एक छोटे से गांव के पास घना जंगल और एक पुराने खंडहर जैसे बंगले के पास खड़ीं पेड़, जो डरावनी आवाज़ें निकालते हैं। वह बंगला “भूत बंगला” के नाम से जाना जाता है।
आरव – एक साहसी और रोमांच प्रेमी लड़का।
आरव – एक साहसी और रोमांच प्रेमी लड़का।
अंकल रमेश – गांव के बुजुर्ग, जो उन दोनों को इस बंगले के बारे में चेतावनी देने वाले हैं।
आरव (उत्साहित होकर):
“प्रिया, क्या तुमने सुना है? इस जगह पर कई साल पहले एक परिवार रहता था, जो अचानक गायब हो गया। लोग कहते हैं कि इस बंगले में कुछ अजिब बात है। आज हम जानते हैं कि ये सिर्फ एक कहानी है!”
प्रिया (चिंतित होकर):
“क्या तुम पागल हो गए हो, आरव? सब कहते हैं कि ये जगह भूतिया है। यह बंगला नहीं, मौत का घर है।”
आरव (हंसते हुए):
“तुम डर रही हो ना? कुछ नहीं होगा! देखो, हम जल्दी से अंदर जा कर देखेंगे और फिर घर लौट आएंगे। कोई बुरी शक्ति नहीं है।”
दोनों साहस के साथ बंगले की ओर बढ़ते हैं। जैसे ही वे बंगले के पास पहुंचते हैं, हवा अचानक तेज़ हो जाती है। पेड़ अपने आप झूलने लगते हैं, जैसे वे कोई बुरी चेतावनी दे रहे हों।
अंकल रमेश (तभी सामने आते हुए, दोनों का रास्ता रोकते हुए):
“आरव! तुमने यह क्या किया? इस बंगले का एक अंधकारमय इतिहास है। जो यहां आया, वो वापस नहीं आया। लोग कहते हैं, यहां एक आत्मा बसती है, जो सबको अपनी चपेट में ले लेती है। मैंने जो सुना है, वो मैं तुमसे नहीं कह सकता, लेकिन इस जगह में घुसने का मतलब है, खुद को मौत के मुँह में डालना।”
आरव (मुस्कुराते हुए):
“अंकल, आप तो पुराने ख्यालों में जी रहे हैं। यह सब सिर्फ अफवाहें हैं।”
प्रिया (सहमते हुए):
“लेकिन अंकल रमेश की बातों में कुछ तो सच्चाई हो सकती है। मैं नहीं चाहती कि हम इस बंगले में जाएं।”
अंकल रमेश (गंभीर स्वर में):
“तुम दोनों मेरी बात समझ नहीं रहे हो, लेकिन जब यह तुम्हें खुद एहसास होगा, तब तुम मेरे शब्दों को याद करोगे।”
बंगला पुराना और वीरान पड़ा हुआ है। दीवारों पर चिपके पुराने चित्र, जंग लगे फर्नीचर, और एक गहरी सन्नाटे वाली खामोशी का माहौल। दरवाजे का लकड़ी का पुल लगभग टूट चुका है। आरव और प्रिया अंदर कदम रखते हैं।
आरव (मुस्कुराते हुए):
“देखो, यह तो बस एक पुरानी इमारत है। हमें डरने की जरूरत नहीं।”
प्रिया (काँपते हुए):
“आरव, मुझे बहुत डर लग रहा है। यहां का माहौल ठीक नहीं है।”
जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते हैं, अचानक किसी अज्ञात शक्ति से हवा तेज़ हो जाती है, और पुरानी खिड़कियों से घबराहट भरी आवाजें आने लगती हैं। अचानक, एक दरवाजा खुद ही बंद हो जाता है।
प्रिया (सहमी हुई):
“यह क्या था, आरव? दरवाजा अचानक बंद हो गया।”
आरव (नर्वस हंसी के साथ):
“बस, हवा का असर होगा। तुम चिंता मत करो।”
लेकिन प्रिया के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। वह चारों ओर देख रही थी, और उसे लग रहा था जैसे कोई छाया उनकी नज़रें देख रही हो।
वे एक लंबे और संकरे गलियारे में दाखिल होते हैं, जहां दीवारों पर भूतिया चित्र लगे होते हैं। एक चित्र, जिसमें एक औरत की आंखें बिल्कुल आरव और प्रिया का पीछा करती हैं, उनकी हर हलचल पर नजर रख रही होती हैं।
प्रिया (घबराई हुई):
“आरव, देखो! वह चित्र! उसकी आँखें हमें फॉलो कर रही हैं!”
आरव (हंसी में):
“तुम्हारी आँखें धोखा खा रही हैं, प्रिया। वह बस एक पुरानी पेंटिंग है।”
लेकिन तभी गलियारे के अंत से आ रहे कदमों की आवाज सुनाई देती है, जो धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। अचानक, सामने एक महिला सफेद साड़ी में खड़ी होती है। उसका चेहरा उसके लंबे बालों से ढका होता है।
आरव (चौंकते हुए):
“तुम… तुम कौन हो?”
महिला धीरे-धीरे सिर उठाती है और उसकी आँखें पूरी तरह से खाली होती हैं। उसकी आवाज धीमी और गहरी होती है।
महिला (भूतिया आवाज में):
“तुमने जो कदम उठाया है, उसे वापस ले लो। यह जगह तुम्हारा अंतिम स्थान होगी। तुम्हारी आत्माएं अब हमारी हैं।”
प्रिया (डरी हुई):
“आरव, हम फंस गए हैं! हमें यहां से बाहर निकलना होगा!”
आरव (सहमा हुआ, लेकिन फिर भी साहस दिखाते हुए):
“प्रिया, तुम घबराओ मत। हम बाहर निकल सकते हैं। हम किसी से नहीं डरने वाले।”
लेकिन जैसे ही वे दौड़ने लगते हैं, गलियारा अजीब तरह से लंबा और लंबा होता जाता है। दरवाजे और खिड़कियां गायब हो जाती हैं, और अंधेरे में चारों ओर से हंसी और चीखें सुनाई देती हैं।
वे एक गहरे कमरे में पहुंचते हैं, जहां दीवारों पर और भी भूतिया चित्र लगे होते हैं। कमरे के बीच में एक बड़ा शीशा है। जब वे उसमें देखते हैं, तो उन्हें अपनी ही परछाई दिखती है, लेकिन उनकी परछाई का चेहरा बदल चुका होता है।
प्रिया (रोते हुए):
“आरव, देखो! यह क्या हो रहा है? हमारी परछाई में कुछ तो गड़बड़ है!”
आरव (घबराते हुए):
“यह सब सच नहीं हो सकता! हमें किसी भी हाल में बाहर निकलना होगा।”
लेकिन तभी, अंकल रमेश का चेहरा अचानक शीशे में दिखता है। उसकी आँखें भरी हुई होती हैं जैसे वह मदद की गुहार कर रहा हो।
अंकल रमेश (मनोविकृति के साथ):
“यह जगह तुम्हारी आत्मा को अपनी चपेट में ले लेगी। तुम कभी बाहर नहीं जा सकोगे।”
प्रिया और आरव का दिल तेज़ी से धड़कने लगता है। उनके चारों ओर आवाजें गूंजने लगती हैं, जैसे कोई उन्हें घेरने की कोशिश कर रहा हो।
वे दौड़कर दरवाजे की ओर बढ़ते हैं, लेकिन दरवाजा नहीं खुलता। अचानक, सफेद साड़ी वाली महिला फिर सामने आ जाती है, और उसके साथ कई अन्य भूतनी भी दिखाई देती हैं।
महिला (सुनामी जैसी आवाज में):
“तुम हमारी जाल में फंस चुके हो। अब तुम कभी बाहर नहीं जा पाओगे!”
आरव (साहसिकता से):
“हम भाग कर जाएंगे! मुझे कोई नहीं रोक सकता!”
आरव उस पुराने तेल के दीपक को उठाता है और उसे महिला की ओर फेंकता है। दीपक फटकर जलने लगता है और महिला चीखते हुए धुएं में समा जाती है।
आखिरकार, दरवाजा खुलता है और वे बाहर निकल जाते हैं। लेकिन जैसे ही वे बाहर निकलते हैं, एक गहरी आवाज़ सुनाई देती है:
महिला (धुंधली आवाज में):
“तुम दोनों कहीं नहीं जा सकते। तुम हमेशा मेरे साथ रहोगे।”
आरव और प्रिया दौड़ते हुए गांव की ओर लौटते हैं, लेकिन उनके सिर में अब भी वह डर और आवाजें गूंज रही होती हैं।
आरव और प्रिया, डर के मारे कांपते हुए, गांव की ओर दौड़ते हैं। उनके दिलों की धड़कन बहुत तेज़ हो चुकी है। उनके पैरों में थकावट हो चुकी थी, लेकिन वे रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। दोनों जल्दी से गांव की सीमा में दाखिल होते हैं।
प्रिया (सांसों के साथ):
“हम बच गए… हम बच गए आरव! अब मुझे लगता है कि हम सुरक्षित हैं।”
आरव (घबराए हुए):
“क्या तुम सच में समझती हो, प्रिया? मुझे नहीं लगता कि हम पूरी तरह से बच पाए हैं। उस महिला की आवाज… वह हमें छोड़ने वाली नहीं है।”
तभी, अचानक एक कड़क आवाज़ सुनाई देती है, जैसे कोई बहुत दूर से पुकार रहा हो।
अजीब आवाज (दूर से गूंजती हुई):
“तुम दोनों को अब छोड़ नहीं सकता। तुम दोनों मुझे अपनी चपेट में लाए हो।”
आरव और प्रिया घबराते हुए पीछे मुड़ते हैं। गांव के बाहर से वह महिला और अन्य भूतनियां धीरे-धीरे बाहर निकलने लगती हैं।
प्रिया (डरी हुई):
“आरव! वह… वह फिर आ गई है! यह क्या हो रहा है?”
आरव (सहमे हुए, लेकिन साहस दिखाते हुए):
“हमने क्या किया है प्रिया? हमें जल्दी से कुछ करना होगा। नहीं तो हम भी उनका हिस्सा बन जाएंगे।”
आरव और प्रिया, गांव के बीचोंबीच एक पुराने मंदिर में घुस जाते हैं। वह सोचते हैं कि शायद मंदिर में कुछ शक्ति हो सकती है, जो उन्हें बचा सकती है। मंदिर की दरवाजे की लकड़ी की चौखट इतनी पुरानी थी कि उसे खोलने के लिए आरव को काफी संघर्ष करना पड़ा।
प्रिया (सहमी हुई):
“यह मंदिर बिल्कुल वीरान है, आरव। यहां कोई नहीं है, क्या हम सुरक्षित रहेंगे?”
आरव (गंभीर स्वर में):
“मुझे नहीं पता, प्रिया। लेकिन हमें कोई रास्ता तो निकालना ही होगा। मुझे लगता है कि इस मंदिर में कुछ ऐसा है, जो हमें उस भूतिया ताकत से बचा सकता है।”
वे मंदिर के अंदर घुसते हैं। पुरानी दीवारों पर बहुत सारी उकेरी हुईं भूतिया तस्वीरें हैं। जैसे ही वे अंदर जाते हैं, मंदिर के दरवाजे खुद-ब-खुद बंद हो जाते हैं।
प्रिया (सहमी हुई):
“यह… यह क्या हो रहा है?”
आरव ने जैसे ही मंदिर के अंदर का दृश्य देखा, वह चौंक गया। एक पत्थर की मूर्ति के पास एक चमकते हुए दीपक जल रहा था, जिसके चारों ओर काले धागे लटके हुए थे। ये काले धागे एक तरह से मंदिर के केंद्र को घेर रहे थे, जैसे वे कुछ खतरनाक शक्ति का संकेत दे रहे हों।
आरव (आश्चर्यचकित):
“यह… यह सब क्या है? यह जगह तो और भी डरावनी होती जा रही है।”
तभी, एक तेज़ बुरी हवा की गूंज सुनाई देती है, और मंदिर के बीच में एक हल्की रौशनी उत्पन्न होती है। वह रौशनी बढ़ने लगती है, और अचानक, एक अजीब सी चीख सुनाई देती है।
भूतिया आवाज (धुंधली और गहरी):
“तुमने हमें जो कष्ट दिया है, उसकी सजा तुम्हें मिलेगी। तुम दोनों अब हमारे कब्जे में हो।”
आंधी तेज़ हो जाती है, और एक साथ कई रूप सामने आते हैं। उन रूपों में वह महिला सफेद साड़ी वाली और अन्य भूतनी शामिल होती हैं।
प्रिया (सहमी हुई, कांपते हुए):
“आरव… यह नहीं हो सकता! हम कहां जाएंगे?”
आरव (साहसिकता से):
“हम हार नहीं मान सकते! हमें बचने का कोई रास्ता ढूंढना होगा। इस मंदिर में जरूर कोई राज़ छुपा हुआ होगा।”
आरव और प्रिया उस दीपक की ओर बढ़ते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वही रहस्य सुलझा सकता है। जैसे ही वे दीपक के पास पहुंचते हैं, अचानक एक गहरी आवाज़ सुनाई देती है।
वह भूतनी (आत्मा के स्वर में):
“तुम दोनों ने जो किया है, अब तुम हमारे हाथों में हो।”
दीपक की रौशनी तेज़ हो जाती है, और अचानक वह मूर्ति बोलने लगती है।
मूर्ति (गंभीर स्वर में):
“तुम दोनों को इस आत्मा की गिरफ्त से मुक्ति चाहिए? तो तुम दोनों को अपना सबसे कीमती सामान देना होगा।”
प्रिया (डरी हुई):
“हमें अपनी जान बचानी है! लेकिन हम क्या दें?”
आरव (निराश होकर):
“हमारे पास खोने के लिए सब कुछ है, प्रिया। हम क्या करें?”
दीपक की रौशनी फिर से तेज़ हो जाती है। यह मूर्ति और भूतनी दोनों उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं।
भूतनी (चमकते हुए):
“तुम दोनों को तभी मुक्ति मिलेगी, जब तुम अपनी आत्मा का कुछ हिस्सा हमारे साथ साझा करोगे।”
आरव (दिमागी उलझन में):
“हमारी आत्मा का हिस्सा? क्या हम सच में ऐसा कुछ कर सकते हैं?”
प्रिया और आरव ने एक दूसरे को देखा और एक निर्णय लिया। उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत – अपनी इच्छाशक्ति – को सामने रखा। उन्होंने अपनी आत्मा के सच्चे हिस्से को उन भूतों के साथ साझा करने का संकल्प लिया, ताकि वह उनके जाल से मुक्त हो सकें।
दीपक में अचानक एक भयंकर चमक आई, और भूतनियां चीखते हुए गायब हो गईं। वह महिला भी हवा में बिखर गई। मंदिर के चारों ओर शांति छा गई।
आरव और प्रिया ने एक लंबी सांस ली। वे अब पूरी तरह से सुरक्षित थे। भूतिया ताकतें अब उन दोनों को छोड़ चुकी थीं। मंदिर में शांति लौट आई थी।
प्रिया (हांफते हुए):
“आरव, हम बच गए। क्या यह सच में खत्म हो गया है?”
आरव (संतुष्ट होकर):
“हां, प्रिया। हम बच गए, लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि जो हमले हुए थे, वो हमारे अंदर की कमजोरी और साहस के कारण थे।”
दोनों मंदिर से बाहर निकलते हैं। उनके दिलों में अब भी डर और शांति का मिश्रण था, लेकिन वे यह जानते थे कि वे अब उस काले जाल से बाहर आ चुके थे।