यह कहानी उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव की है, जहाँ एक पुरानी हवेली खड़ी थी। उस हवेली के बारे में कहा जाता था कि वहाँ रात के समय अजीब घटनाएँ होती थीं। गाँववाले उसे “भूतिया हवेली” कहते थे, और कोई भी रात को वहाँ जाने की हिम्मत नहीं करता था।
किसी समय की बात है, गाँव में एक युवक रवींद्र नाम का था। वह बड़ा साहसी था और उसे डर नाम की चीज़ से कोई वास्ता नहीं था। एक रात उसने सोचा कि वह हवेली में रात बिताएगा और देखेगा कि आखिर वहाँ क्या हो रहा है। उसने गाँव के बुजुर्गों से हवेली के बारे में सुनी हुई सारी बातें सुनी और खुद को पूरी तरह से तैयार किया।
रवींद्र हवेली की ओर बढ़ा। रास्ते में अंधेरा गहरा हो चुका था, और हवा में सन्नाटा था। हवेली के पास पहुँचते ही, उसे एक अजीब सी ठंडी हवा का झोंका महसूस हुआ। हवेली का दरवाजा खड़ा हुआ था, जैसे कोई अंदर से उसे देख रहा हो। उसने हिम्मत दिखाई और दरवाजा खोला।
जैसे ही रवींद्र अंदर गया, हवेली का माहौल और भी डरावना हो गया। दीवारों पर पुरानी तस्वीरें टंगी हुई थीं, जिनमें से कुछ तस्वीरें धुंधली हो चुकी थीं। अचानक, कहीं से एक हल्की सी आवाज आई, “तुम क्यों आए हो?” रवींद्र डर के बजाय उत्सुक हो गया और उसने आवाज का पीछा किया।
वह आवाज उसे एक कमरे की ओर ले गई, जो पूरी तरह से अंधेरे में डूबा हुआ था। रवींद्र ने कमरे के अंदर एक पुरानी लकड़ी की मेज देखी, जिसके ऊपर कुछ किताबें पड़ी थीं। उसने उन किताबों को खोलने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही उसने एक किताब खोली, कमरे की हवा और भी ठंडी हो गई। एक अजीब सी हलचल महसूस हुई, और अचानक एक भूतिया आकृति सामने आ गई।
यह आकृति एक महिला की थी, जिसकी आँखें जलती हुई थीं। महिला ने रवींद्र को घूरते हुए कहा, “यह हवेली मेरी है, तुम यहाँ क्यों आए हो?” रवींद्र थोड़ा चौंका, लेकिन उसने साहस जुटाया और पूछा, “तुम कौन हो?”
महिला की आवाज में दर्द था, “मैं एक समय यहाँ रहती थी, लेकिन मुझे धोखा देकर मेरी जान ले ली गई। अब मेरी आत्मा यहाँ बसी हुई है।”
रवींद्र को समझ में आ गया कि यह महिला अपनी मृत्यु के कारण यहाँ बंदी थी। उसने महिला से पूछा, “क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ?”
महिला ने एक लंबी चुप्पी के बाद कहा, “तुम्हे मुझे मुक्ति दिलानी होगी।” रवींद्र ने निश्चय किया कि वह इस आत्मा की मदद करेगा। उसने हवेली के पुराने रिकॉर्ड्स की खोज शुरू की और पाया कि महिला का नाम राधा था और उसकी मृत्यु एक धोखेबाज व्यक्ति ने की थी। उस व्यक्ति को उसने पहचान लिया था, और अब उसकी आत्मा को शांति मिलनी चाहिए थी।
रवींद्र ने सबूत इकट्ठा किए और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया और उसकी करतूतों का खुलासा हुआ। राधा की आत्मा को मुक्ति मिली और हवेली का अंधेरा छंट गया।
अब, गाँव में कोई भी हवेली से नहीं डरता था, और रवींद्र को उसकी बहादुरी के लिए सम्मान मिला। लेकिन लोग आज भी उस रात को याद करते हैं, जब रवींद्र ने उस भूतिया हवेली से एक आत्मा को शांति दिलाई।