शिव मंदिर का भूत (Ghost of Shiva temple)

पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव में एक प्राचीन शिव मंदिर खड़ा था, जो सदियों से गाँववालों की आस्था का केंद्र रहा था। यह मंदिर गाँव के बीचों-बीच एक घने जंगल के किनारे स्थित था। गाँव के लोग कहते थे कि इस मंदिर में कोई रहस्यमय शक्ति बसती है, जो सभी की रक्षा करती है। लेकिन कुछ सालों से मंदिर के बारे में अजीब-अजीब बातें सुनने को मिल रही थीं। लोग कहते थे कि रात के समय, मंदिर के पास से गुजरने वालों को अजीब आवाज़ें सुनाई देती थीं, जैसे कोई शेर की तरह गुर्राता हो या फिर गहरी सांसें छोड़ता हो।

यह कहानी तब शुरू होती है, जब गाँव के एक युवक, अर्जुन, ने शिव मंदिर के बारे में सुनी हुई बातों को चुनौती देने का मन बनाया। अर्जुन बहुत साहसी था और उसे डर नाम की कोई चीज़ नहीं थी। एक दिन उसने ठान लिया कि वह रात के समय मंदिर जाएगा और देखेगा कि सचमुच वहाँ कुछ होता है या नहीं। गाँववालों ने उसे बहुत समझाया, लेकिन अर्जुन ने किसी की नहीं सुनी और रात के वक्त मंदिर जाने का निश्चय किया।

रात का समय था, और गाँव में सन्नाटा छा गया था। अर्जुन मंदिर की ओर बढ़ा। जैसे ही वह मंदिर के पास पहुँचा, हवा की गति तेज़ हो गई। यह हवा बहुत ठंडी और निस्तब्ध थी, जो उसके शरीर को अंदर तक ठंडा कर रही थी। मंदिर का प्राचीन दरवाजा धीरे-धीरे खुलता है, और अंदर से एक अजीब सी आवाज़ सुनाई देती है, जैसे कोई मंत्र पढ़ रहा हो। अर्जुन ने डरते-डरते अंदर कदम रखा।

अंदर का दृश्य कुछ और ही था। मंदिर की दीवारों पर मोटे ताम्बे की पट्टियाँ थीं, जो समय के साथ धुंधली हो चुकी थीं। शिवलिंग के पास जलते हुए दीपक की हल्की सी रोशनी थी, लेकिन मंदिर की खामोशी में कुछ तो था जो अर्जुन को बेचैन कर रहा था। अचानक, उसके कानों में एक गहरी आवाज़ आई, “तुम यहाँ क्यों आए हो?” अर्जुन ने कांपते हुए देखा कि मंदिर में कोई और नहीं था, लेकिन फिर भी वह आवाज़ सुनाई दी।

अर्जुन ने हिम्मत जुटाते हुए कहा, “मैं सिर्फ यह देखने आया हूँ कि क्या यहाँ कुछ अजीब हो रहा है।” तभी अचानक मंदिर के अंदर से एक धुंधला सा आकार उभरने लगता है। वह आकार धीरे-धीरे स्पष्ट होता गया, और अर्जुन ने देखा कि वह कोई साधू पुरुष था, जो शिवलिंग के पास खड़ा था। उसकी आँखें पूरी तरह से सफेद हो चुकी थीं, और उसकी त्वचा सड़ी हुई थी, जैसे वह कोई मृत व्यक्ति हो। उसकी मुस्कान में एक खौ़फनाक तासीर थी, जो अर्जुन के रोंगटे खड़े कर देती थी।

अर्जुन ने घबराते हुए पूछा, “त-तुम कौन हो?” साधू की हंसी सुनाई दी, और वह धीरे-धीरे अर्जुन की ओर बढ़ने लगा। उसके कदमों की आवाज़ मंदिर में गूंज रही थी, जैसे उसके साथ कई और कदम आ रहे हों। अर्जुन के दिल की धड़कन तेज़ हो गई, लेकिन उसने भागने की कोशिश नहीं की। वह जानता था कि उसे इस खौ़फनाक सत्य का सामना करना होगा।

साधू के पास पहुँचते ही वह रुक गया और बोला, “तुमने हमारी शांति भंग की है, अब तुम्हे इसका खामियाजा भुगतना होगा।” अर्जुन ने घबराते हुए कहा, “मैं बस जानना चाहता था कि यहाँ क्या हो रहा है।” साधू की आँखें अचानक लाल हो गईं और उसने अर्जुन को जकड़ लिया। अर्जुन ने महसूस किया कि वह साधू की पकड़ में बुरी तरह से जकड़ चुका था, जैसे उसकी आत्मा उस साधू के शरीर में समाने वाली हो।

अर्जुन के शरीर में एक अजीब सी जलन फैलने लगी, और वह जैसे दम तोड़ने लगा। तभी साधू ने उसकी आँखों में देखा और बोला, “तुमने आकर हमसे पूछा था न, अब तुम जानते हो कि हम कौन हैं। हम वह हैं जो इस मंदिर में बसी आत्माओं के लिए श्राप बने हैं। हम वही हैं जो अब तक हर रात किसी को अपने जाल में फंसा कर उन्हें मंदिर की गहराई में समा लेते हैं। अब तुम्हारी बारी है।”

अर्जुन की आँखों के सामने अंधेरा छा गया और उसकी चेतना धीरे-धीरे खोने लगी। वह पूरी तरह से मूर्छित हो गया। जब उसे होश आया, तो वह पाया कि वह मंदिर के गर्भगृह में पड़ा हुआ था, और उसके चारों ओर काले साए थे। साधू अब उसके पास नहीं था, लेकिन उसकी हंसी अब भी अर्जुन के कानों में गूंज रही थी। अर्जुन ने महसूस किया कि वह अब इस मंदिर का हिस्सा बन चुका है। वह जानता था कि उसे अब यहाँ से कभी निकलने नहीं दिया जाएगा।

अर्जुन की आत्मा अब उस मंदिर की शापित आत्माओं का हिस्सा बन चुकी थी। गाँव के लोग कहते हैं कि अब भी अर्जुन की चीखें मंदिर से सुनाई देती हैं। रात के समय जब भी कोई व्यक्ति उस मंदिर के पास जाता है, वह अर्जुन का चेहरा देखता है, जो साधू की तरह ही अजीब तरीके से मुस्कुराता हुआ दिखता है। मंदिर की दीवारें अब भी गूंजती हैं, और हवा में अजीब सी हंसी सुनाई देती है, जैसे कोई अपने क़ैदी को छोड़ने का इंतजार कर रहा हो।

गाँववालों का मानना था कि अब तक कोई भी व्यक्ति उस मंदिर में कदम नहीं रखता था। जो भी जाता, वह कभी लौटकर नहीं आता। और जब भी कोई वहाँ से गुजरता, वह अर्जुन की आत्मा को देखता था, जो उस साधू की तरह मुस्कुराती हुई उन्हें डराने के लिए आती थी।

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