पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव में एक पुराना बाग था, जिसे “भूत बागन” के नाम से जाना जाता था। यह बाग किसी जमाने में बहुत खूबसूरत था, यहाँ फूलों की खुशबू से हवा महकती थी और बगिया के हर कोने में रंग-बिरंगे पक्षी चहचहाते थे। लेकिन वर्षों से, यह बाग डरावनी खामोशी में बदल चुका था। गाँववालों का कहना था कि यह बाग अब किसी भूतिया शक्ति से भरा हुआ है, और जो भी वहाँ जाता, वह कभी वापस नहीं आता।
किसी समय में, इस बाग के मालिक एक अमीर और प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, जिनका नाम ठाकुर देवव्रत था। ठाकुर बाबू की एक बेटी थी, जिसका नाम शारदा था। शारदा बहुत सुंदर और नर्मी थी। कहते थे कि ठाकुर बाबू ने शारदा का रिश्ता तय किया था, लेकिन एक रात शारदा अचानक गायब हो गई। कई दिनों तक गाँववालों ने उसकी तलाश की, लेकिन वह कभी नहीं मिली। कहते हैं कि शारदा की आत्मा अब उसी बाग में भटकती है, और वह अपने पिता के साथ हुई अनहोनी का बदला लेती है।
वर्षों बाद, एक शाम कुछ साहसी युवक और एक लड़की, मीरा, “भूत बागन” जाने का फैसला करते हैं। गाँव में सब लोग उन्हें चेतावनी देते हैं, लेकिन वे अपने डर को दरकिनार कर बाग की ओर बढ़ते हैं। जैसे ही वे बाग के पास पहुँचते हैं, उन्हें एक अजीब सी ठंडक का एहसास होता है। बाग की ओर जाने वाली सड़क बेहद संकरी और अंधेरी होती है। बाग में दाखिल होते ही उन्हें एक घना धुंआ घेर लेता है, जो धीरे-धीरे और घना होता जाता है।
मीरा और उसके साथी बाग के अंदर कदम रखते हैं। अचानक, बाग के किनारे से चिड़ियों की डरावनी चीखें सुनाई देती हैं, जैसे किसी ने उनका गला घोंट दिया हो। उनकी आवाज़ें हवा में गूंजती हैं, और ऐसा लगता है जैसे बाग की हर शाखा और पत्ते में कोई साया छुपा हो। बाग के बीचों-बीच एक पुरानी हवेली खड़ी होती है, जिसकी खिड़कियाँ अंधेरे में छिपी होती हैं, और दरवाजे पर जंग लग चुका होता है।
मीरा ने देखा, जैसे ही वे उस हवेली के पास पहुँचे, दरवाजे में एक जंगली सी महिला खड़ी थी। वह महिला बहुत दुबली-पतली और सफेद साड़ी में लिपटी हुई थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, और उसका चेहरा बिल्कुल फीका था, जैसे मृत शरीर से निकलकर कोई आत्मा आ रही हो। महिला की आँखें मीरा को घूर रही थीं, और उसकी मुस्कान भी बहुत डरावनी थी। “तुम यहाँ क्यों आए हो?” महिला ने धीमी आवाज़ में पूछा। मीरा ने डरते हुए उत्तर दिया, “हम सिर्फ देखने आए थे।”
महिला ने हंसी की एक गहरी आवाज़ निकाली, और अचानक वह हवा में गायब हो गई। युवक और मीरा चौंक गए। वे बिना कुछ बोले हवेली के अंदर घुसने की कोशिश करते हैं। जैसे ही वे अंदर कदम रखते हैं, एक अजीब सी गंध उनकी नथुनों में घुस जाती है, जो मरे हुए जानवर की तरह लगती है। बाग के बीच में एक पुराना कुआँ दिखाई देता है, जिसकी लकड़ी की सीढ़ियाँ अब भी वहां पड़ी होती हैं। एक गहरी आवाज़ सुनाई देती है, जैसे कुएं में कुछ गिरा हो।
मीरा और उसके साथी डर के मारे आसपास देखने लगते हैं। तभी कुएं से एक बुरी तरह सड़ी हुई महिला की हंसी आती है। यह आवाज़ इतनी भयावह होती है कि सभी का दिल रुक सा जाता है। अचानक, एक मटमैले हाथ कुएं के किनारे से बाहर आता है और मीरा की गर्दन को जकड़ लेता है। मीरा चीखती है, लेकिन उसकी आवाज़ घनी चुप्प में खो जाती है। जैसे ही वो महिला मीरा को खींचने की कोशिश करती है, अचानक बाग से अंधेरे साए बाहर आते हैं और उन्हें घेर लेते हैं।
उस महिला का चेहरा अब पूरी तरह से भूतिया रूप में बदल चुका था। उसकी आँखें खून से भरी हुई थीं और उसका चेहरा घिनौना और सड़ा हुआ था। उसकी दांतों में सड़न और गंध आ रही थी। मीरा के दोस्त डर के मारे दौड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन बाग में चारों ओर से कटी-फटी महिलाएँ और काले साए उनका पीछा करते हैं।
मीरा की आँखों के सामने वही महिला फिर से सामने आती है, और उसे एक अजीब से आवाज़ में कहती है, “तुम मेरी मदद नहीं कर सकते, अब तुम मेरी दुनिया में हो।” वह महिला अब पूरी तरह से अपने अंधेरे रूप में आ जाती है, और फिर वह खौ़फनाक हंसी के साथ गायब हो जाती है। मीरा की आँखों में भय की झलक रहती है, और उसी समय उसके साथियों के शरीर काले साए में डूब जाते हैं।
अगली सुबह, गाँव में लोग बाग के पास जाते हैं और उन युवकों को खोजते हैं, लेकिन वे कभी नहीं मिलते। बाग की ज़मीन पर खून के धब्बे पाए जाते हैं, और हवा में उस महिला की खौ़फनाक हंसी गूंजती है। गाँववालों का कहना है कि अब भी वह बाग शारदा की आत्मा से भरा हुआ है, जो कभी भी किसी को अपने जाल में फंसा सकती है।
अब उस बाग के पास कोई नहीं जाता। लोग कहते हैं कि बाग में रात के समय कुछ अवशेष और जख्म दिखते हैं, जो किसी की घातक मौत की कहानी कहते हैं। बाग की हवाएँ, अब भी अजनबियों को अपनी ओर खींचने की कोशिश करती हैं।