रतनाम, एक छोटे से गाँव के पास स्थित एक रहस्यमयी पुल था, जिसे अब कोई नहीं देखना चाहता था। यह पुल गाँव के पुराने हिस्से से जुड़ा था और कई वर्षों से बंद पड़ा था। कहते थे कि इस पुल पर रात के समय अजीब घटनाएँ घटती थीं और वहाँ से गुजरने वाले लोग कभी वापस नहीं लौटे। गाँववालों का कहना था कि यह पुल एक भूतिया स्थल बन चुका है, और कोई भी इस पर रात के समय जाने की हिम्मत नहीं करता था।
कहा जाता है कि कई साल पहले इस पुल पर एक दर्दनाक हादसा हुआ था। एक रात, एक बस पुल के ऊपर से गुजर रही थी और अचानक एक अजीब सी आवाज़ आई, जैसे कोई चीख रहा हो। बस के अंदर सवार सभी यात्री घबराए हुए थे, और तभी बस पलट गई। हादसे में सभी यात्रियों की मौत हो गई, और उसके बाद से यह पुल भूतिया माना जाने लगा।
यह कहानी एक युवक, समीर की है। समीर एक साहसी और जिज्ञासु लड़का था, जो हमेशा नई-नई जगहों और रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश करता था। जब उसे रतनाम ब्रिज के बारे में सुनी थी अजीबोगरीब कहानियाँ, तो वह तय कर चुका था कि वह इस भूतिया पुल का रहस्य जानने के लिए वहाँ जाएगा।
समीर ने एक शाम को पुल का रुख किया। गाँववालों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया। समीर का दिल बहुत मजबूत था, और उसे डर नहीं था। जैसे ही वह पुल के पास पहुँचा, उसकी धड़कन तेज़ हो गई। पुल की दीवारों पर काई जमी हुई थी, और पुरानी लकड़ी की रेलिंग टूट चुकी थी। पुल के चारों ओर खामोशी थी, और एक ठंडी हवा महसूस हो रही थी।
समीर ने सोचा कि वह डर के बजाय साहस दिखाएगा, और उसने धीरे-धीरे पुल पर कदम रखा। जैसे ही उसने पहला कदम बढ़ाया, एक तेज़ और डरावनी आवाज़ सुनाई दी। यह आवाज़ किसी की चीखने जैसी थी। समीर ने घबराते हुए चारों ओर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। वह फिर से आगे बढ़ा, लेकिन जैसे ही वह पुल के बीचों-बीच पहुँचा, उसे अचानक एक कटा-फटा चेहरा सामने दिखा। चेहरा बहुत विकृत था, और उसकी आँखें पूरी काली थीं।
“तुम यहाँ क्यों आए हो?” एक गहरी आवाज़ आई। समीर ने डरते हुए कहा, “मैं इस पुल का रहस्य जानने आया हूँ।” चेहरा उसकी ओर घूरते हुए बोला, “यह पुल मेरी मृत्यु का कारण था, और अब तुम मेरे साथ हमेशा के लिए यहाँ रहोगे।”
समीर ने हिम्मत जुटाते हुए कहा, “मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ। मुझे बताओ कि तुम क्यों फंसे हो यहाँ?” चेहरा धीरे-धीरे गायब हो गया, और एक भूतिया आकृति सामने आई। आकृति ने कहा, “मैं इस पुल की आत्मा हूँ। कई साल पहले, इस पुल पर एक दर्दनाक हादसा हुआ था, और उसके बाद से मेरी आत्मा यहाँ फंसी हुई है।”
समीर ने पूछा, “क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ? तुम्हारी आत्मा को शांति कैसे मिल सकती है?” आकृति ने कहा, “तुम्हें इस पुल के अंधेरे राज़ को जानना होगा। जो भी यहाँ आता है, वह या तो मर जाता है या इस पुल की आत्मा का हिस्सा बन जाता है।”
समीर ने साहसिक कदम बढ़ाते हुए कहा, “मैं तुम्हारी मदद करूंगा, लेकिन मुझे यह रहस्य जानने के लिए पूरी सच्चाई चाहिए।” आकृति ने एक पुरानी किताब दी, जिसमें पुल से जुड़ी हुई अजीब घटनाओं का विवरण था।
किताब में लिखा था कि यह पुल कभी एक राजा के आदेश पर बनाया गया था। उस राजा ने एक बुरी शक्ति को रोकने के लिए इस पुल का निर्माण किया था, लेकिन इस पुल के निर्माण के दौरान एक अजीब घटना घटी। एक जादूगर ने यहाँ एक काले जादू का प्रयोग किया था, और उसी के कारण यह पुल शापित हो गया था।
समीर ने किताब को ध्यान से पढ़ा और उसे समझ में आ गया कि उसे इस पुल के रहस्य को खत्म करने के लिए काले जादू को खत्म करना होगा। लेकिन यह मंत्र बहुत खतरनाक था। अगर मंत्र को गलत तरीके से पढ़ा गया, तो पुल और भी भूतिया हो सकता था।
समीर ने साहस दिखाया और किताब में दिए गए मंत्र का उच्चारण करना शुरू किया। जैसे ही उसने मंत्र पढ़ा, पुल के चारों ओर एक तेज़ हलचल मच गई। दीवारों से खून के धब्बे उभरने लगे, और एक अजीब सी आवाज़ गूंजने लगी। समीर घबराया हुआ था, लेकिन उसने मंत्र का उच्चारण जारी रखा।
कुछ देर बाद, एक तेज़ रोशनी पुल के चारों ओर फैलने लगी। खून के धब्बे गायब हो गए, और पुल का माहौल अब शांत हो गया। समीर ने देखा कि वह भूतिया आकृति धीरे-धीरे गायब हो रही थी। “तुमने मुझे शांति दी है,” आकृति बोली और फिर पूरी तरह से गायब हो गई।
समीर ने महसूस किया कि अब यह पुल पहले जैसा नहीं था। वह अब सामान्य और शांति से भरा हुआ था। उसने एक गहरी सांस ली और पुल से बाहर आ गया।
समीर ने पुल से बाहर आते हुए राहत की सांस ली। वह जानता था कि उसने एक खौ़फनाक अनुभव का सामना किया था, लेकिन उसे यह भी महसूस हुआ कि जो कुछ भी हुआ था, वह पूरी कहानी नहीं थी। काले जादू को समाप्त करने के बावजूद पुल में कुछ और रहस्य था, जिसे वह अभी तक नहीं समझ पाया था।
सड़क के किनारे खड़ा होकर, उसने पुल की ओर देखा। अब वहाँ की खामोशी और शांति उसे अजीब सी लग रही थी। क्या यह सच में खत्म हो चुका था, या फिर कुछ और था जो उसे नहीं पता था?
समीर ने अपना मन फिर से स्थिर किया और फैसला किया कि उसे पूरी सच्चाई का पता लगाना होगा। वह जानता था कि पुल के साथ जुड़ी हुई घटनाओं का और गहरा रहस्य था, और उसे यह जानने का अवसर मिलेगा।
अगले दिन, समीर ने अपनी योजना बनाई और फिर से पुल की ओर रुख किया। इस बार वह अकेला नहीं था। उसने अपनी दोस्त, सिया को भी साथ लिया था। सिया भी एक साहसिक और जिज्ञासु लड़की थी, जो समीर के साहसिक सफर में उसकी मदद करने को तैयार थी।
जब वे पुल के पास पहुँचे, तो सिया ने कहा, “समीर, क्या तुम सच में सोचते हो कि यहाँ कुछ और रहस्य है?”
समीर ने धीमे से कहा, “हाँ, मुझे ऐसा लगता है कि हम काले जादू को खत्म करने के बाद भी यहाँ कुछ नहीं सुलझा पाए। पुल के भीतर अभी भी कुछ छिपा हुआ है।”
सिया ने संजीदगी से कहा, “अगर तुम्हें ऐसा लगता है, तो हमें और भी गहरे से इस पुल के राज़ को जानना होगा।”
वे दोनों पुल के पास पहुँचे और पहले से कहीं अधिक ध्यान से पुल की दीवारों को देखा। सिया ने कहा, “यह दीवारें बहुत पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, लेकिन इन पर कुछ अजीब निशान दिखाई दे रहे हैं।”
समीर ने ध्यान से देखा और देखा कि दीवारों पर कुछ अजीब सी रेखाएँ और निशान बने हुए थे, जो पहले उसने नहीं देखे थे। ये रेखाएँ न केवल दीवारों पर थीं, बल्कि कहीं न कहीं जादुई प्रतीकों की तरह उभरी हुई थीं।
“यह क्या हो सकता है?” सिया ने पूछा।
समीर ने कहा, “यह वही प्रतीक हो सकते हैं, जिन्हें किताब में देखा था। शायद ये किसी तंत्र-मंत्र के निशान हों।”
अचानक, पुल के पास की हवा में एक अजीब सी गूंज सुनाई दी। समीर और सिया दोनों ने कान खड़े कर लिए, और तभी उन्हें एक धीमी आवाज़ सुनाई दी, “तुम दोनों यहाँ क्यों आए हो?”
यह आवाज़ बहुत दूर से आ रही थी, लेकिन इतनी गहरी थी कि उसे सुनकर दोनों का दिल डूब गया। सिया ने घबराकर कहा, “यह क्या था? तुमने सुना?”
समीर ने अपनी हिम्मत को नकारते हुए कहा, “यह वही आवाज़ हो सकती है, जो इस पुल की आत्मा की है।”
उन दोनों ने धीरे-धीरे आवाज़ की दिशा में कदम बढ़ाए। जैसे-जैसे वे पुल के अंदर बढ़ते गए, आवाज़ तेज़ होती गई। जब वे पुल के बीचोंबीच पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि वहाँ एक घना अंधेरा था, और अंदर से कोई आकार उभरने लगा।
समीर और सिया दोनों डरे हुए थे, लेकिन उन्होंने साहस दिखाते हुए आकार की ओर बढ़ना जारी रखा। अचानक, एक भूतिया आकृति उनके सामने आ गई। वह आकृति पूरी तरह से कटी-फटी थी, और उसकी आँखों में खून की रोशनी थी।
“तुम दोनों मेरी मदद नहीं कर सकते,” आकृति बोली, और उसकी आवाज़ में इतनी डरावनी गूंज थी कि दोनों की हिम्मत टूटने लगी।
“तुम कौन हो?” समीर ने डरते हुए पूछा।
“मैं इस पुल की शापित आत्मा हूँ,” आकृति बोली। “तुमने काले जादू को समाप्त किया, लेकिन मेरे अस्तित्व के पीछे और भी गहरी सच्चाई छुपी हुई है। तुम्हें मेरी मदद करने के लिए और भी गहरे तक जाना होगा।”
समीर और सिया अब समझ चुके थे कि जो कुछ भी हुआ था, वह बस एक शुरुआत थी। पुल के भूतिया राज़ को सुलझाने के लिए उन्हें और भी अंधेरे रहस्यों का सामना करना होगा।
आकृति ने उन्हें एक पुरानी किताब दी और कहा, “तुमें उस किताब में छिपे मंत्र को ढूंढ़ना होगा, जो इस शाप को समाप्त कर सके। अगर तुम उसे ढूंढ़ पाओ, तो मेरी आत्मा को मुक्ति मिलेगी।”
समीर ने किताब को ध्यान से खोला, और पाया कि उसमें एक मंत्र था, जो पुल के शाप को समाप्त कर सकता था, लेकिन इसे उच्चारण करने के लिए किसी प्राचीन शक्ति की आवश्यकता थी।
“क्या हम यह मंत्र पढ़ सकेंगे?” सिया ने घबराते हुए पूछा।
समीर ने गहरी सांस ली और कहा, “हमें इसे पढ़ने का साहस जुटाना होगा, क्योंकि यह हमारी आखिरी उम्मीद है।”
समीर और सिया ने किताब में से मंत्र का उच्चारण शुरू करने का फैसला किया, लेकिन जैसे ही उन्होंने पहले शब्द का उच्चारण किया, एक तेज़ शोर और झंकार सुनाई दी। ब्रिज की दीवारों से अचानक तेज़ हवा चलने लगी, और चारों ओर से डरावनी आवाजें गूंजने लगीं। पुल का माहौल और भी घना हो गया था, जैसे कोई अजीब शक्ति उन्हें घेर रही हो।
“क्या तुम ठीक हो?” सिया ने समीर से पूछा, उसकी आवाज़ में घबराहट थी।
समीर ने शांति से जवाब दिया, “हमने जो करना शुरू किया है, उसे पूरा करना होगा।” लेकिन उसके भीतर एक अजीब सी घबराहट थी, जैसे अब उनका सामना कुछ और बड़ा करने वाला था।
जैसे ही वे मंत्र का उच्चारण करते रहे, पुल के चारों ओर की हवा और तेज़ हो गई। अचानक, पुल के अंत में एक विशाल धुंआ घेरने लगा, और एक अजीब सी आकृति उभरी। यह आकृति पहले तो धुंधली थी, लेकिन धीरे-धीरे यह स्पष्ट होती चली गई। यह आकृति एक पुरुष की थी, जिसकी आँखें जल रही थीं और शरीर से खून रिस रहा था। उसके चेहरे पर एक विकृत मुस्कान थी, और उसकी घनी आवाज़ गूंजने लगी, “तुमने जो किया, वह अब उल्टा पड़ेगा। तुम दोनों के साथ मैं अपने खेल को पूरा करूंगा।”
सिया ने डरते हुए पूछा, “तुम कौन हो?”
आकृति ने गुस्से में कहा, “मैं वही आत्मा हूँ जो इस पुल पर बसी हुई है। तुम दोनों ने काले जादू को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन क्या तुम जानते हो कि इसका परिणाम क्या होगा?”
समीर और सिया अब यह समझ चुके थे कि जो भी था, वह कोई सामान्य आत्मा नहीं थी। वह कोई प्राचीन शक्ति थी, जो पुल के अंधेरे रहस्यों के कारण फंसी हुई थी।
“अगर तुम चाहते हो कि हम तुम्हारी मदद करें, तो हमें पूरी सच्चाई बताओ,” समीर ने साहस दिखाते हुए कहा।
आकृति ने गहरी हंसी हंसी और बोली, “तुम नहीं समझते। तुम दोनों मेरे खेल में फंसे हो, और इस खेल को खत्म करने का कोई रास्ता नहीं है।” फिर अचानक उसने जोर से चीखते हुए कहा, “तुम दोनों को यहाँ छोड़कर मैं हमेशा के लिए इस पुल में फंसा रहूँगा।”
उसकी आवाज़ सुनते ही, पुल की दीवारों से और अधिक खून के धब्बे उभरने लगे, और पूरा पुल तेज़ झंकार से गूंजने लगा। पुल के बीचों-बीच एक घना धुंआ था, जिसमें से भूतिया आकृतियाँ उभरने लगीं। समीर और सिया डर से कांप रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने साहस को नकारते हुए वह मंत्र उच्चारण करना जारी रखा।
अचानक, धुंआ छटने लगा और आकृति कमजोर होने लगी। समीर और सिया ने देखा कि जैसे ही मंत्र का उच्चारण सही तरीके से हो रहा था, वह भूतिया आकृति अब धीरे-धीरे धुंधली हो रही थी। उसका विकृत चेहरा अब शांत हो रहा था, और धीरे-धीरे उसकी जलती आँखें फीकी पड़ने लगीं।
“तुमने मुझे मुक्त किया,” आकृति धीमी आवाज में बोली, और फिर उसकी आकृति पूरी तरह से गायब हो गई। पुल का माहौल अब शांत हो चुका था। चारों ओर की हवा अब हल्की हो गई, और खून के धब्बे भी गायब हो गए।
“क्या यह सच में खत्म हो गया?” सिया ने घबराते हुए पूछा।
समीर ने राहत की सांस लेते हुए कहा, “हाँ, अब हम इस पुल के भूतिया राज़ को सुलझा चुके हैं।”
वे दोनों पुल से बाहर निकले और देखा कि पुल अब सामान्य और शांत था। अब वह स्थान जो पहले डर से भरा हुआ था, अब सुरक्षित और शांति से भरा हुआ था।
समीर ने कहा, “कभी-कभी हमें अपनी जिज्ञासा और साहस का सामना करना पड़ता है। और जो लोग हमें डराते हैं, वे हमेशा अपने डर से बाहर नहीं निकल सकते। हमें हर डर का सामना करना चाहिए, क्योंकि जब हम उसे नकारते हैं, तो हम अपने भीतर की शक्ति को पहचान पाते हैं।”