कालवशिक बाबा का राज

छोटे से गाँव के बाहर, रात का समय। गाँव के बाहर एक अंधेरी जंगल के पास एक पुरानी हवेली खड़ी है, जिस पर समय का असर साफ दिखता है। हवेली के आसपास घना जंगल और दूर-दूर तक पसरी हुई चुप्प है।

अलीशा – एक साहसी और जिज्ञासु लड़की।
रमन – अलीशा का अच्छा दोस्त, जो भूत-प्रेत की बातें बिल्कुल नहीं मानता।
बाबा कालवशिक – एक रहस्यमय बाबा, जो ब्लैक मैजिक और अंधेरे शक्तियों के बारे में जानता है।
महेश – एक गाँववाला, जो बहुत समय से बाबा के बारे में चेतावनियाँ देता आया है।

अलीशा (उत्सुक होकर):
“रमन, तुमने सुना है न इस गाँव के बारे में? लोग कहते हैं कि यहां एक पुराना बाबा है, जिसका नाम बाबा कालवशिक है। उसके पास कुछ अजीब शक्ति है।”

रमन (हंसते हुए):
“तुम्हें क्या हुआ, अलीशा? भूत-प्रेत और जादू-टोने की कहानियाँ तुम क्या सुनने लगी हो? यह सब बस अफवाहें हैं।”

अलीशा (गंभीर होकर):
“नहीं, रमन! यहाँ कुछ तो गड़बड़ है। लोग कहते हैं कि बाबा कालवशिक के पास एक खतरनाक किताब है, जिसमें ब्लैक मैजिक के राज़ हैं। उसने कई लोगों की जान ली है, और अब वो हवेली में रहता है।”

रमन (शरारत से):
“तो क्या तुम भी उन कहानियों पर विश्वास करने लगी हो? क्या तुमने कभी खुद वह किताब देखी है?”

अलीशा (सख्त होकर):
“नहीं, लेकिन गाँव के लोग कहते हैं कि बाबा के पास वो किताब है, और जब तक वह जिन्दा है, कोई भी व्यक्ति यहां से बाहर नहीं जा पाता। हम इसके बारे में और जान सकते हैं।”

दोनों दोस्त गाँव के पास उस हवेली की ओर बढ़ते हैं। हवेली का दरवाजा खचखचाते हुए खुलता है और अंधेरे में सन्नाटा सा छाया हुआ है।

रमन (काँपते हुए):
“अलीशा, मुझे डर लग रहा है। यहाँ कुछ तो अजीब है।”

अलीशा (ठानकर):
“तुम डरते क्यों हो, रमन? हमें अंदर जाकर देखना होगा। यह हवेली ही तो सब कुछ छुपा रही है।”

हवेली के अंदर घुसते हैं। अचानक एक तेज़ हवाओं की आवाज़ सुनाई देती है और चूहे की चीं-चीं की आवाज़ गूंजने लगती है।

अलीशा (आश्चर्यचकित होकर):
“देखो! वह क्या है? वहाँ दीवार पर कुछ अजीब सा निशान है।”

रमन (चिंतित होकर):
“यह तो… यह तो कोई पुराने जादू का निशान है। हम यहाँ से चलते हैं, अलीशा।”

अलीशा (सख्त स्वर में):
“नहीं, रमन! हमें यहाँ रुककर बाबा के बारे में और जानना होगा।”

अलीशा और रमन हवेली में और अंदर जाते हैं। हवेली के अंदर एक अजीब सी गंध महसूस होती है। तभी अचानक एक पुरानी ध्वनि गूंजती है, और बाबा कालवशिक सामने आता है। वह एक लंबी सफेद दाढ़ी वाला, काले कपड़े पहने हुआ आदमी है, जिसकी आँखें पूरी तरह से काली होती हैं।

बाबा कालवशिक (गंभीर आवाज में):
“तुम लोग कौन हो? यहाँ क्या ढूंढ रहे हो?”

अलीशा (दृढ़ता से):
“हम आपको ढूंढ रहे थे, बाबा कालवशिक। लोग कहते हैं कि आप ब्लैक मैजिक के मास्टर हैं। हमें आपके बारे में सब कुछ जानना है।”

रमन (डरे हुए):
“अलीशा, हमें यहाँ से भाग जाना चाहिए। यह आदमी हमें नुकसान पहुँचा सकता है।”

बाबा कालवशिक (हंसते हुए):
“तुम दोनों को लगा क्या? तुम मेरे रहस्यों को समझ पाओगे? मेरे पास ऐसी शक्तियाँ हैं, जो तुम्हारे सोच से भी बाहर हैं। तुम जितना दूर रहोगे, उतना तुम्हारे लिए अच्छा है।”

रमन (भीतर से काँपते हुए):
“यह तो सच में कुछ अलग ही है।”

अलीशा (सख्त स्वर में):
“आपके पास सच में क्या शक्ति है, बाबा?”

बाबा कालवशिक (चुपचाप हंसते हुए):
“तुम जानते नहीं हो, बच्ची! तुम दोनों के पास जो कुछ भी है, वह सब मेरी किताब में लिखा है। अब तुम यहाँ क्यों आए हो?”

अलीशा और रमन बाबा के सामने खड़े होते हैं। अचानक बाबा की आँखें और भी काली हो जाती हैं और एक तेज़ बर्फीली हवा बहने लगती है। बाबा के हाथों में एक पुराना काला किताब आ जाता है।

बाबा कालवशिक (घोर आवाज में):
“तुम दोनों ने जो कदम उठाया है, अब तुम्हें इसका परिणाम भुगतना होगा। यह किताब मेरे नियंत्रण में है। और अगर तुमने मेरे आदेशों का पालन नहीं किया, तो तुम दोनों को अंधेरे में खो जाना पड़ेगा।”

बाबा ने अपनी हथेली से हवा में कुछ संकेत किए और अचानक अलीशा के सामने एक काला धुंआ उभरता है। अलीशा की आँखों में डर और घबराहट साफ दिखाई देती है।

अलीशा (डरी हुई):
“रमन! देखो, क्या हो रहा है!”

रमन (चिल्लाते हुए):
“अलीशा, हमें यहाँ से तुरंत निकलना होगा!”

जैसे ही दोनों ने वापसी की कोशिश की, हवेली की दीवारें हिलने लगती हैं और किचन में आवाजें आनी लगती हैं। अचानक किचन की दीवारों से खून बहने लगता है। एक भयावह आवाज सुनाई देती है।

भूत (अजीब आवाज में):
“तुम दोनों को यहाँ रहने की सजा मिलेगी।”

अलीशा और रमन डर के मारे किचन से बाहर भागते हैं। लेकिन हवेली में जाने वाले रास्ते बंद हो चुके थे। अब वे चारों ओर फंसे हुए थे।

अलीशा (पसीने में सराबोर):
“हम फंस गए हैं, रमन। यह जगह हमें छोड़ने नहीं देगी।”

रमन (घबराए हुए):
“यह सब सच है, अलीशा। वह बाबा कोई मामूली आदमी नहीं है। उसके पास असली जादू है।”

बाबा कालवशिक सामने आता है और अपने हाथों में काले धागे पकड़ता है। एक तेज़ चीख सुनाई देती है। बाबा ने अपनी आँखें बंद कर ली हैं और अब वह कुछ पढ़ने लगता है।

बाबा कालवशिक (हंसते हुए):
“तुम दोनों को अब मेरे जादू से मुक्ति नहीं मिल सकती। यह जो काला धागा है, वह तुम्हारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। अब तुम दोनों मेरे जादू से बंधे हुए हो।”

जैसे ही बाबा ने मंत्र पढ़ना खत्म किया, अलीशा और रमन को महसूस होता है कि उनके शरीर में एक अजीब सी ताकत समा गई है। वे अपने शरीर को नियंत्रित नहीं कर पा रहे थे।

अलीशा (काँपते हुए):
“रमन, हमें इसे रोकना होगा। हम अपनी इच्छाशक्ति से इस जादू को तोड़ सकते हैं। बाबा का यह जादू सिर्फ हमारे डर पर काम करता है।”

रमन (साहसिकता से):
“तुम सही कह रही हो, अलीशा! हमें डर को काबू करना होगा और इस जादू का तोड़ निकालना होगा।”

दोनों ने मिलकर अपने डर को नियंत्रित किया और बाबा की तरफ देखा। बाबा कालवशिक का चेहरा गुस्से में बदल गया। वह क्रोध से चिल्लाया और काले धागों को फिर से घुमा दिया।

अलीशा और रमन ने एक साथ अपनी ताकत को एकजुट किया। उनके शरीर में अचानक एक सफेद रोशनी भर गई, और वह बाबा के जादू को नष्ट करने में सक्षम हो गए। जैसे ही उन्होंने बाबा पर जोर डाला, बाबा के शरीर में अजीब सी हिलचाल हुई, और वह जोर से चीखते हुए हवेली से बाहर निकल गया।

बाबा कालवशिक (चिल्लाते हुए):
“तुम दोनों को बचने नहीं दूंगा!”

लेकिन बाबा ने जैसे ही हवेली छोड़ने की कोशिश की, वह एक भूतिया धुंआ बनकर उड़ गया। हवेली की दीवारें ध्वस्त हो गईं, और वह स्थान अब पूरी तरह से शांत हो गया।

अलीशा और रमन अब हवेली से बाहर निकलते हैं। गाँव की तरफ जाने वाले रास्ते पर शांति थी।

अलीशा (सांत्वना देते हुए):
“हमने यह कर लिया, रमन! बाबा कालवशिक की शक्ति अब खत्म हो चुकी है।”

रमन (खुश होकर):
“हां, हम अब पूरी तरह से सुरक्षित हैं। वह सब अब सिर्फ एक डरावनी कहानी बनकर रह गया है।”

लेकिन जब दोनों गाँव लौटने के लिए मुड़ते हैं, तो उन्हें यह महसूस होता है कि जो भी हुआ, वह उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे।

अलीशा और रमन गाँव की ओर लौटते हैं, लेकिन उनका दिल अब भी भारी है। हवेली की घटनाएँ लगातार उनके दिमाग में गूंज रही थीं। जैसे ही वे गाँव की सीमा में प्रवेश करते हैं, उन्हें एक अजीब सी खामोशी का अहसास होता है। गाँव के लोग कहीं नज़र नहीं आ रहे थे, और हर घर बंद था। यह सामान्य नहीं था।

अलीशा (चिंतित होकर):
“रमन, क्या तुम्हें लगता है कि कुछ गड़बड़ है? सब लोग अचानक कहां चले गए?”

रमन (सहजता से):
“अलीशा, यह बस हमारी सोच है। हो सकता है लोग किसी काम में व्यस्त हों। हमें घबराने की जरूरत नहीं है।”

अलीशा (सशंकित होकर):
“नहीं, रमन, कुछ तो ठीक नहीं है। यह अजीब है। हमें यह मामला सुलझाना होगा।”

दोनों गांव के चौक में पहुँचते हैं। लेकिन वहाँ भी कोई नहीं दिखता। हर तरफ एक सन्नाटा पसरा हुआ है। फिर अचानक, महेश, जो गाँव का एक बुजुर्ग आदमी है, सामने आता है। उसकी आँखों में घबराहट और डर साफ नज़र आता है।

महेश (काँपते हुए):
“तुम दोनों वापस आ गए हो? तुमने जो किया, वह सही नहीं था। बाबा कालवशिक की शक्तियाँ बहुत खतरनाक हैं। अब, तुम्हें और इस पूरे गाँव को उसके प्रभाव से बचाने का कोई रास्ता नहीं है।”

अलीशा (चिंतित होकर):
“क्या हो रहा है महेश? हम बाबा को खत्म कर चुके हैं। फिर ये सब क्यों हो रहा है?”

महेश (कातर आवाज में):
“तुम दोनों ने ठीक किया कि बाबा को खत्म किया, लेकिन तुम नहीं जानते थे कि उसने अपनी ताकत सिर्फ हवेली तक सीमित नहीं रखी थी। उसकी शक्ति अब गाँव के हर कोने में फैल चुकी है। अब जो भी उसकी छाया में आ चुका है, वह उसकी जादू की चपेट में है। और तुम दोनों अब उन लोगों में शामिल हो।”

महेश की बातें सुनकर अलीशा और रमन का दिल धक से रह जाता है। महेश ने बताया कि बाबा ने अपनी शक्ति को उस काले किताब में जकड़ लिया था, जो उसने अलीशा और रमन के सामने लहराई थी। बाबा की आत्मा अब उस किताब के भीतर बसी हुई थी, और अब वही किताब गाँव के हर इंसान पर अपना असर डालने लगी थी।

रमन (डरी हुई आवाज में):
“तो, अब हम क्या करें? क्या हमें फिर से हवेली लौटना होगा?”

महेश (गंभीर स्वर में):
“नहीं, अब तुम दोनों को गाँव में फैली हुई इस बुरी शक्ति को खत्म करना होगा। बाबा का असर गाँव के बच्चों, महिलाओं, और बुजुर्गों पर पड़ चुका है। यह पूरी तरह से एक सामूहिक शाप बन चुका है। तुम दोनों को किसी तरह उस किताब के प्रभाव को नष्ट करना होगा।”

अलीशा और रमन के चेहरे पर गहरी चिंता थी, लेकिन अब उनके पास कोई रास्ता नहीं था। दोनों महेश से रास्ता पूछते हैं और गाँव के एक पुराने मंदिर में जाते हैं, जहाँ वे बाबा के जादू को खत्म करने के लिए एक पुराना मंत्र ढूंढने की कोशिश करते हैं।

मंदिर में घुसते ही उन्हें एक अजीब सी ठंडक महसूस होती है। मंदिर की दीवारों पर जो प्राचीन चित्र बने थे, उनमें से एक चित्र उन्हें सबसे ज्यादा डराता है। वह चित्र बाबा कालवशिक का था, जिसमें उसकी आँखें आग की तरह जल रही थीं। अचानक, दीवारों से खून की धाराएँ बहने लगती हैं और एक तेज़ बुरी हंसी गूंजने लगती है।

रमन (हैरान होकर):
“यह क्या है! क्या हम फिर से किसी जाल में फंसे हैं?”

तभी एक बर्फीली आवाज़ सुनाई देती है, “तुम वापस क्यों आए हो? तुम मेरे जादू से कभी नहीं बच सकते!”

अलीशा (सख्त स्वर में):
“बाबा, तुम फिर से हमारे सामने आ गए हो! हम तुमसे डरने वाले नहीं हैं!”

तभी, मंदिर के बीचोंबीच से बाबा की काली छाया उभर आती है। वह अब एक आत्मा के रूप में था, लेकिन उसकी आँखें अब भी जलती हुई थीं। बाबा कालवशिक की उपस्थिति अब और भी सशक्त हो गई थी।

बाबा कालवशिक (हंसते हुए):
“तुम दोनों मुझे खत्म नहीं कर सकते। मैं अब इस पूरी दुनिया में फैल चुका हूं। तुम्हारा यहाँ आना मेरी शक्ति को और भी मजबूत बना देगा।”

अलीशा और रमन ने अपने अंदर से पूरी ताकत जुटाई और बाबा के सामने खड़े हो गए। उन्होंने बाबा के जादू से मुक्त होने के लिए पुराना मंत्र ढूंढने की कोशिश की, जो महेश ने उन्हें बताया था। जैसे ही अलीशा ने उस मंत्र का उच्चारण किया, मंदिर की दीवारें कांपने लगीं और एक शक्तिशाली लहर पूरे मंदिर में दौड़ने लगी।

बाबा ने अपनी शक्ति से उन दोनों को खींचने की कोशिश की, लेकिन अलीशा और रमन ने मन ही मन बाबा के जादू को तोड़ने की पूरी कोशिश की। जैसे ही मंत्र के अंतिम शब्द हवा में गूंजे, बाबा की छाया चिल्लाती हुई गायब हो गई। उसके बाद मंदिर की दीवारों पर खून की धारें रुक गईं, और वातावरण में शांति छा गई।

मंदिर में अब एक गहरी शांति थी, लेकिन अलीशा और रमन जानते थे कि उनका संघर्ष अब खत्म नहीं हुआ था। बाबा की आत्मा अभी भी कहीं न कहीं अस्तित्व में थी। उन्होंने महेश से संपर्क किया और वह उन्हें बताता है कि बाबा का जादू पूरी तरह से नष्ट नहीं हुआ है, लेकिन उनका सबसे बड़ा काम किया गया था।

महेश (संतुष्ट होकर):
“तुम दोनों ने जो किया, वह साहसिक था। बाबा की आत्मा का असर अब खत्म हो चुका है, लेकिन तुम्हें उस किताब को पूरी तरह से नष्ट करना होगा। वही किताब बाबा के काले जादू का केंद्र थी। अगर वह किताब सही हाथों में ना जाए, तो वह फिर से अपना असर दिखा सकती है।”

अलीशा और रमन ने गाँव के बाहर एक पुराने कुएं में बाबा की किताब को फेंक दिया, और उस पर पानी डाला। किताब जलने लगी, और उसकी राख हवा में उड़कर गायब हो गई। अब गाँव में शांति थी। बाबा कालवशिक का जादू अब पूरी तरह से नष्ट हो चुका था।

अलीशा और रमन अब गाँव में शांति से रहते थे। उन्होंने बाबा की जादूई शक्ति का खात्मा कर दिया था, लेकिन अब उनका जीवन पूरी तरह से बदल चुका था। उन्हें इस अनुभव ने सिखाया कि कोई भी बुरी शक्ति केवल डर पर ही काम करती है, और जब आप अपने डर को सामना करते हैं, तो आप सबसे बड़ी शक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

अलीशा (संतुष्ट होकर):
“हमने जो किया, वह सही था। अब यह गाँव फिर से खुशहाल होगा।”

रमन (सहज होकर):
“हां, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंधेरे की ताकतें हमेशा हमारे आसपास हो सकती हैं। हमें हमेशा तैयार रहना होगा।”

दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते हैं और गाँव के भविष्य के बारे में सोचते हैं, जो अब सुरक्षित और शांतिपूर्ण है।

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