बूढ़े हवेली का रहस्य

मधु और मोहन एक छोटे से गाँव में रहते थे। गाँव के बाहर एक पुरानी हवेली खड़ी थी, जो कई वर्षों से वीरान पड़ी थी। लोग कहते थे कि उस हवेली में कुछ अजीब घटित होता है। शाम होते ही हवेली से अजीब आवाजें आतीं, जैसे किसी ने चिल्लाया हो या कोई दरवाजे को जोर से खटखटाता हो।

मधु और मोहन हमेशा इस हवेली से डरते थे, लेकिन एक दिन उन्होंने तय किया कि वे इस रहस्य का पर्दाफाश करेंगे। एक रात, जब पूरा गाँव सो चुका था, वे दोनों हवेली की ओर बढ़े। हवेली के पास पहुँचते ही, एक ठंडी हवा ने उनका पीछा किया और उन्होंने महसूस किया कि हवेली में कोई न कोई रहस्य छिपा हुआ है।

हवेली के अंदर घुसते ही, मधु और मोहन को एक अजीब सी खामोशी का सामना करना पड़ा। दीवारों पर पुरानी तस्वीरें थीं, जिनमें चेहरों की आँखें जैसे उनकी ओर देख रही थीं। जैसे ही वे आगे बढ़े, उन्हें एक कमरे में हल्की सी आवाज़ सुनाई दी। आवाज़ धीरे-धीरे तेज होती गई, और कमरे के अंदर जाकर उन्होंने देखा कि एक पुरानी घड़ी की सूई उल्टी चल रही थी।

मोहन ने कहा, “यह घड़ी तो बहुत पुरानी लगती है, लेकिन इसकी सूई क्यों उल्टी चल रही है?”

मधु ने जवाब दिया, “शायद यह हवेली के रहस्य का हिस्सा है। हमें इसे और गहराई से देखना होगा।”

अगले दिन, वे दोबारा हवेली में गए। इस बार वे पूरी तरह तैयार थे। हवेली के भीतर उन्हें कई ऐसे चीजें मिलीं, जो सामान्य नहीं लगती थीं। दीवारों पर खून के धब्बे, फटी हुई किताबें और एक टूटा हुआ शीशा था। अचानक, मधु के कानों में एक कानफोड़ू आवाज आई। यह आवाज किसी औरत की थी, जो कह रही थी, “तुम मेरे पास क्यों आए हो?”

मधु और मोहन हड़बड़ी में पीछे हट गए, लेकिन उन दोनों के मन में सवाल था कि यह आवाज कहाँ से आ रही थी। वे दोनों अब पूरी तरह से आश्वस्त हो चुके थे कि हवेली में कुछ बहुत अजीब और डरावना हो रहा है।

इस बार, उन्होंने हवेली के तहखाने की ओर रुख किया। तहखाने में एक पुरानी लकड़ी की सीढ़ी थी, जो नीचे की ओर जाती थी। सीढ़ियों के नीचे पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहाँ एक अजीब सा गहरा अंधेरा था, जिससे डरना स्वाभाविक था। लेकिन फिर भी, उन्होंने हिम्मत जुटाई और अंधेरे में कदम रखा।

वहाँ एक पुराना संदूक पड़ा हुआ था। जब मोहन ने उस संदूक को खोला, तो उसमें एक पुरानी डायरी थी। डायरी में लिखा था:

“यह हवेली मेरे पिता की थी। वह एक अमीर व्यापारी थे, लेकिन एक दिन अचानक गायब हो गए। उनके बाद से यहाँ कुछ और हुआ…। उनके गायब होने के बाद, मैं और मेरी माँ यहाँ अकेले रह गए। एक दिन, जब मैंने यह हवेली छोड़ने की सोची, तो मेरी माँ ने मुझे चेतावनी दी कि इस हवेली से भागना नहीं चाहिए। वह मुझे बताती थीं कि इस हवेली में जो चीज़ बसी है, वह हमारी आत्माओं को कभी नहीं छोड़ सकती।”

यह पढ़कर दोनों चौंक गए। उस डायरी में एक और रहस्य था, जो हवेली की आत्मा के बारे में था। वह आत्मा जो अपनी मौत के बाद भी हवेली में बसी हुई थी।

आखिरकार, एक रात, जब वे हवेली में सोने का फैसला करते हैं, उन्हें अचानक महसूस हुआ कि हवेली में कुछ बहुत अलग हो रहा था। अचानक एक महिला की घबराई हुई आवाज आई, “यह मेरी जगह है… तुम नहीं रह सकते!”

मधु और मोहन ने यह महसूस किया कि यह वही आत्मा थी जो सालों से हवेली में बसी हुई थी। वे दोनों डर के मारे बेतहाशा भागने लगे। लेकिन जैसे ही वे दरवाजे तक पहुंचे, हवेली का दरवाजा अपने आप बंद हो गया।

अंत में, जब वे हवेली से बाहर निकलने में सफल हो गए, तो उन्होंने देखा कि हवेली का भूतिया अतीत अभी तक उनका पीछा कर रहा था। वे जान गए कि हवेली में बसी हुई आत्मा कभी नहीं मरेगी।

उनका दिल दहला हुआ था, और उन्होंने ठान लिया कि अब कभी उस हवेली में कदम नहीं रखेंगे। लेकिन, हवेली के उन अंधेरे कोनों में क्या रहस्य था, यह अभी तक एक राज़ बना हुआ है।

क्या आप कभी उस हवेली में कदम रखने की हिम्मत करेंगे?

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