बिहार के एक छोटे से गाँव में एक काले रंग की रहस्यमयी झील के बारे में कई तरह की अजीब कहानियाँ सुनाई जाती थीं। इस झील के बारे में गांव के बुजुर्गों का कहना था कि यह झील कभी भी किसी को भी अपने अंदर खींच सकती है। लोग कहते थे कि इस झील में एक भूतनी बसी हुई है, जो रात के अंधेरे में निकल कर लोगों को डुबो देती है।
किसी के पास इसका कोई सटीक कारण नहीं था, लेकिन सभी लोग इस झील के पास जाने से डरते थे। हालांकि, एक दिन गाँव में एक युवक नामक रवीश आया, जो बहुत साहसी और निडर था। उसे इन सभी कहानियों से कोई डर नहीं था। उसने ठान लिया कि वह इस रहस्य को उजागर करेगा।
रवीश ने एक रात अपने दोस्तों के साथ झील के पास जाने का निर्णय लिया। उसके साथ दो और दोस्त, मोहन और सतीश भी थे। तीनों रात के अंधेरे में झील के पास पहुँचे। वहां की खामोशी अजीब थी। रात का समय था और झील का पानी काले रंग में डूबा हुआ था, जैसे उसमें कुछ छिपा हुआ हो।
रवीश ने दोस्तों से कहा, “तुम लोग डर मत खाओ, मैं सब कुछ देख लूंगा।” उसने झील के पास जाकर झील के पानी में एक पत्थर डाला। पत्थर गिरते ही झील का पानी थोड़ा हिलने लगा। अचानक, एक अजीब सी आवाज आई, जो बहुत ही डरावनी थी। मोहन और सतीश डर से कांपने लगे, लेकिन रवीश ने साहस नहीं खोया।
जैसे ही रवीश ने झील के पानी को फिर से गौर से देखा, उसने देखा कि पानी के भीतर कुछ आकृतियाँ हलचल कर रही थीं। यह आकृतियाँ धीरे-धीरे आकार लेने लगीं और अचानक एक भूतनी की आकृति झील के पानी से बाहर आई। उसकी आँखें काले थे और चेहरा भयावह था।
भूतनी ने रवीश को घूरते हुए कहा, “तुमने मेरी शांति में खलल डाला है, अब तुम सब मुझे यहाँ से जाने नहीं पाओगे।” उसकी आवाज इतनी डरावनी थी कि मोहन और सतीश घबराकर भागने लगे। लेकिन रवीश ने ठान लिया था कि वह इस भूतनी का सामना करेगा और उसका रहस्य उजागर करेगा।
रवीश ने साहसिक कदम उठाया और भूतनी से कहा, “तुम क्या चाहती हो? क्यों इस झील में बसी हुई हो?” भूतनी ने उसकी आँखों में घूरते हुए कहा, “मैं एक समय इस गाँव की निवासी थी। मेरी शादी हुई थी और मेरा एक बच्चा भी था। लेकिन एक रात गाँव के लोगों ने मेरे परिवार को मार डाला और मुझे इस झील में डाल दिया। अब, मैं यहाँ की आत्मा बन चुकी हूँ और जिनका भी मैं सामना करती हूँ, उन्हें अपनी सजा देती हूँ।”
भूतनी के इस अतीत को जानकर रवीश को बहुत दुख हुआ। उसने सोचा, “क्या मैं इस भूतनी की मदद कर सकता हूँ?” उसने भूतनी से कहा, “अगर तुम मुझे अपना आत्मा शांति से छोड़ दो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ। तुम्हें इस गाँव और झील से मुक्ति मिल सकती है।”
भूतनी ने रवीश की बातों को सुना और कुछ पल के लिए चुप हो गई। फिर उसने कहा, “तुम सच में मेरी मदद करना चाहते हो?” रवीश ने निडर होकर कहा, “हाँ, मैं तुम्हारी मदद करूंगा। लेकिन तुम्हें पहले इस झील और इस गाँव से मुक्ति पाना होगा।”
भूतनी ने रवीश से एक तरीका पूछा, “तुम्हें क्या करना होगा?” रवीश ने उसे कहा, “तुम्हें यह झील छोड़नी होगी और यह गांव छोड़ना होगा, ताकि तुम्हारी आत्मा शांति पा सके।”
भूतनी ने रवीश की बातों को स्वीकार किया और अपनी आत्मा को शांति देने के लिए झील से बाहर निकलने का फैसला किया। जैसे ही भूतनी ने झील से बाहर कदम रखा, उसकी पूरी आकृति धीरे-धीरे गायब होने लगी। साथ ही झील का पानी भी धीरे-धीरे शांत हो गया। अब, झील का पानी साफ और नीला हो गया था।
गाँव में यह खबर फैली कि झील में बसी हुई भूतनी अब शांति से चली गई है। रवीश ने गाँववालों को यह सच बताया और सबने एक साथ मिलकर झील का पुनः सम्मान किया। रवीश ने अपनी साहसिकता और निडरता से उस भूतनी को शांति दी, जो वर्षों से इस गाँव की बर्बादी का कारण बनी हुई थी।
गाँव में अब कोई भी झील से नहीं डरता था और उस रात के बाद से वहाँ कोई अजीब घटना नहीं घटी। रवीश का नाम गाँव में एक नायक के रूप में लिया जाता है, जिसने न केवल एक भूतनी को मुक्ति दिलाई, बल्कि एक पूरे गाँव को अंधेरे से निकाल कर शांति दी।