भूतिया हवेली का रहस्य

(गाँव के लोग आपस में बातें कर रहे थे। घने जंगल के पास एक पुरानी हवेली खड़ी थी, जिसके बारे में लोग कहते थे कि वह भूतिया है।)

गाँववाला 1: “क्या तुमने सुना? रात के अंधेरे में हवेली से अजीब आवाजें आती हैं।”

गाँववाला 2: “हां, सुना है। कोई भी उस हवेली के पास नहीं जाता। कहते हैं, वहां किसी महिला की आत्मा बसी हुई है।”

गाँववाला 3: “तुम लोग सिर्फ अफवाहें फैला रहे हो। मैंने तो सुना है कि उस हवेली में एक परिवार रहता था, और एक दिन उनका कत्ल हो गया। फिर से कोई नहीं गया उस हवेली के पास।”

(गाँववाले बातें करते रहते हैं, लेकिन एक नौजवान युवक, अजय, जो इस सबको सिर्फ अफवाह मानता है, वह हवेली की ओर जाने का मन बनाता है।)

(अजय एक दिन सूर्योदय के पहले हवेली की ओर चल पड़ता है। उसके मन में कुछ डर था, लेकिन वह उसे नकारता हुआ आगे बढ़ता है।)

अजय (सोचते हुए): “ये तो महज अफवाहें हैं। अगर सच में कुछ होता तो कोई और भी तो जाता। मैं तो साफ तौर पर देखूँगा कि क्या है इस हवेली में।”

(वह हवेली के पास पहुँचता है। हवेली की दीवारें जर्जर हो चुकी थीं और दरवाजे पर पुराने खून के दाग थे।)

अजय (जोर से): “किसी है तो सामने आओ!”

(अजय की आवाज़ हवेली के चारों ओर गूंज जाती है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। वह हवेली में प्रवेश करता है।)

(अजय हवेली के अंदर कदम रखता है। वहां की हवा ठंडी और घनी थी। उसे कुछ आवाजें सुनाई देती हैं, जैसे किसी के कदमों की आवाज़।)

अजय (अन्दर से): “कोई है क्या?”

(अजय एक कक्ष के पास पहुँचता है, जहां अचानक लाइट चमकती है। वह डर के साथ उस कमरे की ओर बढ़ता है। दरवाजा खुद-ब-खुद खुल जाता है।)

अजय (डरते हुए): “क्या… क्या ये सच है?”

(कमरे में एक पुरानी तस्वीर दीवार पर टंगी होती है, जिसमें एक महिला का चेहरा दिखाई देता है। अचानक, तस्वीर में से एक भूतिया चेहरा उभरता है।)

भूतनी (गुस्से में): “तुम यहाँ क्यों आए हो? इस हवेली में तुम जैसे और भी लोग आए थे, लेकिन अब वे सब नहीं रहे।”

अजय (काँपते हुए): “मैंने सिर्फ सत्य जानने के लिए आना चाहा था, मुझे माफ कर दो!”

भूतनी (कड़कते हुए): “तुम्हें माफ़ी नहीं मिलेगी! तुम्हें वही भुगतना होगा जो उन्होंने भुगता था।”

(तभी अचानक हवेली की दीवारें हिलने लगती हैं, और सर्द हवा चलने लगती है। अजय को महसूस होता है कि हवेली के अंदर कुछ और भी डरावना है।)

(अजय कमरे से बाहर निकलने की कोशिश करता है, लेकिन वह पाया कि दरवाजे अब बंद हो चुके हैं। एक कटीली हंसी गूंजती है।)

अजय (हड़बड़ाते हुए): “यह क्या हो रहा है? मुझे निकलने दो!”

(अजय दरवाजे को धक्का देता है, लेकिन दरवाजा नहीं खुलता। कमरे की दीवारें अचानक झुकने लगती हैं और अंधेरा और गहरा हो जाता है।)

भूतनी (हंसी में): “तुम नहीं जा सकते। तुम हमारे जैसे हो अब। तुम भी यहाँ फंस चुके हो।”

(अजय अपने चारों ओर देखता है, उसे कमरे में एक पुरानी किताब दिखाई देती है। किताब को खोलते ही अजीब आवाज़ें सुनाई देती हैं। किताब में एक मंत्र लिखा होता है जो भूतनी के शाप को तोड़ सकता है।)

अजय (पढ़ते हुए): “हे देवी, इस आत्मा को शांति दो, जो इस हवेली में बसी हुई है।”

(अचानक कमरे में हल्की रौशनी फैलने लगती है। भूतनी की घनी परछाई धुंधली पड़ने लगती है।)

भूतनी (धीरे-धीरे): “तुमने मुझे शांति दी। अब मैं जा रही हूँ, लेकिन तुम भी यहीं रहोगे।”

(भूतनी की आत्मा गायब हो जाती है, लेकिन अजय को समझ आता है कि वह अब भी हवेली में फंसा हुआ है।)

अजय (डरा हुआ): “क्या… क्या अब मैं भी कभी बाहर नहीं निकल पाऊँगा?”

(अचानक, हवेली का दरवाजा खुल जाता है। अजय बाहर निकलता है, लेकिन हवेली अब भी उसी तरह खड़ी होती है।)

अजय (हैरान होते हुए): “क्या यह सिर्फ एक सपना था? या फिर… क्या मैं हमेशा के लिए यहाँ फंस चुका हूँ?”

(अजय को एहसास होता है कि हवेली का रहस्य अब भी उसे घेरे हुए है। हवेली का दरवाजा एक बार फिर बंद हो जाता है।)

(अजय हवेली से बाहर निकलकर थोड़ा आगे बढ़ता है, लेकिन जैसे ही वह घने जंगल में कदम रखता है, उसे महसूस होता है कि कोई उसका पीछा कर रहा है। उसकी श्वास तेज हो जाती है, और वह हर आहट पर चौंकता है।)

अजय (डरा हुआ, बड़बड़ाते हुए): “यह क्या हो रहा है? मैंने तो निकलने का रास्ता ढूंढ लिया था, लेकिन फिर भी क्यों लग रहा है कि कोई पीछा कर रहा है?”

(अजय पीछे मुड़कर देखता है, लेकिन कोई नहीं होता। वह तेज कदमों से जंगल से बाहर निकलने की कोशिश करता है, लेकिन उसी समय, घने जंगल से एक तेज़ और भूतिया हंसी की आवाज आती है।)

भूतनी (हंसी में, दुरूह आवाज़ में): “तुम बचकर नहीं जा सकते, अजय! तुमने जो किया, उसका परिणाम तुम्हें भुगतना होगा!”

(अजय रुककर आवाज़ की दिशा में देखता है, लेकिन उसे कुछ नहीं दिखाई देता। उसका दिल अब बहुत तेज़ धड़क रहा था।)

(अजय अब घबराया हुआ जंगल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे महसूस होता है कि जंगल का रास्ता अब बदल चुका है। उसे लगता है कि वह उसी हवेली के पास वापस लौट आया है।)

अजय (काँपते हुए, सोचते हुए): “नहीं… यह क्या हो रहा है? मैंने तो जंगल के बाहर निकलने का रास्ता लिया था, फिर क्यों मुझे यहाँ वापस आना पड़ा?”

(हवेली अब और डरावनी दिखाई देने लगती है, उसकी दीवारों पर खून के धब्बे और जाले लग गए हैं। वह फिर से हवेली के अंदर चला जाता है, क्योंकि उसे अब महसूस हो रहा है कि वह कहीं नहीं जा सकता।)

अजय (हवेली के अंदर चिल्लाते हुए): “मुझे जाने दो! मुझे मुक्त करो! क्या तुम नहीं समझ रही हो, मैं क्या चाहता हूँ!”

भूतनी (गुस्से में, उसकी आवाज़ गहरी और कटी हुई): “तुमने मुझे नहीं छोड़ा, अब तुम खुद मेरी तरह फंसे रहोगे। यही तुम्हारा भविष्य है, अजय!”

(हवेली के अंदर अजय की हालत बदतर हो रही थी। अचानक, एक कमरे का दरवाजा अपने आप खुलता है, और वह कमरे के अंदर जाता है। अंदर एक पुरानी काले रंग की चाय की टोपी और किताब पड़ी होती है। जब वह किताब खोलता है, तो उसमें एक अजीब मंत्र लिखा होता है, जिसे वह याद करता है।)

अजय (पढ़ते हुए): “नमः शिवाय… एक आधी आत्मा शांति पाए, और दूसरी आधी को मुक्ति मिले…”

(जैसे ही अजय मंत्र पढ़ता है, हवेली के अंदर की हवा घनी हो जाती है, और एक भूतिया रूप सामने आता है। वह रूप वही महिला थी, जिसकी तस्वीर अजय ने पहले देखी थी।)

भूतनी (क्रोधित, उसकी आंखों में गुस्सा और दुख): “तुमने क्या किया? तुमने हमारी आत्मा को फिर से जगाया है! अब तुम हमें छोड़कर नहीं जा सकोगे!”

(फिर अचानक, महिला का रूप बदलता है, और वह एक भयानक राक्षस के रूप में बदल जाती है। राक्षस की चमकती आँखें और खून से सने हाथ अजय को डर से काँपने पर मजबूर कर देते हैं।)

(अजय डर से कांपते हुए अब समझने लगा कि वह इस भूतिया हवेली के रहस्य में फंसा हुआ है। वह राक्षस से बचने के लिए हर तरह से जूझने लगता है, लेकिन वह महसूस करता है कि हवेली अब उसे अपने कब्जे में ले चुकी है।)

अजय (चिल्लाते हुए, संघर्ष करते हुए): “मुझे छोड़ दो! मैं तुम्हें नहीं डरने दूँगा!”

(अजय अपने भीतर की शक्ति जुटाकर राक्षस के खिलाफ लड़ने की कोशिश करता है, लेकिन वह अब पूरी तरह से थक चुका था। हवेली के भीतर की दीवारें उसे दबोचने की कोशिश करती हैं।)

भूतनी (हंसी में, तेज़ आवाज़ में): “तुम हमारी शक्ति को कम नहीं कर सकते, अजय! तुम अब हमारे जैसे हो!”

(अजय आखिरकार खुद को छोड़ने की उम्मीद खो बैठता है। तभी वह याद करता है कि मंत्र के माध्यम से वह इस सब से मुक्ति पा सकता है। वह उसी मंत्र को फिर से पढ़ता है।)

अजय (कांपते हुए, मंत्र पढ़ते हुए): “नमः शिवाय, आत्मा शांति से मुक्त हो…”

(जैसे ही अजय मंत्र पूरा करता है, हवेली के भीतर की दीवारें टूटने लगती हैं, और भूतनी और राक्षस का रूप धीरे-धीरे गायब होने लगता है। हवेली के अंदर की हवा हल्की हो जाती है, और हर जगह शांति छा जाती है।)

अजय (थके हुए, राहत की सांस लेते हुए): “क्या यह सच में हो रहा है? क्या अब मैं मुक्त हूँ?”

(अजय हवेली से बाहर निकलता है, और वह देखता है कि सूरज उग चुका है। उसे एहसास होता है कि उसने एक बड़ी लड़ाई जीती है, लेकिन हवेली अब भी वहीं खड़ी है, जैसे एक चुप्पी और रहस्य छोड़ती हुई।)

अजय (सोचते हुए): “क्या मैं सच में मुक्त हो गया हूँ, या फिर यह एक और छलावा था? शायद यह हवेली हमेशा इस दुनिया में मौजूद रहेगी, हम केवल कुछ समय के लिए इससे बच पाते हैं।”

(कहानी का अंत अजय के सवालों के साथ होता है, और हवेली की काली छाया फिर से धीरे-धीरे अंधेरे में समाती है।)

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