कर्ण पिशाचिनी

बैंगलोर के पास स्थित एक पुराना गाँव, कर्णवाड़ी, हमेशा से ही रहस्यमय रहा है। इस गाँव का नाम हमेशा से ही अजीबो-गरीब घटनाओं से जुड़ा रहा था, और इसके बारे में गाँव के बुजुर्गों की कई डरावनी कहानियाँ हैं। कहा जाता था कि यहाँ के जंगलों में एक कर्ण पिशाचिनी का वास है – एक ऐसी राक्षसी आत्मा, जो किसी एक निर्दोष व्यक्ति का जीवन लीलने के बाद हर रात उस गाँव के पास आती थी।

कर्णवाड़ी का माहौल हमेशा से कुछ घना और डरावना सा था, लेकिन गाँव में कुछ ही लोग थे जो इस बात को मानते थे। शहरों की हलचल से दूर, कर्णवाड़ी में बसने वाले लोग भी अपनी जिंदगी में बस काम और आराम में व्यस्त रहते थे। लेकिन जब भी कोई बाहरी व्यक्ति गाँव आता, तो उसे जल्दी ही गाँव के अंधेरे राज़ के बारे में बताया जाता।

नीलू, एक युवा और साहसी लड़की, जो बैंगलोर में कॉलेज पढ़ाई करती थी, अपने दोस्तों के साथ कर्णवाड़ी घूमने जाने का फैसला करती है। उसे पुराने और डरावने स्थानों में घूमने का शौक था, और वह जानना चाहती थी कि आखिर इस गाँव के बारे में इतनी कहानियाँ क्यों फैली हैं।

नीलू: (अपने दोस्तों से) “चलो यार, कर्णवाड़ी चलते हैं! मुझे पता चला है कि वहाँ कुछ अजीब सा है। हो सकता है वहाँ जाने से कुछ रोमांचक मिले!”

शिव: (हँसते हुए) “तुम भी न, नीलू। यह सब सिर्फ गाँव की कहानियाँ हैं। मुझे तो लगता है वहाँ कुछ नहीं है, बस अंधेरे में डर है!”

लेकिन नीलू की जिज्ञासा ने उसे और उसके दोस्तों को कर्णवाड़ी की ओर खींच लिया। वे इस डरावनी यात्रा की शुरुआत करने के लिए तैयार थे।

गाँव में पहुँचते ही, नीलू और उसके दोस्तों ने महसूस किया कि वहाँ का माहौल कुछ अलग था। सड़कें सुनसान थीं, और घरों की खिड़कियाँ बंद पड़ी थीं। जो लोग दिखे भी, वे किसी न किसी कारण से उनसे दूर रहने की कोशिश कर रहे थे। गाँव के बुजुर्ग, जो एक छोटे से चाय के स्टॉल पर बैठे थे, नीलू और उसके दोस्तों को देख कर घूरते रहे।

नीलू: (चाय वाले बुजुर्ग से) “नमस्ते अंकल, हम कर्णवाड़ी के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं। क्या आप हमें कुछ बता सकते हैं?”

चाय वाला बुजुर्ग: (धीरे से) “तुम लोग यहाँ क्यों आए हो? यह गाँव तुम्हारे लिए नहीं है। यहाँ की कहानियाँ तुमसे नहीं जुड़ी हैं। बेहतर होगा तुम लौट जाओ।”

लेकिन नीलू के लिए यह चेतावनी थी नहीं, बल्कि एक और कदम था आगे बढ़ने का। रात का समय था, और जैसे ही सूर्य अस्त हुआ, पूरे गाँव में अजीब सी चुप्पी छा गई।

शिव: (हँसते हुए) “कौन डरता है, यार? हम थोड़ी देर में लौट आएंगे।”

लेकिन गाँव के अंदर जाते ही, नीलू और उसके दोस्तों को एक अजीब सा खौ़फ महसूस हुआ। आसपास के जंगलों में हवाएँ चल रही थीं, और वहाँ की चुप्पी में कोई भी आवाज सुनाई नहीं देती थी। तभी, अचानक एक धुंधली छाया उनके कमरे में दिखाई दी।

नीलू: (चौंकते हुए) “तुमने देखा? वहाँ क्या था?”

शिव: (घबराते हुए) “क्या तुमने वह देखा? वो आकृति… क्या वह कोई इंसान था?”

जैसे ही वे उस जगह के पास पहुँचे, एक तेज़ हवा का झोंका आया, और उस धुंधली आकृति ने एक डरावनी चीख मारी। यह चीख इतनी खौ़फनाक थी कि वे सभी डर से काँपने लगे।

नीलू: (सिर झुकाते हुए) “यह… यह क्या था? क्या हमें यहाँ से तुरंत निकलना चाहिए?”

लेकिन अजनबी ताकतें उनकी राह में खड़ी थीं। अचानक गाँव में अजीब सी रोशनी फैलने लगी, और वहीं एक पुरानी और राक्षसी आवाज गूंजने लगी, जो सीधे उनकी आत्मा तक पहुँचने का प्रयास कर रही थी।

आवाज़: (रूहानी रूप में) “तुम लोग मेरी शांति को क्यों disturbed करते हो? यहाँ नहीं आना चाहिए था तुम्हें।”

नीलू और उसके दोस्तों के मन में एक ही सवाल था, “क्या वे कर्ण पिशाचिनी के रहस्य को सुलझा पाएंगे?” गाँव में जो डर और खौ़फ था, वह अब उनके दिलों में घर कर चुका था। वे अब जानने के लिए और भी अधिक जिज्ञासु हो गए थे कि क्या सच में कोई ऐसी आत्मा है, या यह सब केवल गाँव के लोगों की बनाई हुई एक डरावनी कहानी है।

नीलू: (शिव से) “हम क्या करें? क्या हम इस गाँव से निकल जाएं, या हम सच में इसका सामना करें?”

शिव: (घबराते हुए) “यार, अगर हम यहाँ से जाते हैं, तो यह रहस्य हमें हमेशा परेशान करेगा। हम जिस चीज़ से डर रहे हैं, उसे जानने का कोई तरीका तो होना चाहिए।”

दीपिका: (सिर झुकाते हुए) “लेकिन क्या अगर हम गलत जगह जा रहे हैं? क्या हमें खुद को खतरे में डालना चाहिए?”

अमन: (निर्णायक स्वर में) “अगर हम डरकर भाग गए, तो यह डर हमें कभी नहीं छोड़ेगा। हमें इसके बारे में पूरी सच्चाई जाननी होगी।”

यह सोचकर उन्होंने एक और कदम आगे बढ़ाया। अब उनका उद्देश्य था कि वे कर्णवाड़ी के हर कोने को अच्छे से समझें और पता करें कि यह आत्मा कौन थी, और क्यों वह गाँव में आतंक फैला रही थी।

वह दिन धीरे-धीरे ढल रहा था, और शाम का समय आ गया था। गाँव में अजीब सी खामोशी छाई हुई थी, जैसे सभी लोग डर के मारे अपनी-अपनी जगहों पर दुबक कर बैठे हों। तभी, नीलू और उसके दोस्तों को गाँव के बुजुर्गों से एक और सुराग मिला।

गाँव के बुजुर्ग (दादा जी): (धीरे से) “तुम लोग इस जगह पर आकर बहुत बड़ी गलती कर रहे हो। वह कर्ण पिशाचिनी एक पुरानी आत्मा है, जो इस गाँव में कई सालों से वास करती है। उसने कभी किसी की मदद नहीं की, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी शक्तियों से खत्म किया। वह आत्मा पहले एक जादूगरनी थी, जिसे अपने जादू का अत्यधिक नशा हो गया था।”

नीलू: (चिंतित होकर) “तो यह पिशाचिनी कोई साधारण आत्मा नहीं है, बल्कि जादूगरनी थी?”

दादा जी: “हां, पहले वह कर्णवाड़ी के एक बड़े महल की मालकिन थी, और उसने अपनी जादुई शक्तियों से पूरे गाँव को नियंत्रित किया था। लेकिन एक दिन उसके जादू का असर उलटा पड़ा, और उसकी आत्मा हमेशा के लिए इस गाँव में बंधी रह गई। कोई भी बाहरी व्यक्ति उसकी शक्ति को खत्म नहीं कर पाया।”

शिव: “तो क्या इसका मतलब यह है कि हम कभी इस आत्मा को शांति नहीं दे सकते?”

दादा जी: (काँपते हुए) “यह आत्मा बहुत शक्तिशाली है। सिर्फ एक विशेष समय पर और विशेष तरीके से ही इसे खत्म किया जा सकता है।”

अब नीलू और उसके दोस्तों ने तय किया कि वे इस आत्मा को शांति देने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। गाँव में जादू और तंत्र-मंत्र से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने के बाद, उन्होंने पुराने मंदिर और महल की ओर जाने का निश्चय किया।

रात का समय था। घना अंधेरा और तेज़ हवा चल रही थी। जैसे ही वे पुराने मंदिर के पास पहुँचे, वहाँ एक अजीब सी हलचल महसूस हुई। मंदिर के चारों ओर एक नीली रोशनी घिरी हुई थी, जैसे कुछ तंत्र-मंत्र चल रहा हो। अचानक, दीपिका ने देखा कि मंदिर के अंदर से एक सफेद धुंआ बाहर आ रहा था, जो धीरे-धीरे आस-पास के वातावरण को और भी डरावना बना रहा था।

दीपिका: (डरी हुई) “यह… यह क्या हो रहा है?”

नीलू: (निश्चय के साथ) “यह वही जगह है। हमें यहाँ से पीछे नहीं हटना चाहिए।”

उन्होंने धीरे-धीरे मंदिर के अंदर कदम बढ़ाए। जैसे ही वे मंदिर के अंदर गए, उन्हें महसूस हुआ कि चारों ओर कोई साया उन्हें घेर रहा था। उन्हें वहाँ की दीवारों पर जादू के निशान और तंत्र-मंत्र के संकेत साफ दिखने लगे। तभी, अचानक एक तेज़ और डरावनी चीख सुनाई दी।

आवाज़: (राहुल की ओर) “तुम लोग मेरी शांति क्यों disturbed करते हो? तुम इस गाँव को छोड़ दो, नहीं तो तुम मेरी क़ैद में आ जाओगे!”

नीलू: (घबराते हुए) “यह वही आवाज़ है, जो हमें पहले सुनाई दी थी! क्या हम सच में इस आत्मा को शांति दे पाएंगे?”

अचानक, मंदिर के एक कोने में कर्ण पिशाचिनी की अजीब सी आकृति उभर आई। वह एक महिला की तरह दिखती थी, लेकिन उसकी आँखें जलती हुई थीं और उसके चेहरे पर एक भयावह मुस्कान थी।

कर्ण पिशाचिनी: (घृणित आवाज में) “तुम मुझे नहीं पहचानते, लेकिन मैं तुम्हारे डर को महसूस कर सकती हूँ। तुम मेरी शक्ति को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हो, लेकिन तुम कभी भी मुझे नहीं हरा सकते। मैं इस गाँव की आत्मा हूँ।”

नीलू और उसके दोस्तों के दिलों में भय था, लेकिन साथ ही एक दृढ़ निश्चय भी था। कर्ण पिशाचिनी, जो पहले एक साधारण जादूगरनी थी, अब एक भयानक राक्षसी रूप में गाँव के हर कोने में फैल चुकी थी। मंदिर में उसकी भयानक उपस्थिति ने उनके शरीर में सिहरन दौड़ा दी, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं थे।

नीलू: (गहरी सांस लेकर) “हम अब रुकने वाले नहीं हैं। हमें इसका सामना करना ही होगा, चाहे जो हो।”

अमन: “यह कोई सामान्य आत्मा नहीं है। हमें पूरी तरह से तैयार होकर लड़ना होगा, और वह भी इस जादू को खत्म करने के तरीके से।”

तभी, कर्ण पिशाचिनी की आकृति और स्पष्ट हो गई। उसका चेहरा आग की तरह जलता हुआ था, और उसकी आँखों में शैतानी क्रोध था। उसकी हंसी सुनकर पूरा मंदिर गूंजने लगा, और चारों ओर अंधकार फैलने लगा। यह दृश्य इतना डरावना था कि नीलू और उसके दोस्तों को लगा कि वे अब कभी नहीं बच पाएंगे। लेकिन उन्होंने तय किया था कि वे हर हाल में उस पिशाचिनी का सामना करेंगे।

कर्ण पिशाचिनी: (हंसी में) “तुम लोगों ने बहुत बड़ी गलती की है। तुम नहीं जानते कि यह शक्ति कितनी भयानक है। अगर तुमने इसे चुनौती दी, तो तुम्हारी आत्माएँ हमेशा के लिए इस काले अंधेरे में खो जाएंगी।”

नीलू और दीपिका ने एक-दूसरे की आँखों में देखा। वे जान गए थे कि अगर वे हार गए तो न केवल उनकी, बल्कि गाँव की भी सारी आत्माएँ कर्ण पिशाचिनी के कब्जे में आ जाएंगी।

दीपिका: “हम डरने वाले नहीं हैं! हम जानते हैं कि तुम एक बार गिर चुकी हो, और अगर हम साथ हैं, तो हम तुम्हें फिर से गिरा सकते हैं।”

शिव: (निर्णय के साथ) “हम तुम्हारा मुकाबला करेंगे, चाहे तुम हमें कितना भी डराओ। हम जो करना चाहते हैं, वह करेंगे!”

तभी, अमन ने वह पुरानी डायरी खोली, जिसे उन्होंने गाँव के बुजुर्ग से सुनी थी। उसमें लिखा था कि कर्ण पिशाचिनी को हराने का एक तरीका था – यह मंत्र को सही समय पर और सही दिशा में बोलना था।

अमन: (मंत्र पढ़ते हुए) “है कर्ण पिशाचिनी, तू जो इस धरती पर शांति नहीं लाती, तेरी शक्तियाँ अब खत्म होंगी। जो तूने लिया, वह अब वापस होगा।”

जैसे ही अमन ने मंत्र पढ़ा, कर्ण पिशाचिनी की आँखों में एक अजीब सी जलन और क्रोध बढ़ने लगा। उसकी आवाज़ एक खौ़फनाक चीख में बदल गई, और मंदिर के चारों ओर बिजली कड़कने लगी। कर्ण पिशाचिनी ने अपनी पूरी ताकत से उन्हें डराने की कोशिश की। उसकी आँधियाँ और तूफान का सामना करने के बावजूद, नीलू और उसके दोस्त वही खड़े रहे।

कर्ण पिशाचिनी: (घृणित स्वर में) “तुम लोग अभी भी मुझे नहीं हरा सकते! तुम सब मेरी ताकत के आगे कमजोर हो!”

नीलू और उसके दोस्तों ने पूरी ताकत से वह मंत्र फिर से बोला, और इस बार कर्ण पिशाचिनी के शरीर में एक अजीब सी हलचल शुरू हो गई। वह पूरी तरह से बेकाबू हो गई थी, और उसकी आवाज़ में अब घबराहट थी। उसका शरीर एक अनहोनी तरीके से तड़कने लगा, जैसे उसके अंदर की सारी शक्ति खत्म हो रही हो।

नीलू: “अब तुम्हारी बारी है, कर्ण पिशाचिनी। तुम्हारी पूरी शक्ति खत्म हो चुकी है। तुम्हें अब शांति मिलेगी!”

कर्ण पिशाचिनी ने एक आखिरी चीख मारी, और उसकी पूरी आकृति एक धमाके के साथ गायब हो गई। जैसे ही वह गायब हुई, मंदिर में चारों ओर शांति छा गई। अंधकार जो अब तक गाँव पर छाया हुआ था, वह खत्म हो गया।

दीपिका: (आश्चर्यचकित होकर) “क्या यह सच है? क्या हम जीत गए?”

अमन: (संतुष्ट होकर) “हां, हम जीत गए। हम ने कर्ण पिशाचिनी की शक्ति को खत्म कर दिया और उसे शांति दी।”

तभी, एक हलकी सी रोशनी मंदिर के अंदर फैलने लगी, जैसे उस आत्मा को सच में मुक्ति मिल गई हो। गाँव की ओर अब अजीब सा खामोशी और शांति लौट आई थी। कर्णवाड़ी अब सुरक्षित था, और उसकी आत्माएँ अब शांति से अपने रास्ते पर जा सकीं थीं।

नीलू और उसके दोस्तों के लिए यह एक राहत की बात थी कि कर्ण पिशाचिनी की आत्मा अब शांति से चली गई थी। गाँव में जो अंधेरा और डर छाया हुआ था, वह अब समाप्त हो चुका था। कर्णवाड़ी के लोग अब खुलकर सांस ले पा रहे थे। लेकिन, जैसा कि पुरानी कहानियों में कहा गया था, कभी-कभी अंधेरे के बाद एक और अंधकार आता है, और कभी-कभी वह आपके सामने एक नए रूप में आता है।

नीलू, दीपिका, अमन और शिव, सभी ने सोचा था कि कर्ण पिशाचिनी की आत्मा के जाने के बाद गाँव में सब कुछ सामान्य हो जाएगा, लेकिन वे नहीं जानते थे कि यह खौ़फनाक कहानी अब तक का सबसे बड़ा मोड़ लेने वाली थी।

नीलू: (आश्चर्यचकित होकर) “क्या तुम सब भी महसूस कर रहे हो? कुछ तो अजीब सा हो रहा है, मुझे लगता है जैसे अब भी कुछ बाकी है।”

दीपिका: (चिंतित होकर) “हाँ, मैंने भी यह महसूस किया। क्या हमें और कुछ करना होगा?”

कर्णवाड़ी में अब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन फिर भी कुछ अजीब सी घटना हो रही थी। होस्टल के पास बगीचे में अचानक अजीब सी हवाएँ चलने लगीं, और गाँव के कुछ पुराने हिस्सों में फिर से रात को हलकी सी आवाज़ें सुनाई देने लगीं। जैसे किसी ने धीरे-धीरे उनके नाम पुकारा हो।

अमन: “क्या यह फिर से वही आत्माएँ हैं जो हमारे पीछे आई हैं?”

शिव: “क्या तुम भी, अमन? हमने कर्ण पिशाचिनी को हरा दिया है, अब हम फिर से क्यों डरें?”

लेकिन नीलू का दिल अब भी बहुत भारी था। उसने महसूस किया कि कर्ण पिशाचिनी का अंत केवल उसकी ताकत का अंत नहीं था, बल्कि शायद यह उस पुराने गाँव के भीतर कहीं और छुपा हुआ एक और रहस्य था।

एक रात, जब वे सब बगीचे में बैठे थे, अचानक उनकी आँखों के सामने वही धुंधली आकृति फिर से उभर आई, लेकिन इस बार वह कर्ण पिशाचिनी नहीं थी। यह कोई और था – एक औरत की आकृति, जिसकी आँखें जल रही थीं, और उसका चेहरा बहुत विकृत था। वह धीमी आवाज में कुछ बड़बड़ाते हुए उनकी ओर बढ़ रही थी।

नीलू: (घबराते हुए) “यह कौन है? यह तो कर्ण पिशाचिनी नहीं लग रही।”

दीपिका: (काँपते हुए) “यह… यह वही औरत है, जिसने हमसे पहले बात की थी, वही शैतानी शक्ति!”

जैसे ही वह आकृति पास आई, उसने एक गहरी और डरावनी हंसी मारी।

आकृति: (रूहानी आवाज में) “तुम लोगों ने मेरा सामना किया, लेकिन तुम्हें क्या लगता है कि तुम जीत गए हो? कर्ण पिशाचिनी मेरी बेटी थी, और अब मुझे अपना बदला लेना है!”

नीलू और उसके दोस्तों के होश उड़ गए। वे समझ गए थे कि कर्ण पिशाचिनी केवल एक हिस्सा थी, और अब उसकी माँ – जो और भी शक्तिशाली और खतरनाक थी – उनका सामना करने आ चुकी थी।

अमन: (डरते हुए) “हमें क्या करना होगा? क्या यह सच में खत्म हो गया?”

दीपिका: (संकल्प के साथ) “हमने पहले भी हार नहीं मानी, अब भी नहीं मानेंगे। हमें इस आत्मा का सामना करना ही होगा!”


इस बार, वे तैयार थे। दीपिका और नीलू ने पुरानी डायरी से कुछ और मंत्र निकाले, जिन्हें उन्होंने पहले कभी नहीं पढ़ा था। वे जानते थे कि अगर इस आत्मा का सामना करना है, तो उन्हें अपनी पूरी ताकत और साहस का इस्तेमाल करना होगा।

उन्होंने उस आत्मा के सामने आकर मंत्रों का उच्चारण करना शुरू किया। धीरे-धीरे, वातावरण में एक अजीब सी घबराहट और ठंडक फैलने लगी। हवा में एक हलका सा कंपन महसूस हो रहा था।

नीलू: (काँपते हुए) “कर्ण पिशाचिनी की माँ, तुम जो भी हो, तुम्हें हमारी शक्ति का अहसास होगा। हम तुम्हें नष्ट करेंगे!”

जैसे ही नीलू ने मंत्र पूरा किया, वह आत्मा एक घिनौनी चीख मारी और पूरी तरह से गायब हो गई। चारों ओर एक गहरी चुप्पी छा गई।

धीरे-धीरे, गाँव में वापस से शांति लौट आई। वह औरत की आकृति अब पूरी तरह से गायब हो चुकी थी। नीलू और उसके दोस्तों को यह एहसास हुआ कि अब सब कुछ खत्म हो गया था – कर्ण पिशाचिनी और उसकी माँ, दोनों की आत्माएँ अब शांति में थीं।

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