मृत्यु का गाँव

एक अंधेरे और ठंडे मौसम में एक घना जंगल। जंगल के बीचोंबीच एक गाँव बसा हुआ है, जहाँ के लोग अक्सर खौ़फनाक घटनाओं के बारे में बात करते हैं। यह गाँव अपनी अदृश्य और रहस्यमयी गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है।

अर्जुन – एक साहसी लड़का, जो भूत-प्रेत और अजीब घटनाओं पर विश्वास नहीं करता।
साक्षी – आयुष की बहन, जो हर बात में विश्वास करती है और अंधविश्वास से डरती है।
पुराना बाबा – गाँव के बुजुर्ग, जो इन खौ़फनाक घटनाओं के बारे में जानते हैं, लेकिन कुछ भी कहने से डरते हैं।
गाँववाले – जिनमें से कुछ लोग अपनी ज़िंदगी में अजीब बदलाव महसूस कर चुके हैं।

अर्जुन (साक्षी से मजाक करते हुए):
“साक्षी, तुम भी न! इस गाँव की अफवाहों पर विश्वास कर लेती हो। यह सब बस बेवकूफी है। भूत-प्रेत, काले जादू, क्या मतलब है इन सबका?”

साक्षी (डरी हुई):
“तुम नहीं समझोगे अर्जुन! यह गाँव अलग है। यहाँ के लोग कहते हैं कि रात के समय अजीब सी चीखें आती हैं और जो भी गाँव में आता है, वो लौटकर नहीं जाता।”

अर्जुन (हंसी उड़ाते हुए):
“चलिए, अगर तुम इतनी घबराई हुई हो तो हम चलते हैं और वहाँ देख लेते हैं कि क्या है।”

अर्जुन और साक्षी गाँव के बाहर एक छोटे से घर में रहते हैं। एक रात, अर्जुन को अचानक कुछ अजीब आवाजें सुनाई देती हैं। वह बाहर देखता है और देखता है कि गाँव में हर घर के दरवाजे बंद हैं, लेकिन एक घर से हल्की रोशनी आ रही है। वह घर पुराना और वीरान है।

अर्जुन (चिढ़ाते हुए):
“साक्षी, देखो! क्या तुमने वह घर देखा? लगता है जैसे कोई अंदर बैठा हो।”

साक्षी (घबराते हुए):
“यह वही घर है, जो हर किसी से बंद रहता है। लोग कहते हैं कि वहाँ किसी ने आत्महत्या की थी।”

अर्जुन (मुस्कुराते हुए):
“चलिए, अगर तुम इतनी घबराई हुई हो तो हम चलते हैं और वहाँ देख लेते हैं।”

अर्जुन और साक्षी घर के पास पहुँचते हैं। अचानक दरवाजे की लकड़ी चटकने की आवाज़ आती है। वे अंदर घुसते हैं और देखते हैं कि एक पुरानी तस्वीर दीवार पर लटकी हुई है, जिसमें एक व्यक्ति की तस्वीर है। तस्वीर की आँखें खाली हैं और लगता है जैसे वह उन्हें घूर रही हो।

साक्षी (काँपते हुए):
“अर्जुन, यह तस्वीर बहुत अजीब है। मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा।”

अर्जुन (हंसी में):
“तुम्हारे मन में इतना डर है कि तुम देख भी नहीं पा रही। यह बस एक पुरानी तस्वीर है।”

जैसे ही अर्जुन तस्वीर को छूता है, अचानक घर के चारों ओर एक तेज़ हवाओं का झोंका आता है, और दीवारों पर खून के धब्बे दिखने लगते हैं।

साक्षी (चिल्लाते हुए):
“अर्जुन! देखो, देखो! क्या हो रहा है?”

अर्जुन और साक्षी डर से काँपने लगते हैं, लेकिन अचानक घर के कोने से एक कटा-फटा चेहरा दिखाई देता है। यह चेहरा किसी इंसान का नहीं, बल्कि किसी बुरी आत्मा का था।

अर्जुन और साक्षी डर के मारे घर से बाहर भागते हैं। वे तुरंत गाँव के बुजुर्ग बाबा से मिलते हैं, जो इस गाँव की पुरानी घटनाओं के बारे में जानते हैं।

अर्जुन (सहमा हुआ):
“बाबा, हम कुछ अजीब देख रहे हैं। गाँव में कुछ बहुत गलत हो रहा है। वह घर, वह तस्वीर, और वह चेहरा… सब कुछ असामान्य है।”

बाबा (सुरक्षित स्थान पर बैठते हुए):
“तुम दोनों ने बहुत बड़ी गलती की है। वह घर और वह तस्वीर… वह सब एक पुराने काले जादू से जुड़ा हुआ है। यह गाँव उन ताकतों से जूझ रहा है, जिन्हें अब कोई नियंत्रित नहीं कर सकता।”

साक्षी (घबराते हुए):
“काले जादू से क्या मतलब है बाबा? आप हमें क्या बताना चाहते हैं?”

बाबा (धीरे से):
“वह घर उस आदमी का था जिसने इस गाँव के साथ एक बुरा समझौता किया था। उसे विश्वास था कि काले जादू से वह कभी मर नहीं सकेगा, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह जादू उसके लिए मौत बनकर आएगा। उस व्यक्ति की आत्मा अब उस घर में बसी हुई है और किसी भी नए आगंतुक को पकड़ लेती है।”

गाँव में अंधेरे का साया बढ़ने लगता है। रात के समय चीखें सुनाई देती हैं, और गाँववाले अपने घरों में बंद हो जाते हैं। अचानक, गाँव के बीचों-बीच एक अजीब सी हलचल होती है।

साक्षी (डरी हुई):
“यह क्या हो रहा है अर्जुन? सभी लोग अंदर क्यों छुप गए हैं?”

अर्जुन (सजग होकर):
“मुझे लगता है कि बाबा ने जो कहा, वह सही हो सकता है। कुछ तो है जो हमारे साथ हो रहा है।”

साक्षी (आँखों में डर के साथ):
“अर्जुन, हमें यहाँ से जाना चाहिए। हमें यह जगह छोड़ देनी चाहिए।”

लेकिन इससे पहले कि वे कहीं जा सकें, एक कटा-फटा चेहरा अचानक उनकी आँखों के सामने आ जाता है। यह वही चेहरा था, जो उस घर से दिखाई दिया था।

वह चेहरा अचानक से गायब हो जाता है, लेकिन अर्जुन और साक्षी को महसूस होता है कि अब वे किसी बुरी ताकत के संपर्क में आ गए हैं। वे बाबा के पास जाते हैं, लेकिन वह भी उन्हें कोई मदद नहीं दे पाते।

बाबा (गहरी सांस लेते हुए):
“अब तुम दोनों को इसे खत्म करने के लिए उसी काले जादू का सामना करना होगा। अगर तुमने वह नहीं किया, तो यह गाँव पूरी तरह से उस आत्मा के कब्जे में आ जाएगा।”

अर्जुन (काँपते हुए):
“क्या हमें अब उसी जादू का सामना करना होगा? क्या हम इससे बच पाएंगे?”

बाबा (गंभीर स्वर में):
“यह समय बहुत खतरनाक है, अर्जुन। तुम्हें एक भूतिया रिवाज का पालन करना होगा। तुम्हें उस आत्मा को उसके घर में फिर से बंद करना होगा, या फिर यह पूरी तरह से पूरे गाँव पर कब्जा कर लेगा।”

अर्जुन और साक्षी ने बाबा के बताए गए रास्ते पर चलते हैं। उन्होंने उस घर को फिर से खोलने का फैसला किया और उसे फिर से उस आत्मा के जादू से नष्ट करने के लिए जादूई मंत्रों का उच्चारण करना शुरू किया।

जैसे ही वे मंत्र पढ़ते हैं, घर की दीवारें और फर्श हिलने लगती हैं। अचानक, वह कटा-फटा चेहरा फिर से सामने आ जाता है। यह आत्मा अब पूरी तरह से अपने असली रूप में थी। उसकी आँखें पूरी तरह से काली हो चुकी थीं, और उसके हाथों से काले धागे निकल रहे थे।

आत्मा (क्रोधित होकर):
“तुम लोग मेरे रास्ते में क्यों आए हो? अब तुम नहीं बच पाओगे!”

अर्जुन और साक्षी ने डर को काबू किया और बाबा द्वारा सिखाए गए मंत्रों को सही ढंग से पढ़ना शुरू किया। जैसे ही मंत्र का उच्चारण पूरे होते हैं, वह आत्मा चिल्लाती हुई गायब हो जाती, और आसपास की सारी बुरी शक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं।

जब आत्मा नष्ट हो गई, तो पूरे गाँव में शांति का माहौल छा गया। अर्जुन और साक्षी ने महसूस किया कि अब उन पर कोई भूत-प्रेत का साया नहीं था। उन्होंने बाबा की शक्तियों को नष्ट करके गाँव को बचा लिया था। अब गाँव फिर से सामान्य हो गया था।

अर्जुन (संतुष्ट होकर):
“हमने यह किया, साक्षी। अब यह गाँव फिर से सुरक्षित है।”

साक्षी (सुकून से):
“हाँ, अर्जुन। अब हम इस गाँव में आराम से रह सकते हैं। लेकिन यह अनुभव हम कभी नहीं भूलेंगे। हमें हमेशा इस बारे में याद रखना होगा कि कोई भी अंधेरे शक्ति इतनी आसानी से खत्म नहीं होती।”

गाँव में शांति अब पूरी तरह लौट चुकी थी, लेकिन अर्जुन और साक्षी को अब भी एक गहरी बेचैनी महसूस हो रही थी। उन्होंने जो कुछ भी देखा था, वह उनकी आत्माओं में एक गहरी छाप छोड़ चुका था। लेकिन अब उनका विश्वास था कि जो भी हुआ, वह अंत हो चुका था। उन्होंने सोचा था कि बाबा की आत्मा और उसके काले जादू का खेल समाप्त हो चुका है।

अर्जुन (साक्षी से):
“साक्षी, क्या तुम महसूस कर रही हो? अब भी कुछ तो गलत है। गाँव में शांति तो है, लेकिन कुछ अंदर से डर सा महसूस हो रहा है। क्या तुमने भी इसे महसूस किया?”

साक्षी (चिंतित होकर):
“हां, मुझे भी ऐसा लगता है। मुझे लगता है कि यह सिर्फ शुरुआत थी। बाबा की शक्तियाँ अभी भी कहीं न कहीं हमारे आस-पास हैं।”

अर्जुन (सहज होकर):
“हमने वही किया, जो हमें करना चाहिए था। अब हमें वापस अपने जीवन में शांति से जीने का प्रयास करना चाहिए।”

लेकिन जैसे-जैसे वे इस बात को मानने लगते हैं, एक और घटना घटित होती है। एक रात, अचानक गाँव में फिर से हलचल होने लगती है। लोगों के घरों से चीखने की आवाजें सुनाई देती हैं, और आसपास की हवा फिर से अजीब सी महसूस होने लगती है।

अर्जुन और साक्षी गाँव के चौक में एकत्र होते हैं। वे देख सकते हैं कि लोग डर के मारे घरों में बंद हो गए हैं और कुछ लोग मुँह से बड़बड़ाते हुए रास्तों पर घूम रहे हैं। अचानक, गाँव के बीचो-बीच से एक गहरी आवाज सुनाई देती है, जैसे कोई बुरी शक्ति प्रकट हो रही हो।

अर्जुन (साक्षी से):
“यह क्या है? यह आवाज़ तो वही है, जो हमने पहले सुनी थी।”

साक्षी (काँपते हुए):
“अर्जुन, मुझे अब विश्वास हो गया है कि हम पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। कुछ तो है जो खत्म नहीं हुआ है।”

अर्जुन और साक्षी भागते हुए बाबा के पुराने घर की ओर जाते हैं, लेकिन वहां पहुँचते ही उन्हें महसूस होता है कि कुछ और हो रहा है। घर का दरवाजा अपने आप खुलता है, और अंदर से एक तेज़, काली ऊर्जा बाहर फैलने लगती है।

जैसे ही अर्जुन और साक्षी घर के अंदर प्रवेश करते हैं, उन्हें वहां एक नई शक्ति का आभास होता है। वहाँ कोई व्यक्ति नहीं था, लेकिन चारों ओर अंधेरे साए लहराते हुए घूमा करते थे। घर के बीचो-बीच एक और तस्वीर लटकी थी। वह तस्वीर किसी पुरुष की थी, जो एक अजीब-सी मुस्कान के साथ उन्हें घूर रहा था। उसकी आँखों में एक बुरी चमक थी।

अर्जुन (साक्षी से):
“यह तस्वीर… यह क्या है? हम इसे खत्म करने के बाद, फिर से यह क्यों आ गया?”

साक्षी (डरी हुई):
“यह वही तस्वीर है, अर्जुन! यह वही आदमी है, जो उस घर का मालिक था। लेकिन अब यह तस्वीर क्यों लटकी हुई है?”

तभी, एक अजीब सी चीख गूंजती है, और अचानक तस्वीर की आँखें और भी चमकने लगती हैं। उसी क्षण में, अर्जुन और साक्षी महसूस करते हैं कि वे फिर से किसी बड़े संकट में फंसने वाले हैं।

तस्वीर के आसपास का वातावरण भारी हो जाता है, और हवा में काले धागे लहराने लगते हैं। एक डरावनी ध्वनि गूंजने लगती है। अर्जुन और साक्षी को समझ में आता है कि अब बाबा की आत्मा केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में प्रकट हो चुकी है।

अर्जुन (साक्षी से):
“यह कुछ और है, साक्षी। यह सिर्फ बाबा की आत्मा नहीं है, बल्कि यह एक और शक्तिशाली जादू का रूप है। हमें इसे तुरंत रोकना होगा।”

साक्षी ने बाबा के पुराने मंत्रों के बारे में सोचा, जो उन्होंने पहले सुने थे। लेकिन वह मंत्र न केवल कठिन थे, बल्कि उनके पूरे असर का सामना करना अब और भी ज्यादा खतरनाक हो चुका था।

अर्जुन और साक्षी, दोनों जानते थे कि इस बार मुकाबला पहले से कहीं अधिक कठिन होगा। इस बार उन्हें बाबा की शक्तियों का सामना करना था, जो अब एक भयंकर रूप में थी। उन्होंने गाँव के बाकी लोगों को भी एकत्र किया और बाबा की काली शक्ति को समाप्त करने के लिए एक आखिरी प्रयास करने का निश्चय किया।

अर्जुन (गाँववालों से):
“हमने अब तक जितनी भी कोशिशें की थीं, वे सफल नहीं हो पाई थीं, क्योंकि हम सही समय पर सही कदम नहीं उठा पाए। लेकिन अब, इस बार हमें हर हाल में बाबा की शक्ति को समाप्त करना होगा।”

साक्षी (दृढ़ता से):
“हम डर से नहीं जीत सकते, अर्जुन। हमें अपनी पूरी शक्ति के साथ लड़ना होगा, नहीं तो यह अंधकार कभी खत्म नहीं होगा।”

साक्षी और अर्जुन ने वह पुराना मंत्र फिर से पढ़ना शुरू किया, जो बाबा की शक्तियों को नष्ट कर सके। लेकिन जैसे ही उन्होंने मंत्र पढ़ा, बाबा की आत्मा ने अपनी पूरी शक्ति का उपयोग किया और चारों ओर एक अंधेरी और खौ़फनाक शक्ति का प्रसार हुआ।

अब बाबा की आत्मा पूरी तरह से प्रकट हो चुकी थी, और उसकी शक्ति गाँव को घेरने लगी थी। साक्षी और अर्जुन को महसूस हुआ कि यह कोई साधारण मंत्र नहीं था। बाबा ने अपनी पूरी शक्ति को एक काले धागे में बाँधकर, उसे गाँव के लोगों पर छोड़ दिया था। वे अब सभी के शरीर को नियंत्रण में ले सकते थे।

अर्जुन (शक्तिहीन होकर):
“यह अब और भी खतरनाक हो चुका है। हमें और ताकत की जरूरत है, वरना हम बच नहीं पाएंगे।”

साक्षी ने जल्दी से बाबा के पुराने घर में रखी एक किताब में देखा, जिसमें बाबा के काले जादू के खत्म करने का आखिरी तरीका था। उस किताब में लिखा था कि बाबा की आत्मा को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए, उसे अपनी खुद की धरती में वापस बंद करना होगा।

अर्जुन और साक्षी ने बाबा की आत्मा को नष्ट करने के लिए वह अंतिम मंत्र पढ़ा। जैसे ही मंत्र का उच्चारण हुआ, एक भारी ध्वनि गूंजती है और एक तेज़ रोशनी का गोला उत्पन्न होता है। बाबा की आत्मा का चेहरा चीखते हुए गायब हो जाता है, और उसकी शक्ति मिट जाती है। वह काला धागा जो गाँववालों के ऊपर मंडरा रहा था, अब टूट जाता है और उसकी घनी छाया छँट जाती है।

अर्जुन (संतुष्ट होकर):
“यह अंत था। अब यह गाँव सुरक्षित है।”

साक्षी (सुकून से):
“हमने आखिरकार इसे खत्म कर दिया। बाबा की शक्तियों का अंत कर दिया। अब यह गाँव फिर से शांत रहेगा।”

गाँव में शांति वापस लौट आती है। सभी लोग फिर से अपने घरों में खुशहाल जीवन जीने लगते हैं। अंधेरे का साया अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका था।

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