असम के एक दूरदराज के गाँव में एक प्राचीन महल था। यह महल कई दशकों से खंडहर में तब्दील हो चुका था, और गाँववालों का कहना था कि वहाँ कुछ अजीब घटनाएँ घटित होती थीं। लोग कहते थे कि महल के भीतर एक बुरी आत्मा बसी हुई थी, जो रात के समय बाहर निकलकर गाँववालों को परेशान करती थी।
गाँववाले इस महल से डरते थे, और कोई भी वहाँ जाने की हिम्मत नहीं करता था। लेकिन एक दिन, गाँव में एक युवा लड़का, अर्जुन, आया। अर्जुन का मन बहुत साहसी था, और उसे अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं लगती थी। उसने गाँववालों से महल के बारे में सुना और फैसला किया कि वह खुद जाकर देखेगा कि वहाँ क्या है।
अर्जुन का दिल बहुत मजबूत था, और उसने एक रात महल की ओर रुख किया। गाँव से बाहर निकलते ही उसे एक ठंडी हवा का झोंका महसूस हुआ। जैसे ही वह महल के पास पहुँचा, उसने देखा कि महल की इमारतें बहुत पुरानी और जर्जर हो चुकी थीं, लेकिन फिर भी वह कुछ अजीब सी ताकत महसूस कर रहा था। महल का दरवाजा बंद था, लेकिन उसने देखा कि एक खिड़की खुली हुई थी। अर्जुन ने खिड़की से अंदर झाँका और देखा कि अंदर अंधेरा था, लेकिन एक हल्की सी रोशनी कहीं से आ रही थी।
उसने साहसिक कदम बढ़ाते हुए खिड़की से अंदर प्रवेश किया। जैसे ही वह अंदर आया, उसे एक गहरी चुप्पी का एहसास हुआ। महल के अंदर सब कुछ बहुत पुराना और मटमैला था। दीवारों पर सड़ी हुई चादरें और फर्श पर जाले लगे हुए थे। अर्जुन ने मन ही मन सोचा, “क्या यहाँ सच में कोई आत्मा है?” और फिर वह आगे बढ़ने लगा।
महल के एक कमरे में अचानक उसकी नज़र एक पुरानी तस्वीर पर पड़ी। तस्वीर में एक महिला खड़ी थी, जिसका चेहरा बहुत ही डरावना था। उसकी आँखें बड़ी और काली थीं, और उसके चेहरे पर एक भयंकर मुस्कान थी। अर्जुन ने यह तस्वीर देखी और महसूस किया कि कुछ सही नहीं था। अचानक, कमरे में एक अजीब सी गूँजने वाली आवाज आई, “तुमने क्यों मेरे महल में कदम रखा?”
अर्जुन चौंकते हुए पीछे मुड़ा और देखा कि कमरे में कोई खड़ा था। एक कटी-फटी महिला, जिसकी आँखें पूरी काली थीं, और शरीर में सफेद चादर लपेटे हुए थी। “तुम कौन हो?” अर्जुन ने डरते हुए पूछा।
महिला ने उसकी ओर देखा और कहा, “मैं वह आत्मा हूँ, जो इस महल में बसी हुई है। तुमने मेरी जगह में कदम रखा है, और अब तुम भी मेरे साथ रहोगे।”
अर्जुन की धड़कन तेज़ हो गई, और वह समझ नहीं पाया कि अब क्या करे। उसने कमरे के बाहर भागने की कोशिश की, लेकिन वह महिला उसे घेर चुकी थी। अर्जुन का दिल बहुत जोर से धड़कने लगा। वह चाहता था कि कुछ हो, ताकि वह इस जगह से भाग सके। तभी, महिला की हंसी गूंजने लगी, और कमरे के चारों ओर अजीब सी छायाएँ उभरने लगीं। अर्जुन ने सोचा, “क्या वह आत्मा मुझे यहाँ से कभी जाने नहीं देगी?”
भूतिया महल की कहानी (भाग 2)
अर्जुन की सांसें बहुत तेज़ चल रही थीं, और उसके शरीर में एक अजीब सी थकान और भय फैलने लगा था। महिला की आवाज़ अब और डरावनी हो चुकी थी। उसकी आँखें पूरी काली थीं, और वह धीरे-धीरे अर्जुन की ओर बढ़ रही थी। अर्जुन ने देखा कि महिला के शरीर से सफेद धुंआ निकल रहा था, और उसका चेहरा अब एक खौ़फनाक मुस्कान से सजा हुआ था।
“तुम क्यों मुझे यहाँ से जाने नहीं देते?” अर्जुन ने चिल्लाते हुए पूछा। लेकिन महिला सिर्फ हंसी में लहरा रही थी। उसके हंसी की गूँज चारों ओर गूंजने लगी, और अर्जुन को लगा कि वह अपने होश खो देगा। फिर अचानक, महिला की आवाज़ बंद हो गई, और सब कुछ शांत हो गया।
अर्जुन की आँखों में भय था, लेकिन उसने अपनी हिम्मत जुटाई। वह जानता था कि अगर वह अब डर गया, तो वह कभी नहीं निकल पाएगा। उसने तेज़ी से चारों ओर देखा, और उसकी नज़र महल के एक पुराने दरवाजे पर पड़ी। दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था, और अर्जुन को लगा कि शायद वह वहाँ से बाहर जा सकता है।
अर्जुन ने तुरंत उस दरवाजे की ओर बढ़ने का फैसला किया। जैसे ही वह उस दरवाजे के पास पहुँचा, अचानक दरवाजा बंद हो गया। अर्जुन चौंकते हुए पीछे मुड़ा, और देखा कि महिला अब उसके सामने खड़ी थी। “तुम नहीं जा सकते,” महिला ने डरावनी आवाज़ में कहा।
अर्जुन का दिल अब भी जोर-जोर से धड़क रहा था, लेकिन उसे अब भागने का एक तरीका सूझा। उसने अपने भीतर की सारी ताकत लगाई और महिला से कहा, “मुझे जाने दो। मुझे तुम्हारी मदद की ज़रूरत नहीं है। मैं सिर्फ तुम्हारा राज़ जानना चाहता हूँ।”
महिला ने उसकी ओर देखा और मुस्कुराई। “तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें सब कुछ बताऊं?” महिला ने पूछा। अर्जुन ने हाँ में सिर हिलाया।
“ठीक है,” महिला ने कहा, और फिर उसने अपनी आवाज़ में एक गहरी ठंडक डालते हुए कहा, “मैं वही आत्मा हूँ, जो इस महल में फंसी हुई है। कई साल पहले, महल के मालिक ने मेरी हत्या कर दी थी। उसने मुझे और मेरे परिवार को मारकर यहाँ छोड़ दिया। मैं उनकी आत्माओं को शांति नहीं दे सकी और अब मैं यहाँ बसी हुई हूँ। यह महल अब मेरा घर है, और मैं यहाँ हर किसी को लाकर उनकी आत्मा को अपना हिस्सा बना लेती हूँ।”
अर्जुन के मन में और भी सवाल उठे, लेकिन उसने एक और सवाल पूछा, “क्या तुम मुझे भी मारने वाली हो?”
महिला ने उसकी ओर घूरते हुए कहा, “नहीं, मैं तुम्हें मारने नहीं आई। तुम्हारे जैसे लोग कभी-कभी हमारी मदद कर सकते हैं। अगर तुम मेरी मदद करोगे, तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगी।”
अर्जुन ने सुनी-सुनाई बातें अब ध्यान से सुनीं। उसे महसूस हुआ कि महिला सिर्फ बदला लेना चाहती थी, लेकिन उसने सोचा कि उसे इस रहस्य से बाहर निकलने का रास्ता खोजना होगा। उसने कहा, “मैं तुम्हारी मदद करूंगा, लेकिन तुम्हें मुझे इस महल से बाहर जाने देना होगा।”
महिला ने उसकी बात सुनी और एक गहरी सांस ली। फिर उसने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हें जाने दूंगी, लेकिन तुम्हें यह वादा करना होगा कि तुम मेरी आत्मा को शांति दिलाने में मेरी मदद करोगे।”
अर्जुन ने हामी भर दी, और फिर महिला ने उसे महल के अंधेरे गलियारों में से एक रास्ता दिखाया। अर्जुन ने महिला की ओर देखा, और फिर उसे महल से बाहर जाने का रास्ता मिल गया। लेकिन जैसे ही वह बाहर निकला, उसने महसूस किया कि महिला अब भी उसके पीछे खड़ी थी, उसकी आँखों में एक नफरत भरी हुई थी।
अर्जुन अब जानता था कि अगर वह महिला की मदद करना चाहता था, तो उसे पहले इस महल के इतिहास को जानना होगा। अगले दिन, अर्जुन ने गाँव के बुजुर्गों से उस महल के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की। उसने सुना कि महल में कई साल पहले एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें उस महिला के परिवार को मारा गया था। महल के मालिक ने अपनी हवस और लालच के लिए उन्हें मार दिया था, और तब से वह महिला बदला लेने के लिए यहाँ बसी हुई थी।
अर्जुन ने अब यह ठान लिया था कि वह उस महिला की आत्मा को शांति दिलाएगा, ताकि वह महल और गाँव में शांति लौट सके।
भूतिया महल की कहानी (भाग 3)
अर्जुन ने अब निर्णय लिया था कि वह उस महिला की आत्मा को शांति दिलाने के लिए महल का इतिहास जानने की पूरी कोशिश करेगा। उसने गाँव के बुजुर्गों से और अधिक जानकारी इकट्ठा की और समझने की कोशिश की कि वह महिला कौन थी और किसने उसकी हत्या की थी।
गाँव के एक बुजुर्ग ने अर्जुन से कहा, “महल का मालिक, राजा प्रताप सिंह, बहुत क्रूर था। वह एक लालची आदमी था। उसकी हवस और ताकत की प्यास ने उसे निर्दयी बना दिया। जब उसकी नजर उस महिला पर पड़ी, तो उसने उसे और उसके परिवार को मार डाला। उसे लगता था कि यह सब उसकी संपत्ति का हिस्सा हो सकता है। लेकिन एक दिन, उसकी खुद की आत्मा उस महल में फंसी रह गई, और उसके बाद वह कभी भी शांति से नहीं रह पाया। अब, उस महिला की आत्मा इस महल में बसी हुई है, और वह बदला लेने के लिए सबको अपनी जाल में फंसा लेती है।”
अर्जुन ने सुनी हुई बातें ध्यान से सुनीं और सोचा कि उसे अब इस भूतिया महल की सच्चाई जाननी चाहिए। उसने गाँव के बुजुर्गों से सुनी हुई जानकारी को एकत्र किया और महल की पुरानी किताबों में दर्ज इतिहास का अध्ययन किया। अर्जुन को एक किताब में यह जानकारी मिली कि उस महिला का नाम राधा था, और वह महल के एक पुराने राजा की पत्नी थी।
राधा का परिवार एक संपन्न और खुशहाल परिवार था। लेकिन एक दिन, राजा प्रताप सिंह ने राधा और उसके परिवार को जहर दे दिया, ताकि वह महल की संपत्ति और दौलत पर कब्जा कर सके। राधा ने अपनी मृत्यु से पहले एक शाप दिया था कि जो भी इस महल में आएगा, वह उसकी तरह तड़पते हुए मरेगा। राधा की आत्मा तब से महल में फंसी हुई थी, और उसने बदला लेने की कसम खाई थी।
अर्जुन ने यह सब पढ़कर महसूस किया कि राधा की आत्मा को शांति तभी मिल सकती है जब उसका बदला पूरा हो। अर्जुन ने ठान लिया कि वह राधा की आत्मा को शांति दिलाने के लिए महल के इतिहास को उजागर करेगा और राजा प्रताप सिंह की आत्मा को भी मुक्ति दिलाएगा।
अर्जुन ने फिर महल में जाकर वह सभी किताबें और पुरानी चीज़ें इकट्ठा कीं, जो राजा प्रताप सिंह और राधा के बारे में जानकारी देती थीं। उसने राजा प्रताप सिंह के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की, यह जानकर कि उसकी आत्मा भी महल में कैद है, और उसे शांति की आवश्यकता थी। अर्जुन को यह समझ में आ गया कि राधा और प्रताप सिंह की आत्माएँ दोनों इस महल में बसी हुई थीं, और उन्हें शांति तभी मिलेगी जब उनका हिसाब बराबर हो जाएगा।
अर्जुन ने गाँव के एक और बुजुर्ग से सुना था कि महल की सबसे बड़ी कक्ष में एक पुराना तिजोरी था, जिसमें राजा प्रताप सिंह की सारी संपत्ति और काले कर्मों की सच्चाई थी। अर्जुन ने तय किया कि वह उस तिजोरी को खोलेगा, ताकि वह दोनों आत्माओं को शांति दिलाने का मार्ग खोज सके।
अर्जुन ने महल के अंदर उस कक्ष की ओर बढ़ते हुए, दरवाजा खोला। अंदर की हवा और भी ठंडी हो गई थी। जैसे ही उसने तिजोरी का ताला खोला, एक सन्नाटे में एक हल्की सी धुंआ उठने लगी, और तिजोरी के अंदर एक चमकती हुई किताब थी। वह किताब राजा प्रताप सिंह के काले कर्मों और उसकी सारी योजनाओं का विवरण देती थी।
अर्जुन ने वह किताब निकाली और उसकी सामग्री को पढ़ना शुरू किया। किताब में लिखा था कि प्रताप सिंह ने कई निर्दोष लोगों को मारकर उनकी संपत्ति हड़पने की योजना बनाई थी, और राधा को भी उसने इसी उद्देश्य से मार डाला था। लेकिन जब उसने राधा की आत्मा को नष्ट करने की कोशिश की, तो उसकी आत्मा महल में बसी रही, और प्रताप सिंह भी अपनी गलती के कारण यहीं फंसा रहा।
अर्जुन ने अब यह समझ लिया था कि राधा की आत्मा की शांति तभी हो सकती थी जब राजा प्रताप सिंह को अपने किए का पश्चाताप करना पड़े। अर्जुन ने उस किताब में एक खास मंत्र पाया, जिससे दोनों आत्माओं को मुक्ति मिल सकती थी। उसने वह मंत्र पढ़ा और महल के बड़े हॉल में जाकर दोनों आत्माओं के सामने खड़ा हो गया।
अर्जुन ने मंत्र पढ़ते हुए कहा, “राधा और प्रताप सिंह, तुम दोनों के कर्मों का हिसाब अब पूरा हो चुका है। मैं तुम्हें मुक्ति देता हूँ, ताकि तुम शांति से विश्राम कर सको।”
सिर्फ कुछ क्षणों बाद, महल के चारों ओर हल्की सी रोशनी छा गई, और दोनों आत्माएँ धीरे-धीरे गायब हो गईं। अर्जुन ने महसूस किया कि महल की हवा अब पूरी तरह से शांति से भर चुकी थी। वह जानता था कि अब राधा और प्रताप सिंह की आत्माएँ शांति से विश्राम करेंगी।
अर्जुन ने महल से बाहर आकर गाँववालों को बताया कि अब महल में शांति आ गई है। गाँववाले पहले डरे हुए थे, लेकिन जब उन्होंने अर्जुन की बात मानी, तो सब कुछ सामान्य हो गया। अर्जुन ने गाँव में अपना जीवन फिर से शुरू किया, और वह हमेशा यह याद रखेगा कि कभी-कभी, साहस और ज्ञान से डर को हराया जा सकता है।