भूत बंगला की कहानी

(रात का समय। एक ग्रुप दोस्तों का एक कार में यात्रा कर रहा है। वे शहर के बाहर एक पुराने, वीरान बंगले की तरफ जा रहे हैं।)

रवि: (उत्साहित होकर) यार, तुम लोग को याद है वो पुराना भूत बंगला? मान लो, आज रात हम वहां जाकर देखते हैं!

सिमरन: (डरी हुई) रवि, तू पागल हो गया है! तुझे पता है न, वो जगह कितनी खौ़फनाक है? सुना है वहां कोई भूत रहता है।

रवि: (हंसते हुए) तेरे दिमाग में डर का कोई बटन लगा हुआ है क्या? वो बस पुरानी कहानियां हैं। कोई भूत-वूत नहीं होता!

अजय: (उत्सुक होकर) हां यार, रवि बिलकुल सही कह रहा है। मैं तो बस इस एडवेंचर के लिए एक्साइटेड हूं! सिमरन, तुम बेकार में डर रही हो।

सिमरन: (नर्वस होकर) मैं डर नहीं रही हूं, बस ये सोच रही हूं कि अगर कुछ हो गया तो?

रवि: (उसका मजाक उड़ाते हुए) क्या कुछ हो जाएगा? डर के आगे जीत है, सिमरन! (हंसता है) चलो, ये देखते हैं क्या होता है।

(वे पुराने बंगले तक पहुंचते हैं। रवि दरवाजा खोलते हुए एक चीख के साथ अंदर घुसता है।)

अजय: (चारों ओर देखकर) यार, ये तो बहुत पुराना लग रहा है। कोई यहां कब से नहीं आया है।

सिमरन: (अजय का हाथ पकड़ते हुए) मुझे ये जगह बहुत अजीब लग रही है। लगता है कुछ गलत होने वाला है।

रवि: (आत्मविश्वास से) कोई बात नहीं, कुछ नहीं होगा। बस थोड़ी सी पुरानी आवाजें और इतनी सी बात।

अजय: (मुस्कुराते हुए) रवि, तू सच में बिंदास है, यार। चलो, देखते हैं अंदर क्या है।

सिमरन: (फुसफुसाते हुए) मैं ये नहीं कर सकती। मुझे वापस जाना है। क्या तुम दोनों मुझसे प्यार करते हो? अगर तुम दोनों को कुछ हो गया तो?

अजय: (हंसते हुए) सिमरन, ये सब बस दिमागी बात है। तुम रिलैक्स हो जाओ।

(बंगले के अंदर। लाइट्स बार-बार झपक रही हैं। माहौल भारी हो रहा है।)

सिमरन: (काँपते हुए) यार ये लाइट्स क्यों झपक रही हैं? और ये हवा क्यों चल रही है, बहुत स्ट्रेंज लग रहा है।

रवि: (आत्मविश्वास से) कोई बात नहीं, कुछ नहीं होगा। बस डर के आगे जीत है!

(अचानक, एक तेज आवाज आती है, जैसे कुछ गिरा हो।)

सिमरन: (चिल्लाते हुए) क-क-क्या था ये? मुझे कुछ दिखायी दिया! कोई था!

अजय: (पलटते हुए) क-क-क्या था? रवि, ये तुमने किया?

रवि: (डरे हुए) मैं… मैं कुछ नहीं किया। मुझे भी समझ नहीं आ रहा।

(कैमरा एक पुरानी पेंटिंग पर जूम करता है, जिसमें एक छाया हिलती हुई नजर आती है।)

सिमरन: (डरी हुई) ये… ये जो छाया है… वो किसकी है?

रवि: (नजदीक जाकर) मुझे भी लगता है कुछ गलत हो रहा है। चलो, हम वापस चलते हैं।

(वे दरवाजे के पास जाते हैं, लेकिन दरवाजा अचानक बंद हो जाता है।)

अजय: (घबराते हुए) ये क्या हो गया? दरवाजा बंद हो गया!

सिमरन: (आँसू बहाते हुए) हम फंस गए! हम सब मरने वाले हैं!

रवि: (काँपते हुए) ये… ये कुछ तो कुछ गलत हो रहा है! हम वैसे भी इस जगह को छोड़ नहीं पाएंगे!

(अचानक, लाइट्स पूरी तरह से चली जाती हैं और डरावनी फुसफुसाहटें तेज हो जाती हैं।)

सिमरन: (रोते हुए) यार मुझे कुछ नहीं दिखायी दे रहा… सिर्फ आवाजें ही आवाजें हैं!

रवि: (डरे हुए, चारों ओर देखता हुआ) ये सब… ये सब मेरे लिए नहीं था! ये… ये कुछ और था!

अजय: (चिल्लाते हुए) तुम सब… तुम सब मरने वाले हो!

(लाइट्स फिर से झपकती हैं और एक भूतिया आकृति सामने आती है।)

सिमरन: (चिल्लाते हुए) क-क-कोई है! क-कोई है!

अजय: (गुस्से में) ये… ये क्या है?! क-क-कोई आया है!

रवि: (डरे हुए) हम सब… हम सब खत्म हो गए!

(अचानक, एक तेज़, डरावना हंसी गूंजती है। कैमरा बाहर से जूम आउट करता है, और भूतिया आकृति पूरी तरह से सामने आती है। समूह अंदर फंसा हुआ है, बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं।)

सिमरन: (फुसफुसाते हुए) ये हमारे लिए है। हम… हम यहां ही मरेंगे।

अजय: (भूत को देखकर) क्या… क्या तुम हमें मारने आए हो?

भूत: (गहरी, डरावनी आवाज में) तुम सब यही रहोगे, हमारे साथ। तुम जैसे लोग कभी नहीं जा पाएंगे।

(घबराहट में भरपूर, समूह का डर अब चरम पर पहुंच चुका है। सभी कमरे में डरे हुए हैं।)

रवि: (काँपते हुए) क्या… क्या हम यहां कभी नहीं निकल पाएंगे?

सिमरन: (सहमी हुई) यह… यह क्या था जो हम ने देखा? वो… वो भूत…!

अजय: (घबराए हुए) यह सब क्या हो रहा है? क्या… क्या वह हमें कुछ करने वाला है?

(अचानक, एक आवाज सुनाई देती है, जैसे किसी की फुसफुसाहट हो रही हो।)

अजय: (जोर से) तुम लोग… तुम लोग सुने हो? यह आवाज कहां से आ रही है?

सिमरन: (रोते हुए) मुझे… मुझे डर लग रहा है! मैं नहीं रह सकती इस जगह पर! ये जगह मुझे खत्म कर देगी!

रवि: (Nervously) सिमरन, शांत हो जाओ! हम बाहर निकलने का रास्ता ढूंढेंगे। डरने से कोई फायदा नहीं होगा!

(उनका ध्यान अचानक कमरे के एक कोने में गिर रहे खटर-पटर पर जाता है।)

सिमरन: (हैरान होकर) देखो! वहां कुछ गिरा है!

अजय: (आगे बढ़ते हुए) क्या गिरा है? मुझे देखो… कोई तो बताए कि यह क्या हो रहा है!

रवि: (बहुत डरते हुए) ये क्या है? यहाँ तो कुछ नहीं था!

(वो एक पुरानी किताब का पन्ना उठाते हैं, उस पर कुछ अजीबोगरीब लकीरें और शब्द लिखे होते हैं।)

सिमरन: (घबराते हुए) ये क्या है? क्या यह कोई जादू है?

अजय: (गहरी आवाज में) ये कुछ और ही है, सिमरन। कुछ भी सामान्य नहीं है। हमें तुरंत यहां से निकलना होगा!

(तभी अचानक पूरे कमरे में अंधेरा छा जाता है। एक बार फिर से भूतिया आकृति सामने आ जाती है।)

रवि: (चिल्लाते हुए) नहीं! नहीं! हम… हम क्या करें?!

(भूतिया आकृति की आवाज गूंजती है।)

भूत: (खौ़फनाक आवाज में) तुमने हमारी जगह पर कदम रखा है। अब तुम्हें हमसे छुटकारा नहीं मिलेगा। तुम कभी नहीं भाग पाओगे!

सिमरन: (सहमी हुई) क्या… क्या ये हमें मारने आया है?

अजय: (घबराया हुआ) नहीं! हम मर नहीं सकते! हम बाहर निकलेंगे!

(भूत की आकृति धीरे-धीरे पास आ रही है, और उसके पास अंधेरे में डूबे हुए चेहरे नजर आ रहे हैं।)

रवि: (बेहद डरते हुए) य-यह… यह क्या हो रहा है? यह किसी का सपना नहीं हो सकता!

(भूत अचानक जोर से हंसता है, और पूरा बंगला खौ़फनाक आवाजों से भर जाता है।)

भूत: (धुंधली आवाज में) तुम्हारे डर का समय अब खत्म हो चुका है। अब तुम हमारे साथ हमेशा रहोगे… हमेशा के लिए…

(समूह अब एक साथ इकट्ठा हो जाता है, और वे एक दूसरे के साथ सख्त पकड़े हुए हैं।)

सिमरन: (जोर से चिल्लाते हुए) हमें कुछ करना होगा! अगर हम एक साथ नहीं लड़े तो हम कभी नहीं निकल पाएंगे!

अजय: (दृढ़ आवाज में) सही कहा तुमने, सिमरन! हमें जो भी करना होगा, एक साथ करना होगा।

रवि: (नर्वस होकर) लेकिन यह भूत तो हमें जान से मारने की धमकी दे रहा है! हमें एक प्लान बनाना होगा!

(फिर से अंधेरा बढ़ता है और एक डरावनी चीख सुनाई देती है।)

सिमरन: (काँपते हुए) यह… यह कुछ नहीं है! हम… हम मरने वाले हैं!

(भूत अचानक एक और बार सामने आता है और सभी को एक साथ घेर लेता है।)

भूत: (घृणित आवाज में) तुमने हमारी शांति भंग की है। अब तुमसे कभी छुटकारा नहीं मिलेगा!

(समूह घबराया हुआ है, लेकिन वे फिर भी एक साथ खड़े होते हैं।)

अजय: (संगठित होकर) अब हम डरने वाले नहीं हैं! हम चाहे जो हो, हम इस जगह से बाहर निकलेंगे!

रवि: (हिम्मत जुटाते हुए) हम सब एक साथ हैं! कुछ भी हो, हम हारेंगे नहीं!

(अचानक, भूत की आकृति एक भयानक रूप में बदल जाती है और पूरी तरह से झपकती हुई लाइट्स के साथ नष्ट हो जाती है।)

(अंधेरा बढ़ चुका है, और बंगला अब पूरी तरह से खौ़फनाक माहौल में डूब चुका है। सबके चेहरे पर डर और घबराहट साफ दिख रही है।)

रवि: (घबराते हुए) यह… यह कुछ सही नहीं हो रहा! हम इस जगह से बाहर क्यों नहीं जा पा रहे?

सिमरन: (काँपते हुए) हमारी मदद कौन करेगा? यह भूत हमारे साथ क्या चाहता है?

अजय: (दृढ़ता से) हम क्या डरेंगे? अब हम जो भी करेंगे, हम एक साथ करेंगे! हमें एक रास्ता ढूंढना होगा!

(तभी एक भयंकर चिल्लाहट सुनाई देती है, और सभी चौकन्ने हो जाते हैं।)

सिमरन: (आँसु भरी आवाज में) यह… यह क्या है? भूत की आवाज और भी डरावनी होती जा रही है!

रवि: (गहरी सांस लेते हुए) हमें उस भूत का सामना करना होगा! अगर हम इसे रोकने में कामयाब नहीं हुए तो हम यहीं रह जाएंगे।

(भूत धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ता है, और उनके चारों ओर एक गहरा साया फैलने लगता है।)

भूत: (गुस्से में) तुम लोग हमारी शांति में खलल डालने आए हो। अब तुम कभी नहीं निकलोगे। तुम सब मेरी गिरफ्त में हो!

अजय: (सख्त होकर) हम तुमसे डरने वाले नहीं हैं! तुम्हारी ताकत से हम नहीं डरेंगे!

सिमरन: (जोर से) हां! अगर हम डरेंगे तो हम कभी नहीं निकल पाएंगे! हम क्या करें?

रवि: (चुपचाप सोचते हुए) कुछ करना होगा! हमें उस पुरानी किताब के बारे में सोचना होगा। उसमें कुछ तो होगा जो हमें बचा सकता है।

अजय: (आगे बढ़ते हुए) अगर उस किताब में कुछ है, तो हमें उसे ढूंढना होगा! और अगर हम किताब का सही इस्तेमाल करते हैं तो शायद हम इसे खत्म कर सकें!

(वे तीनों किताब को ध्यान से खोलते हैं और उसकी पुरानी पंक्तियों को पढ़ने की कोशिश करते हैं।)

रवि: (किताब को पढ़ते हुए) यह देखो! इस किताब में लिखा है कि भूत को हराने का तरीका एक स्पेशल मंत्र है, जो तभी काम करता है जब हम सभी एक साथ उसे बोलें और उसका विश्वास तोड़ दें!

सिमरन: (घबराए हुए) क्या… क्या हम यह मंत्र सही तरीके से बोल पाएंगे?

अजय: (आश्वस्त होकर) हमें और कोई रास्ता नहीं दिखता! अगर हम इसे सही से बोलते हैं तो हम शायद बच सकते हैं!

रवि: (निर्णायक होकर) ठीक है! हम यह करेंगे! सब ध्यान लगाओ और मेरे साथ इस मंत्र को बोलो!

(सभी एक साथ मंत्र बोलते हैं, और भूत की हंसी एक जोरदार गूंज में बदल जाती है।)

(भूत अचानक चिल्लाता है और उसका रूप डरावने ढंग से बदलने लगता है। वह हिंसक और भयंकर नजर आता है।)

भूत: (कानफोड़ू आवाज में) तुम लोग नहीं बच सकते! तुम सब की ताकत कमज़ोर है!

रवि: (दमदार आवाज में) नहीं! हमारी ताकत सिर्फ हमारी एकता में है! अब हम तुमसे हारने नहीं वाले!

सिमरन: (घबराते हुए) क्या… क्या हम कुछ कर पाएंगे?

अजय: (कभी न हार मानते हुए) हम जितना भी डरें, अगर हम यह मंत्र नहीं बोलते, तो यह भूत हमें छोड़ने वाला नहीं है!

(सब एक साथ मंत्र बोलते हैं, और अचानक भूत की गुस्से से भरी आवाजें बंद हो जाती हैं। सभी का ध्यान भूत के अंतिम रूप पर होता है।)

भूत: (रिरियाते हुए) नहीं! तुम… तुम मुझे नहीं रोक सकते! मैं… मैं हमेशा रहेगा!

(फिर अचानक भूत का रूप धुंधला होने लगता है, और वह धीरे-धीरे गायब होने लगता है।)

सिमरन: (आश्चर्यचकित होकर) क्या… क्या हम बच गए?

अजय: (आशा की एक हल्की लहर के साथ) हां! हमें जीत मिली!

रवि: (संतुष्ट होकर) देखो, हमें डर से बाहर आकर एकजुट होकर लड़ने का सही रास्ता मिला। अब हम यहां से निकल सकते हैं!

(जैसे ही भूत गायब होता है, बंगले की दीवारें फिर से अपने पुराने रूप में लौट आती हैं, और हवा की आवाज़ें शांत हो जाती हैं।)

सिमरन: (साँस छोड़ते हुए) हम… हम जिंदा हैं!

अजय: (मुस्कुराते हुए) हां! हम बच गए! अब हम इस जगह से बाहर जाएंगे!

रवि: (हँसते हुए) और इस भूतिया बंगले को कभी नहीं देखेंगे!

(वे तीनों बाहर की तरफ बढ़ते हैं और बंगले से निकलने के बाद, उनकी आँखों में राहत और संतुष्टि की भावना होती है।)

(अचानक, पीछे से फिर एक हलकी सी हंसी सुनाई देती है।)

सिमरन: (घबराते हुए) यह… यह क्या था?

रवि: (मुस्कुराते हुए) डर को छोड़, हम अब पहले से भी मजबूत हो चुके हैं। हम यह जानते हैं कि हम कभी भी डर से नहीं भाग सकते!

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