लोहाघाट – मुक्ति कोठरी: एक भूतिया कहानी

लोहाघाट, उत्तराखंड का एक छोटा सा शहर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन यहां की एक जगह, मुक्ति कोठरी, अपने डरावने रहस्यों और खौ़फनाक घटनाओं के कारण लोगों के बीच एक दहशत का कारण बन गई है। यह जगह अब्बे बंगले के पास स्थित है और यहां की हवा में एक अजीब सी ठंडक और घना सन्नाटा छाया रहता है। लोग कहते हैं कि इस कोठरी में एक डॉक्टर की आत्मा भटकती है, जो अपनी मृत्यु के बाद भी इस स्थान से कभी मुक्त नहीं हो पाया।

डॉ. मोहन लाल का रहस्य

कहा जाता है कि लोहाघाट में एक समय एक डॉक्टर, डॉ. मोहन लाल, रहते थे। वह न केवल एक अच्छे चिकित्सक थे, बल्कि उनके पास एक अद्भुत शक्ति भी थी – वह मरीजों की मृत्यु की भविष्यवाणी कर सकते थे। यह गुण किसी विज्ञान से परे था। वह बिना किसी उपकरण के, केवल अपनी अनुभूति और ज्ञान से मरीजों की स्थिति का ठीक-ठीक आकलन कर लेते थे। लेकिन यह शक्ति उनके लिए एक बोझ बन गई थी। वह जितनी बार किसी की मौत की भविष्यवाणी करते, उतनी ही बार उनके भीतर का डर और निराशा बढ़ती जाती। धीरे-धीरे, वह अपने आप में सिमटते चले गए और लोगों से मिलना-जुलना कम कर दिया।

शहर में यह अफवाह फैलने लगी कि डॉ. मोहन लाल के पास मृत्युओं के बारे में भयानक जानकारी है। उनका यह कुख्यात गुण कुछ लोगों के लिए आशीर्वाद था, लेकिन अन्य के लिए यह अभिशाप। लोग उनकी मदद के लिए आते, लेकिन उनके साथ कुछ अजीब सा घटित होने लगता। एक दिन, डॉ. मोहन लाल ने एक मरीज की मृत्यु की भविष्यवाणी की और कहा कि वह मरीज अगले दिन सुबह तक नहीं बचेगा। जब वह सुबह के समय मृत पाया गया, तो सभी लोग हैरान रह गए। लोगों ने यह माना कि डॉ. मोहन की शक्ति वास्तविक है, और उनका डर और बढ़ गया।

लेकिन एक दिन, अचानक डॉ. मोहन की मौत हो गई। वह पूरी तरह से स्वस्थ थे, फिर भी उनकी मृत्यु हो गई। उनका निधन एक रहस्य बन गया। कहा जाता है कि उन्होंने अपने आप को मुक्ति कोठरी में बंद कर लिया था और फिर कभी बाहर नहीं आए। उनकी मृत्यु के बाद, यह स्थान और भी भयावह हो गया। अब्बे बंगले के इस कोने को “मुक्ति कोठरी” कहा जाने लगा, और लोग इस जगह से डरने लगे।

मुक्ति कोठरी की रहस्यमयी घटनाएँ

कुछ महीनों बाद, जब डॉ. मोहन की मौत के बाद लोग शोक मनाने के बजाय इस जगह से डरने लगे, एक नया परिवार लोहाघाट में आया। शर्मा परिवार ने तय किया कि वे अब्बे बंगले में रहने के लिए आएंगे। उन्हें इस स्थान के बारे में कुछ नहीं पता था, और जब उन्होंने मुक्ति कोठरी के बारे में सुना, तो यह केवल एक अफवाह लगी। शर्मा परिवार के सदस्य, प्रकाश शर्मा, एक डॉक्टर थे और उन्होंने सोचा कि यह सब केवल पुराने समय की अंधविश्वास है।

लेकिन जब उन्होंने खुद मुक्ति कोठरी में कदम रखा, तो वह अपने विचार बदलने लगे। शर्मा परिवार का बेटा, मोहित, को एक अजीब सी अनुभूति हुई। वह बार-बार कोठरी के पास जाता और वहां से निकलते समय उसकी आँखों में अजीब सी हलचल दिखती। एक दिन, मोहित ने कहा, “पापा, मुझे लगता है कि डॉक्टर मोहन की आत्मा मुझे देख रही है। वह मुझे बताना चाहता है कि मैं जल्द ही मरने वाला हूँ।” शर्मा जी ने इसे बच्चों का वहम समझा, लेकिन उनके भीतर एक अजीब सा डर बैठने लगा।

मुक्ति कोठरी में प्रवेश

एक रात, शर्मा परिवार को फिर से अजीब आवाजें सुनाई दीं। जैसे ही वे मुक्ति कोठरी के पास पहुंचे, एक डरावनी खामोशी छा गई। मोहित अचानक बिस्तर से उठकर कोठरी की ओर बढ़ने लगा। उसके शरीर में एक अजीब सी हलचल हो रही थी, जैसे वह किसी और ही शक्ति के प्रभाव में हो। प्रकाश शर्मा और उनकी पत्नी ने मोहित को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह कुछ कहता हुआ कोठरी के दरवाजे तक पहुँच गया। वह बुदबुदाया, “डॉ. मोहन, मैं जानता हूँ कि आप चाहते हैं कि मैं आपकी मौत का रहस्य सुलझाऊं।”

शर्मा जी को यकीन नहीं हो रहा था कि उनका बेटा ऐसा कैसे कह सकता था। मोहित के शब्दों ने शर्मा परिवार के मन में एक नया डर पैदा किया। क्या वाकई डॉ. मोहन की आत्मा मुक्ति कोठरी में है? क्या वह मोहित को अपनी मृत्यु का रहस्य बताना चाहता था?

आत्मा से संवाद

शर्मा परिवार ने अगली सुबह स्थानीय बुजुर्ग से बात की। बुजुर्ग ने बताया कि डॉ. मोहन की आत्मा मुक्ति कोठरी में बसी हुई है, और वह केवल उन लोगों को दिखाई देती है, जो उसकी मृत्यु के कारणों को जानने की कोशिश करते हैं। वह आत्मा किसी को भी शांति नहीं देती, जब तक कि उसका रहस्य सुलझ न जाए। बुजुर्ग ने बताया कि डॉ. मोहन की आत्महत्या के पीछे एक बड़ा राज़ छिपा था। वह हमेशा अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी करते थे, लेकिन कभी अपनी मौत के कारण को नहीं समझ पाए।

शर्मा परिवार ने यह तय किया कि वह इस रहस्य का पता लगाएंगे और डॉ. मोहन की आत्मा को शांति देंगे। उन्होंने मुक्ति कोठरी में प्रवेश किया और वहाँ के पुराने फर्नीचर, चित्रों और दस्तावेजों को खंगाला। अचानक, उन्हें डॉ. मोहन की एक पुरानी डायरी मिली। डायरी में लिखा था, “मैं जानता हूँ कि मेरी मृत्यु के बाद मेरी आत्मा भटकती रहेगी। मैं अब भी उस गहरे रहस्य को जानने की कोशिश कर रहा हूँ, जो मेरी मौत के पीछे था।”

आत्मा को शांति मिलती है

शर्मा परिवार ने इस डायरी को पढ़कर डॉ. मोहन की आत्मा को शांति देने के लिए प्रार्थना की। अचानक, कमरे में एक ठंडी हवा चली और एक हल्की सी चमक दिखाई दी। डॉ. मोहन की आत्मा ने आकर कहा, “अब मैं शांति से जा सकता हूँ। तुम सबका धन्यवाद।”

इसके बाद, मुक्ति कोठरी का वातावरण हल्का हो गया। शर्मा परिवार ने महसूस किया कि अब इस स्थान में डर और अंधेरा नहीं था। डॉ. मोहन की आत्मा को शांति मिल गई थी, और मुक्ति कोठरी अब एक सामान्य जगह बन चुकी थी।

कहानी का अंत

आज भी लोहाघाट में मुक्ति कोठरी का रहस्य बना हुआ है, लेकिन अब इसे डर की बजाय शांति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यह घटना शर्मा परिवार के लिए एक डरावना अनुभव था, लेकिन उन्होंने उस डर से बाहर निकल कर एक आत्मा को शांति दी। अब यह कहानी लोहाघाट के लोगों के बीच एक अद्भुत रहस्य के रूप में सुनाई जाती है, जो उनके मन में हमेशा के लिए बसी रहती है।

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