चीख सुनाई दे रही थी। यह कोई साधारण गाँव नहीं था, बल्कि एक ऐसा गाँव था जिसका नाम सुनकर ही लोगों की रूह काँप उठती थी—शवपुर। लोग

झील का रहस्य – मृत्युपुर की डायरी

लेखक का नोट:ये पन्ने मुझे मृत्युपुर गाँव के पुराने डाकघर के बंद तहख़ाने से मिले। पन्ने पीले, किनारे जले हुए, और कुछ हिस्से धुंधले। तारीख़ें 1989 की हैं… डायरी – 1 मार्च 1989 सुबह 8:15 बजेआज मैं मृत्युपुर पहुँचा हूँ। छोटा-सा गाँव, चारों ओर घना जंगल, और बीच में एक झील… या कहूँ तो एक

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