अल्मोड़ा का भूतिया घर

अल्मोड़ा, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में स्थित एक शांत और सुंदर स्थान था, जहां की हवाओं में हमेशा ठंडक होती थी और प्राकृतिक सुंदरता मन को सुकून देती थी। लेकिन इस गांव के बाहरी इलाके में एक पुराना, खंडहर घर था, जिसे “काली हवेली” कहा जाता था। यह घर पूरी तरह से जर्जर हो चुका […]

नगालैंड की भूतिया गुफा

नगालैंड के एक छोटे से गाँव में एक प्राचीन गुफा थी, जिसे ‘कालापानी गुफा’ कहा जाता था। गाँववाले कहते थे कि इस गुफा में कुछ ऐसा था, जिसे कोई भी इंसान जीवित बाहर नहीं लौट सकता था। गुफा के पास का क्षेत्र घना जंगल था, जहाँ अजीब आवाजें आती थीं। गाँववाले इस गुफा के पास

भूतिया महल की कहानी

असम के एक दूरदराज के गाँव में एक प्राचीन महल था। यह महल कई दशकों से खंडहर में तब्दील हो चुका था, और गाँववालों का कहना था कि वहाँ कुछ अजीब घटनाएँ घटित होती थीं। लोग कहते थे कि महल के भीतर एक बुरी आत्मा बसी हुई थी, जो रात के समय बाहर निकलकर गाँववालों

असम की रहस्यमयी जंगल की कहानी

असम के एक छोटे से गाँव में स्थित जंगल के बारे में गाँववालों के बीच एक खौ़फनाक कहानी थी। यह जंगल एक बहुत घना और रहस्यमयी स्थान था, जिसे लोग ‘काला जंगल’ कहते थे। गाँववालों का कहना था कि जो भी उस जंगल में प्रवेश करता था, वह या तो गायब हो जाता था या

तहख़ाने का श्राप (डायरी के पन्नों से)

(भाग 1 – हवेली में पहला कदम) आज मैं इस डायरी की शुरुआत कर रहा हूँ।मैं नहीं जानता कि इसे कभी कोई पढ़ पाएगा या नहीं।लेकिन अगर पढ़े… तो यह मेरी आख़िरी गवाही होगी। दिन 1आज मैं “शवपुर हवेली” पहुँचा।गाँव के बाहरी हिस्से में यह हवेली अकेली खड़ी है।दीवारों पर काई और जाले चिपके हैं।टूटी

अंधकार की परछाइयाँ

अध्याय 1 : शवपुर की दहलीज़ घना अंधेरा फैला हुआ था। हवा सरसराते हुए सूखे पेड़ों से टकरा रही थी और दूर कहीं से किसी अज्ञात प्राणी की चीख सुनाई दे रही थी। यह कोई साधारण गाँव नहीं था, बल्कि एक ऐसा गाँव था जिसका नाम सुनकर ही लोगों की रूह काँप उठती थी—शवपुर। लोग

झील का रहस्य – मृत्युपुर की डायरी

लेखक का नोट:ये पन्ने मुझे मृत्युपुर गाँव के पुराने डाकघर के बंद तहख़ाने से मिले। पन्ने पीले, किनारे जले हुए, और कुछ हिस्से धुंधले। तारीख़ें 1989 की हैं… डायरी – 1 मार्च 1989 सुबह 8:15 बजेआज मैं मृत्युपुर पहुँचा हूँ। छोटा-सा गाँव, चारों ओर घना जंगल, और बीच में एक झील… या कहूँ तो एक

अस्पताल नंबर 13

अध्याय 1 — बंद दरवाज़ा शहर के बाहरी हिस्से में,एक पुराना, जर्जर-सा अस्पताल था — “सिटी जनरल हॉस्पिटल नंबर 13″। पिछले 20 साल से वहाँ इलाज बंद था।लोग कहते थे कि वहाँ रात में लाइटें जलती हैं…जबकि बिजली का कनेक्शन काट दिया गया है। राहुल, एक फ्रीलांस फ़ोटोग्राफ़र,हमेशा से सुनता आया था कि उस अस्पताल

अरण्य के भीतर

अध्याय 1 — सफ़र की शुरुआत बरसात का मौसम था।चार दोस्त — रवि, निखिल, सीमा और प्रिया — ने सोचा किशहर की भीड़-भाड़ से दूर एक वीकेंड ट्रिप पर जाएँगे। निखिल के पास एक पुरानी जीप थी।सबने तय किया कि इस बार वो अरण्य वन्यजीव अभयारण्य जाएंगे,जहाँ बहुत कम लोग जाते हैं। गाँव के लोगों

कालसराय का अंतिम यात्री

अध्याय 1 — भुला हुआ स्टेशन राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा के पास,सूखी ज़मीनों और वीरान जंगलों के बीच एक पुराना रेल स्टेशन था — कालसराय जंक्शन।यह स्टेशन अब किसी मानचित्र में नहीं मिलता,क्योंकि आधिकारिक तौर पर इसे 1985 में बंद कर दिया गया था। लेकिन…गाँव के बुजुर्ग कहते हैं,“रात के ठीक 12 बजे, वहाँ

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