दुरंग गाँव का भूतिया तालाब

रात का समय है। दुरंग नामक एक छोटा सा गाँव, पहाड़ियों से घिरा हुआ है। गाँव के लोग गाँव के केंद्र में एक अलाव के आसपास बैठे हुए हैं। हवाएँ चल रही हैं, और वातावरण में खौफ का माहौल है।

गाँव के बुजुर्ग (दादाजी): (गंभीर आवाज में) सुनो सुनो, मेरे बच्चों। जो मैं तुमसे कहने वाला हूँ, वह किसी को भी नहीं बताना चाहिए। यह बहुत पुरानी बात है, मगर सच है। दुर्ग गाँव में एक भूतिया तालाब है…

गाँव की महिला (आर्ति): (चौंकते हुए) क्या? भूतिया तालाब? दादाजी, ये कौन सी नई कहानी सुना रहे हैं आप?

दादाजी: (इशारे से पहाड़ियों की तरफ) वह तालाब, जो उस बड़े जंगल में छिपा हुआ है, वहाँ कभी नहीं जाना चाहिए। बहुत साल पहले वहाँ एक दुखद घटना घटी थी। किसी को उसके पास जाने की हिम्मत नहीं होनी चाहिए।

(गाँव के कुछ युवा, जिनमें शंकर, मीरा और विनय शामिल हैं, ध्यान से सुन रहे हैं।)

शंकर: (हँसते हुए) दादाजी, यह तो पुरानी कहानियाँ हैं। अब हम डरते नहीं। बताइए, क्या हुआ उस तालाब में?

दादाजी: (गहरी आवाज में) सुनो, मैं तुम्हें सच बताता हूं। बहुत पहले उस तालाब के पास एक बहुत खूबसूरत लड़की रहती थी – नाम था मीरा। वह गाँव की सबसे प्यारी लड़की थी, लेकिन उसका दिल बहुत दुखी था। गाँव के एक लड़के के प्यार में पागल होकर, वह तालाब के पानी में डूबकर मर गई। कुछ लोगों का मानना है कि वह उस दिन से उस तालाब में बसी हुई है, और अब उसका भूत किसी भी व्यक्ति को जो उस तालाब के पास आता है, नहीं छोड़ता।

मीरा: (दखल देते हुए) क्या? वह लड़की तालाब में मर गई? क्या सच में उसकी आत्मा वहाँ है?

दादाजी: (सिर हिलाते हुए) हां, और तब से, वहाँ कोई भी जानवर या इंसान उस तालाब के पास नहीं जाता। जिसने भी कोशिश की, उसकी तबाही हुई। मीरा की आत्मा वहाँ किसी को भी नहीं छोड़ती। कुछ लोग तो कहते हैं कि उसका चेहरा पानी के ऊपर दिखता है और वह मदद मांगती है, लेकिन उसकी मदद करने वाले कभी नहीं लौटे।

विनय: (हँसते हुए) क्या यह सब सच है, दादाजी? कोई आत्मा नहीं होती! सब बस कल्पना है!

दादाजी: (कड़ा स्वर में) तुम जो भी सोचो, मगर वह तालाब कभी न देखना। वहाँ जाने से मौत भी न बचा सकेगी।

उस रात, गाँव के युवा – शंकर, मीरा और विनय – यह तय करते हैं कि वे उस किले का रहस्य खोलेंगे और तालाब तक जाएंगे। वे चुपके से अपने घरों से बाहर निकलते हैं और जंगल की तरफ बढ़ते हैं। चारों ओर घना जंगल और अजीब सन्नाटा है। चाँद की हल्की रौशनी जंगल से छनकर आती है।

विनय: (मज़ाक करते हुए) यार, दादाजी तो डराते रहते हैं। लगता है हमें अब वहाँ जाना चाहिए। देखो, फिर सबको बताओंगे कि वह सिर्फ एक कहानी थी।

शंकर: (हँसते हुए) हां, बिल्कुल। सब फालतू बातें हैं। चलो, जल्दी चलते हैं और वापिस लौटते हैं।

मीरा: (संकोच करते हुए) मुझे बहुत डर लग रहा है… लेकिन, तुम दोनों को छोड़ कर मैं नहीं लौट सकती।

(वे जंगल के भीतर गहरे जाते हैं और अंततः तालाब के पास पहुंचते हैं। वहाँ की हवा ठंडी और सिहरन भरी होती है। पानी बिलकुल शांत और काला है। चारों की साँसें तेज़ हो जाती हैं।)

विनय: (हँसते हुए) देखो, देखो! यहाँ कुछ नहीं है। बस पानी है। कुछ नहीं है, बस हमें डराया जा रहा है।

शंकर: (आसपास देखता हुआ) पर, यार, यहाँ बहुत अजीब सी शांति है। देखो, तालाब का पानी भी कितना गहरा और काला है।

मीरा: (धीरे से) मुझे ऐसा लग रहा है कि कोई देख रहा है हमें। क्या तुम लोगों को भी महसूस हो रहा है?

(अचानक, एक धुंधली आकृति तालाब के पानी से निकलती है। यह एक औरत की आकृति है, जो सफेद साड़ी में लिपटी हुई है। उसके चेहरे पर लंबे बाल लटके हैं। वह धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ती है।)

विनय: (काँपते हुए) यह… यह क्या था?

शंकर: (डरे हुए) क्या… क्या कोई है वहाँ?

(आकृति उनकी तरफ और करीब आ रही है, अब वे उसे पूरी तरह से देख सकते हैं। यह वही भूतिया औरत है। वह बिना पलक झपकाए सीधे उनकी ओर बढ़ती है।)

मीरा: (चिल्लाते हुए) क्या यह मीरा का भूत है?

विनय: (पलटते हुए) हमे भागना चाहिए! यह सब झूठ नहीं है! भागो!

शंकर: (विनय को पकड़ते हुए) रुको! हम बिना कारण भाग नहीं सकते! यह कुछ और है!

(वह आकृति पास आती है और उसकी लंबी घुंघराली बालों से उसका चेहरा नज़र आता है। उसकी आँखें खाली और भूतिया दिखती हैं। उसकी आँखों में एक शून्य भाव है, और वह अपनी अंगुली से उन्हें अपने पास बुलाती है।)

मीरा: (काँपते हुए) हमें भाग जाना चाहिए, यह हमें मार डालेंगे!

विनय: (पैनिक में) हम किसी से मदद मांगें! जल्द से जल्द यहाँ से निकलते हैं!

जैसे ही वे भागने की कोशिश करते हैं, ज़मीन हिलने लगती है। तालाब के पास एक डरावनी चीख सुनाई देती है, और एक आवाज़ कानों में गूंजती है, “तुम भाग नहीं सकते।”

शंकर: (चिल्लाते हुए) यह सब गलत हो रहा है! हम कैसे बच सकते हैं?

मीरा: (आँसु बहाते हुए) हम मरने वाले हैं! हम कहाँ जाएंगे?

(भूतिया औरत अचानक गायब हो जाती है, और वातावरण में सन्नाटा छा जाता है। हवा भी ठंडी हो जाती है।)

विनय: (हैरान होते हुए) हम… हम बच गए? क्या यह सपना था?

शंकर: (हांफते हुए) नहीं, यह सच है! मीरा की आत्मा यहाँ है! हम… हम नहीं जा सकते! हमें वापिस गाँव लौटना होगा!

वे तीनों गाँव की तरफ दौड़ते हुए पहुँचते हैं, और उनकी हालत बेहद खराब होती है। वे डर से काँप रहे होते हैं। जैसे ही वे गाँव में पहुँचते हैं, पूरा गाँव उनका इंतजार कर रहा होता है।

आर्ति (गाँव की महिला): (उनके चेहरों को देखती हुई) क्या हुआ? तुम लोग कहाँ थे? तुम लोग… कुछ बदल गए हो! तुम्हारे चेहरों पर डर सा क्यों है?

शंकर: (घबराते हुए) हम… हम उस तालाब के पास गए थे… और वहाँ मीरा का भूत था। वह… वह हमें मारने आ रही थी!

विनय: (काँपते हुए) हां! हम उससे बचकर आये हैं, लेकिन मुझे लगता है कि उसने हमें छोड़ दिया है! हमसे बुरी तरह बदला लेगी!

दादाजी: (शांत स्वर में) मैंने कहा था न! जो इस तालाब के पास गए, वह कभी सुरक्षित नहीं लौटे। अब तुम्हें सच का एहसास हुआ है!

गाँव में वापस लौटने के बाद शंकर, मीरा और विनय अब भी बहुत डरे हुए थे। उनके चेहरों पर डर साफ दिखाई दे रहा था, और उन्हें महसूस हो रहा था कि मीरा की आत्मा अभी भी उनके पास है। वे घर पहुंचे, लेकिन हर कदम पर एक अजीब सी घबराहट उनके दिलों में घर कर चुकी थी।

शंकर: (डरा हुआ) मुझे ऐसा लगता है कि हम लौट आए हैं, लेकिन वह भूत हमें छोड़ने वाला नहीं है। हर जगह वही पानी, वही चेहरा नजर आता है। मुझे लगता है कि मीरा की आत्मा अभी भी हमारे साथ है।

विनय: (हांफते हुए) शंकर, तुम सही कह रहे हो। वह तालाब… वह तालाब अब भी हमारे दिमाग में है। उसकी आँखें, उसका चेहरा, हम जैसे भाग रहे थे, वैसे वह हमें कभी नहीं छोड़ेगी।

मीरा: (काँपते हुए) क्या… क्या वह हमें मारने के लिए पीछा कर रही है? क्या हम इससे बच पाएंगे?

(वह तीनों बैठकर बात कर रहे थे, तभी गाँव में अचानक कुछ अजीब घटनाएँ होने लगीं। गाँव के कुछ लोग अचानक बीमार पड़ने लगे, कुछ घरों की दीवारें झरने लगीं, और गाँव के पास के खेतों में जो कुछ दिन पहले खुशहाल फसलें थीं, अब सूखने लगीं। यह सब देखकर गाँव वाले डर गए।)

गाँव के बुजुर्ग (दादाजी): (गंभीरता से) यह सब वही है, वही भूतिया तालाब। मीरा की आत्मा अब गाँव में ही घूम रही है। किसी ने उसके भूत को नजरअंदाज किया, और अब उसकी आत्मा का प्रकोप बढ़ चुका है।

आर्ति (गाँव की महिला): (घबराते हुए) क्या हम कुछ कर सकते हैं? क्या हम उसे शांत कर सकते हैं?

दादाजी: (गहरी साँस लेते हुए) उसकी आत्मा को शांति नहीं मिल सकती, जब तक हम उसे उसकी खोई हुई चीज़ नहीं लौटाते। वह चाहती है कि उसकी मौत का बदला लिया जाए। हमें यह पता करना होगा कि क्या उसने किसी को मारा था, और हम उसे वही कुछ वापस देंगे, जिससे उसकी आत्मा शांत हो सके।

(गाँव के लोग और दादाजी यह तय करते हैं कि वे मीरा के भूत को शांत करने के लिए तालाब तक एक बार फिर जाएंगे। शंकर, मीरा, और विनय भी दादाजी के साथ तालाब की ओर जाते हैं, यह जानने के लिए कि मीरा की आत्मा को कैसे शांति मिल सकती है।)

तालाब के पास पहुँचते ही, वातावरण फिर से बदल जाता है। हवा में गहरी नीरवता छा जाती है। पानी की सतह पर हलचल नहीं होती। सब कुछ बिलकुल शांत, जैसे कोई चेतावनी हो।

दादाजी: (धीरे से) हम यहाँ मीरा की आत्मा को शांति देने आए हैं। हम उसे उसकी मौत के बारे में बताने आए हैं, ताकि वह हमें छोड़ दे।

(तभी अचानक तालाब के पानी में हलचल होती है, और वही भूतिया महिला सफेद साड़ी में नजर आती है। उसकी आँखें चमक रही होती हैं, और उसकी हंसी सुनाई देती है।)

मीरा: (सुनामी जैसी आवाज में) तुम लोग अब क्यों आए हो? तुम मुझे क्यों परेशान कर रहे हो? मैंने अपनी मौत का बदला लिया है, अब तुम लोग मेरी शांति नहीं छीन सकते!

विनय: (डरा हुआ) नहीं! हम तुम्हारे साथ बुरा नहीं करेंगे, हम सिर्फ तुम्हारी मदद चाहते हैं!

दादाजी: (धीरे से) मीरा, हम जानते हैं कि तुमने बहुत दर्द झेला। हम तुम्हारी मदद करना चाहते हैं। हमें बताओ, क्या तुमने किसी का जीवन लिया है?

मीरा: (रुआँसी आवाज में) हां, मैंने उसे मारा… वह लड़का… वह मेरा प्यार था। मुझे धोखा मिला था, और मैं उसे मारकर तालाब में डूब गई। अब मैं सुकून नहीं पा सकती।

(मीरा की आत्मा और भी भूतिया रूप में बदलने लगती है। उसके चेहरे पर दर्द और ग़म की छाया होती है।)

दादाजी: (मुस्कुराते हुए) मीरा, तुम्हें अपनी गलती का एहसास होना चाहिए। तुम जिस लड़के को धोखा मान रही हो, वह भी अब तुम्हारे साथ नहीं है। तुम्हारे किए हुए कामों से वह नहीं लौट सकता। लेकिन तुम्हारी आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब तुम अपने किए पर पछताओगी।

(अचानक, मीरा की आवाज़ चुप हो जाती है और वह पानी में फिर से लुप्त हो जाती है। कुछ देर तक सन्नाटा छा जाता है।)

गाँव में लौटते समय, सभी को यह एहसास होता है कि मीरा की आत्मा अब शांत हो चुकी है। गाँव में वह भूतिया घटनाएँ अब धीरे-धीरे कम होने लगीं। लोग फिर से अपने घरों में सुरक्षित महसूस करने लगे। तालाब के पास अब कोई भी नहीं जाता, लेकिन अब वहाँ का माहौल पहले जैसा शांत और हल्का हो गया था।

गाँव में सब कुछ फिर से सामान्य हो गया था। मीरा की आत्मा की शांति के बाद गाँव के लोग बिना किसी डर के अपने कामों में व्यस्त थे। तालाब के पास अब कोई नहीं जाता, और वहाँ की चुप्पी से लग रहा था कि सच में मीरा की आत्मा को शांति मिल चुकी है। लेकिन, जैसे-जैसे समय बीतता गया, गाँव में कुछ अजीब घटनाएँ घटने लगीं, जो सबको परेशान करने लगीं।

शंकर: (गाँव के बाहर खेत में काम करते हुए) मुझे ऐसा लगता है कि सब कुछ ठीक नहीं है। कुछ महीनों से अचानक गाँव में फिर से घटनाएँ होने लगी हैं। लोग बीमार हो रहे हैं, घरों के आसपास कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दे रही हैं।

मीरा: (घबराई हुई) क्या हम फिर से मीरा के भूत के बारे में बात कर रहे हैं? क्या उसकी आत्मा फिर से जाग गई है?

विनय: (सिर झुकाते हुए) नहीं, मुझे लगता है कि मीरा की आत्मा शांत हो गई थी, लेकिन अब गाँव में फिर से कुछ गलत हो रहा है। हमें इसका पता लगाना होगा।

(गाँव के लोग फिर से डरने लगे। लोग रात को घरों से बाहर नहीं निकलते थे। कुछ कहानियाँ सुनने को मिलीं कि रात को लोग तालाब के पास कुछ हलचल सुनते हैं, जैसे किसी का चीखना या रोना।)

एक रात, शंकर, मीरा और विनय फिर से उस भूतिया तालाब के पास जाने का निर्णय लेते हैं। वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्या सच में मीरा की आत्मा फिर से जाग गई है, या फिर कोई और रहस्यमय ताकत गाँव में गड़बड़ी कर रही है।

(वे तीनों रात के अंधेरे में तालाब की ओर बढ़ते हैं। हवा में घना कोहरा है, और सब कुछ बहुत अजीब सा महसूस हो रहा है।)

शंकर: (काँपते हुए) तुम लोग तैयार हो? हमें जो भी सामना करना होगा, वह हम सबको मिलकर करना होगा।

मीरा: (हिचकिचाते हुए) मुझे डर लग रहा है। क्या हम फिर से वही देखेंगे, जो पहले देखा था?

विनय: (सख्त आवाज में) हमें यह पता लगाना होगा। अगर हम नहीं गए, तो यह डर हमें कभी नहीं छोड़ेगा।

(जैसे ही वे तालाब के पास पहुँचते हैं, उन्हें एक बार फिर वही खामोशी और अंधेरा महसूस होता है। पानी में हलचल होती है, और अचानक तालाब के किनारे एक धुंधली आकृति प्रकट होती है। यह वही औरत है, लेकिन इस बार उसका चेहरा और भी डरावना और विकृत लगता है।)

मीरा: (घबराई हुई) यह वही मीरा का भूत है, लेकिन… अब यह पहले जैसा नहीं है। इसका चेहरा बहुत बदल चुका है! क्या यह सच में उसकी आत्मा है?

विनय: (डरे हुए) नहीं! यह कुछ और है! यह मीरा की आत्मा नहीं हो सकती!

(आकृति धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ती है, और इस बार उसकी आँखें लाल हो चुकी होती हैं, और वह एक खौ़फनाक आवाज़ में बोलती है।)

आकृति: (गहरी आवाज में) तुम लोग क्या समझते हो? मैं पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हो गई हूँ। तुम मुझे शांत नहीं कर सकते। अब मैं किसी को नहीं छोड़ने वाली! तुम सब भी मेरी गिरफ्त में आओगे!

शंकर: (चिल्लाते हुए) नहीं! हम तुम्हारे सामने डरने वाले नहीं हैं! हमें तुम्हारी आत्मा को शांत करना होगा!

मीरा: (गुस्से में) तुम अब और क्यों आ रहे हो? तुम हमें खत्म क्यों करना चाहती हो? हमने तुम्हारे साथ कोई बुरा नहीं किया!

(आकृति अचानक गायब हो जाती है, और तालाब का पानी फिर से शांत हो जाता है। लेकिन अब गाँव के लोगों को समझ में आ गया कि मीरा की आत्मा को केवल शांति की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि वह कुछ और चाहती थी।)

गाँव में एक बार फिर से सब कुछ शांत हो जाता है। लेकिन इस बार गाँव के लोग डरते हुए रहते हैं, क्योंकि मीरा की आत्मा को अब कुछ और चाहिए था। वह अब गाँव के लोगों से कुछ लेने आई थी, और शायद वह तब तक नहीं रुकेगी, जब तक वह सब कुछ न ले ले।

गाँव के दादाजी: (गंभीर आवाज में) अब हमें मीरा की आत्मा को शांति देने के लिए एक और उपाय खोजना होगा। उसकी आत्मा अब और शक्तिशाली हो चुकी है। हमें उसकी भूतिया आत्मा को शांत करने के लिए उसके द्वारा किए गए अपराधों को मान्य करना होगा।

शंकर: (चिंतित) लेकिन दादाजी, अब हम क्या करेंगे? हम जो भी कोशिश करते हैं, वह और भी ज्यादा ताकतवर होती जा रही है।

दादाजी: (स्मित होकर) हमें मीरा की आत्मा के साथ कुछ समझौता करना होगा। हमें उसे माफ करना होगा और उसका पाप स्वीकार करना होगा, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिले।

(गाँव के लोग एकजुट हो जाते हैं, और दादाजी की सलाह मानते हुए वे मीरा की आत्मा को शांति देने के लिए एक विधि की शुरुआत करते हैं। यह प्रक्रिया बहुत कठिन होती है, लेकिन वे सभी एकजुट होकर मीरा की आत्मा को शांति देने के लिए कोशिश करते हैं।)

गाँव में एक अजीब सी चुप्पी थी, जो सबको घेरने लगी थी। मीरा की आत्मा के प्रकोप के बाद, गाँव में लोग अब डर से कांपते थे। तालाब के पास की घटनाएँ अब भी हो रही थीं, और लोग रात को बाहर निकलने से डरने लगे थे। कोई भी अब अपनी दिनचर्या के अनुसार बाहर काम करने के लिए तैयार नहीं था। पूरे गाँव में एक तरह की अव्यक्त घबराहट और तनाव का माहौल था।

गाँव के बुजुर्ग (दादाजी): (गंभीर स्वर में) तुम सब जानते हो कि मीरा की आत्मा को शांति नहीं मिल सकती जब तक वह अपने किए गए पापों को न मान ले। हम अब तक उस आत्मा के साथ समझौता करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसे शांति नहीं मिली। अब हमें उसका सामना करने का सही तरीका ढूंढना होगा।

मीरा: (घबराई हुई) दादाजी, क्या हम कुछ और नहीं कर सकते? क्या हम फिर से वही सब नहीं कर सकते जो हमने पहले किया था?

विनय: (दुखी होकर) हमें अब और इंतजार नहीं करना चाहिए। हम सबने मिलकर उसे शांत करने की कोशिश की थी, लेकिन उसका भूत और भी शक्तिशाली होता जा रहा है।

दादाजी: (सोचते हुए) हम जितना उसकी आत्मा से डरेंगे, वह उतना ही और शक्तिशाली होगी। हमें उसकी आत्मा को उसकी धरती पर वापस भेजने का कोई तरीका ढूंढना होगा। हम जितना उसकी मदद करेंगे, उतना ही वह हमें परेशान करती जाएगी।

गाँव के लोग अब फिर से एकजुट होते हैं और तालाब के पास जाने का फैसला करते हैं। इस बार उनका उद्देश्य मीरा की आत्मा को अंततः शांति देना है, ताकि गाँव में फिर से सुख और शांति लौट सके। वे यह जानते हैं कि यह यात्रा बहुत कठिन होगी, लेकिन वे फिर भी साहस जुटाकर तालाब की ओर चल पड़ते हैं।

शंकर: (निडर होकर) हमें यह करना होगा। अगर हमें फिर से उसी आत्मा का सामना करना पड़ा, तो हम अब डरने वाले नहीं हैं। हम सब एक साथ हैं!

मीरा: (परेशान होकर) मुझे डर लग रहा है, शंकर। हम फिर से वही देखेंगे क्या?

विनय: (सिर्फ ताकत से) अब हम उसका सामना करेंगे। वह चाहे जैसा भी हो, अब हम उसे अपनी शांति देंगे!

(गाँव वाले धीरे-धीरे तालाब के पास पहुँचते हैं, और जैसे ही वे वहाँ पहुँचते हैं, एक घना कोहरा तालाब के पास भर जाता है। पानी में हलचल होती है और अचानक वही भूतिया आकृति उभर आती है, लेकिन इस बार उसकी आँखें कमज़ोर और थकी हुई दिखाई देती हैं।)

मीरा: (खौ़फनाक स्वर में) तुम फिर से यहाँ आए हो? क्या तुम मुझे शांति देने आए हो? या तुम मुझे और पीड़ित करने का इरादा रखते हो?

शंकर: (सख्त आवाज में) मीरा, हम जानते हैं कि तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ है। तुम्हारी आत्मा को शांत होने के लिए अब हमें तुम्हारे कृत्य की सच्चाई का सामना करना होगा। हमें तुम्हारी मदद करने की जरूरत नहीं है, लेकिन तुम्हें हमारी मदद की जरूरत है।

विनय: (मुस्कुराते हुए) हम तुम्हारी मदद करने के लिए तैयार हैं, मीरा। तुम्हें अपनी आत्मा को शांति देने की जरूरत है, ताकि तुम फिर से एक भूतिया प्रेत न बन सको।

(मीरा की आत्मा का चेहरा और भी भूतिया हो जाता है। उसके चेहरे पर गुस्से और ग़म की झलक होती है। वह अपनी आँखें झपकती है और एक गहरी सांस लेती है।)

मीरा: (रोते हुए) मैं बहुत दुखी हूँ। मैंने जो किया, वह मेरी गलती नहीं थी। वह सब धोखा था, जो मुझे मिला। मुझे माफ कर दो, लेकिन अब मुझे अपनी आत्मा को शांति चाहिए। मुझे वापस मेरी शांति चाहिए।

दादाजी: (आगे बढ़ते हुए) मीरा, अपनी आत्मा को माफ करो। अपनी आत्मा को शांत करने के लिए हमें एक और अंतिम कदम उठाना होगा। हमें तुम्हारे दिल में जो ग़म है, वह निकालना होगा। तुम्हारी आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलेगी जब तक तुम इस संसार से विदाई नहीं दोगी। हमें तुमसे हर बात का हिसाब लेना होगा, ताकि तुम्हारी आत्मा को वापस शांति मिल सके।

(गाँव के लोग मिलकर मीरा की आत्मा से माफी मांगते हैं, और वह आहिस्ता आहिस्ता शांत हो जाती है। धीरे-धीरे, वह आकृति पानी में विलीन हो जाती है। जैसे ही वह गायब होती है, तालाब का पानी फिर से साफ और शांत हो जाता है। गाँव में हवा हल्की हो जाती है, और सब कुछ फिर से सामान्य हो जाता है।)

गाँव में सबकुछ अब शांति से भर गया है। मीरा की आत्मा को शांति मिल चुकी थी, और अब गाँव में कोई डर नहीं था। लोग रात को बाहर बिना डर के काम करने लगे थे। तालाब के पास फिर से कोई हलचल नहीं थी, और वातावरण में फिर से सुखद शांति थी।

गाँव के दादाजी: (मुस्कुराते हुए) अब हम सबका काम खत्म हुआ। मीरा की आत्मा को शांति मिल गई है, और अब वह हमें तंग नहीं करेगी। हमारे गाँव में फिर से शांति और खुशियाँ आएँगी।

विनय: (संतुष्ट होकर) हम सबने मिलकर यह किया। अब हम बिना डर के जी सकते हैं। मीरा की आत्मा को उसकी शांति मिल गई।

शंकर: (संतुष्ट होकर) अब हम किसी भी रहस्यमय ताकत से डरने वाले नहीं हैं। हमें कभी भी कोई भूत-प्रेत नहीं परेशान कर सकता।

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