पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव में, एक विशाल और भव्य हवेली खड़ी थी। यह हवेली अपने समय में बहुत ही खूबसूरत और आलीशान थी, लेकिन अब इसे “भूत बंगला” के नाम से जाना जाता था। हवेली के मालिक, ठाकुर बाबू, एक दिन अचानक गायब हो गए। कोई नहीं जानता था कि वह कहाँ गए, लेकिन उसके बाद हवेली में अजीब घटनाएँ शुरू हो गईं। हवेली की दीवारों पर धीरे-धीरे काई चढ़ने लगी, छत से टपकते पानी के साथ खौ़फनाक आवाज़ें सुनाई देने लगीं। हर रात हवेली से चीखों की आवाज़ें आती थीं, जो गांववालों के दिलों को दहला देती थीं। कहते थे कि ठाकुर बाबू की आत्मा अब हवेली में भटकती है, और हर रात वह किसी नई बुरी ताकत को जगाता है।
एक अंधेरी रात, कुछ साहसी युवक हवेली में घुसने का फैसला करते हैं। वे सुन चुके थे कि हवेली में भूत-प्रेत का बसेरा है, लेकिन उनके दिल में साहस था कि वे इसका सामना करेंगे। उन्होंने कहा, “अगर कोई भूत है, तो हम उसका सामना करेंगे।” डरते-डरते वे हवेली के बड़े और घने दरवाजे तक पहुँचे। दरवाजे की धूल भरी लकड़ी ने जैसे ही आवाज़ की, हवा के हल्के झोंके के साथ दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया। अंदर अंधेरा और गहरा था, और हवेली का माहौल बिल्कुल सूनसान और खौ़फनाक था।
जैसे ही वे कदम अंदर बढ़ाते हैं, उनके पैर के नीचे लकड़ी की फर्श से तेज़ आवाज़ आती है, मानो कोई उनके पीछे आ रहा हो। सर्द हवा उनके चेहरे पर लगती है, जैसे किसी ने उन्हें गहरे जंगल में छोड़ दिया हो। हवेली के अंदर अजीब सी गंध आ रही थी, जैसे किसी पुरानी कब्र से। उनके दिलों में घबराहट की लहर दौड़ने लगी। पहले कमरे में एक पुराना कांसे का झूमर टिमटिमा रहा था, और उसकी रोशनी में दीवारों पर पड़ी पुरानी पेंटिंग्स की चेहरे जैसे बदले हुए थे। वे सभी डर से सहमे हुए थे, लेकिन फिर भी उन्होंने आगे बढ़ने की हिम्मत दिखाई।
एक युवक, रणवीर, ने पहले कमरे की ओर कदम बढ़ाया। जैसे ही उसने दरवाजे को खोला, भीतर से गहरी खांसने की आवाज़ आई। कमरे में घना अंधेरा था, लेकिन फिर भी किसी के शरीर की हलचल महसूस हो रही थी। अचानक, झूमर की रोशनी तेज़ हो जाती है, और कमरे में एक कटा-फटा चेहरा दिखाई देता है, जो दीवार के पास खड़ा था। रणवीर की सांसें रुक जाती हैं, उसकी धड़कन तेज़ हो जाती है, और वह उस चेहरे को ध्यान से देखने लगता है। चेहरा ठाकुर बाबू का था, लेकिन उसकी आँखें खून से सनी हुई थीं और होंठों पर एक भयानक हंसी थी। वह चेहरा धीरे-धीरे रणवीर की ओर बढ़ने लगता है।
रणवीर की आँखों में डर समा जाता है। वह कुछ बोलने की कोशिश करता है, लेकिन शब्द उसके गले में ही अटक जाते हैं। फिर वह डर के मारे कांपते हुए कमरे से बाहर भागता है, और जैसे ही वह कमरे से बाहर निकलता है, वह देखता है कि बाकी युवक भी डर के मारे इधर-उधर भाग रहे हैं। अचानक हवेली के चारों ओर एक तेज़ आवाज़ गूंजती है। हवेली की दीवारों से रहस्यमय रोशनी निकलने लगती है, और एक ठंडी हवा का झोंका उनकी गर्दन तक पहुँच जाता है। उनके शरीर में कंपकंपी दौड़ जाती है।
वह वापस पलटते हैं, लेकिन बाहर जाने का रास्ता बंद हो चुका होता है। दरवाजे का पल्ला गिर जाता है, और हवेली के अंदर अजीब तरह की बत्तियाँ जलने लगती हैं, जैसे कोई उनका पीछा कर रहा हो। फिर अचानक, उन्होंने सुनी एक खौ़फनाक हंसी। यह हंसी हवेली के हर कोने से आ रही थी। फिर उन्होंने देखा कि एक और आकृति उनके सामने खड़ी है – यह आकृति ठाकुर बाबू की ही थी, लेकिन अब वह पूरी तरह से बदल चुकी थी। उसकी त्वचा झुर्रियों से भरी हुई थी, और उसकी आँखें लाल थीं। वह एक खौ़फनाक अंदाज़ में हँसते हुए कहता है, “तुम सब यहाँ क्यों आए हो?”
युवकों के दिलों में डर की लहर दौड़ जाती है। उनका शरीर ठंडा पड़ जाता है, और जैसे ही वे पलटते हैं, उन्हें हवेली के अंदर और भी कटी-फटी आकृतियाँ दिखाई देती हैं। ये आकृतियाँ धीरे-धीरे उनके पास आ रही थीं। हवेली का माहौल और भी डरावना होता जा रहा था, जैसे कुछ अनकही शक्तियाँ उनके साथ खेल रही थीं।
रणवीर और उसके दोस्त जोर-जोर से चिल्लाने लगते हैं, लेकिन हवेली के अंदर जैसे हर आवाज़ गुम हो जाती है। वे समझ नहीं पाते कि हवेली में क्या हो रहा है, लेकिन इतना तय था कि हवेली ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया था। वह कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे। जैसे ही वे और गहरे अंदर बढ़ते हैं, उन्होंने देखा कि हवेली की दीवारें हिल रही थीं, और आकाश में अंधेरा घना होता जा रहा था। हवेली अब एक जाल बन चुकी थी, जिसमें वे पूरी तरह से फँस चुके थे।
जब तक वे बाहर निकलने की कोशिश करते हैं, हवेली की छत से एक अजीब सी चीख निकलती है। यह चीख किसी मनुष्य की नहीं, बल्कि किसी बुरी ताकत की थी। एक के बाद एक युवक उस हवेली में गायब हो जाते हैं, और जब गाँववालों ने सुबह के वक्त हवेली में जाकर देखना चाहा, तो वहाँ केवल खून के धब्बे और टूटी हुई दीवारें थीं।
आज भी “भूत बंगला” के पास से कोई नहीं गुजरता। कहते हैं कि हवेली के अंदर ठाकुर बाबू की आत्मा अब भी भटक रही है, और जो भी उस हवेली में प्रवेश करता है, वह कभी बाहर नहीं आता। हवेली की दीवारों पर अब भी लोगों के डर के निशान मौजूद हैं।