कुमाऊं की भूतिया हवेली और काले जादू की शक्ति

कुमाऊं के एक छोटे से गाँव में, जो ऊँचाई पर स्थित है। गाँव के लोग अक्सर पहाड़ों की ओर जाने से डरते हैं, क्योंकि वहाँ एक पुरानी हवेली है, जो कई सालों से वीरान पड़ी है। गाँव वाले कहते हैं कि वह हवेली काले जादू और भूतिया शक्तियों से जुड़ी हुई है।

रोहन – एक साहसी लड़का, जो शहर से कुमाऊं घूमने आया है।
पूजा – रोहन की बहन, जो इन अजीब घटनाओं से डरती है।
बाबा चंद्रमणि – एक गाँववाले बुजुर्ग बाबा, जो इस इलाके के पुराने रहस्यों के बारे में जानते हैं।

गाँववाले – गाँव के लोग जो इस हवेली और काले जादू के बारे में अफवाहें फैलाते हैं।

रोहन (पूजा से):
“पूजा, क्या तुम भी इन अफवाहों पर विश्वास करती हो? मुझे लगता है, यह सब केवल गाँववालों की कहानियाँ हैं। वह हवेली सिर्फ पुरानी और वीरान पड़ी है।”

पूजा (डरी हुई):
“रोहन, यह अफवाहें सिर्फ कहानियाँ नहीं हैं। गाँववाले कहते हैं कि वहां कुछ बुरा हुआ था। बहुत साल पहले, एक तंत्रिका बाबा वहाँ रहता था, और वह हवेली अब भी उसकी काली शक्तियों से भरी हुई है।”

रोहन (हंसी उड़ाते हुए):
“तुम बहुत घबराती हो पूजा! यह सब सिर्फ डराने की बातें हैं। मैं वहां जाऊँगा और देखूँगा, क्या सच में कुछ है या नहीं।”

रोहन और पूजा, दोनों हवेली की ओर बढ़ते हैं। जैसे-जैसे वे हवेली के पास पहुँचते हैं, वातावरण में एक अजीब सी ठंडक घेरने लगती है। हवेली के चारों ओर पेड़ की शाखाएँ अजीब तरीके से हिलती हैं और हवा में एक डरावनी सी गूँज सुनाई देती है।

पूजा (घबराई हुई):
“रोहन, मुझे लगता है हमें यहाँ नहीं जाना चाहिए। यह जगह बहुत डरावनी लग रही है। क्या तुमने वह आवाज सुनी?”

रोहन (मुस्कुराते हुए):
“तुम डरती हो पूजा! वह बस हवा की आवाज़ होगी। देखो, हम हवेली में जाते हैं, और सबकुछ देखेंगे।”

वे हवेली के अंदर प्रवेश करते हैं। अंदर का दृश्य बहुत डरावना था। दीवारों पर स्याह खून के धब्बे और पुरानी वस्तुएं बिखरी हुई थीं। अचानक, एक अजीब सी चीख सुनाई देती है, जो हवेली के अंदर से आती है।

जैसे ही रोहन और पूजा हवेली के भीतर जाते हैं, एक अजीब सी शक्ति उन्हें महसूस होती है। अचानक, दीवारों पर कुछ अजीब सा चित्र उभरता है, जिसमें एक आदमी और एक महिला का चेहरा दिखाई देता है। दोनों के चेहरों पर भय और दर्द साफ झलकते हैं।

पूजा (काँपते हुए):
“यह… यह क्या है? रोहन, देखो, वह तस्वीर… उसकी आँखें हमें घूर रही हैं। क्या तुम भी यह महसूस कर रहे हो?”

रोहन (हैरान होकर):
“यह बस एक पुरानी पेंटिंग है पूजा। तुम घबराती हो, लेकिन मैं यह सब देखकर और भी शांत महसूस कर रहा हूँ।”

तभी एक बर्फीली हवा चलने लगती है और एक जोरदार आवाज़ सुनाई देती है, “तुम यहाँ क्यों आए हो?” दोनों घबराए हुए पीछे मुड़ते हैं और देखते हैं कि सामने एक अजीब सी धुंध और कटा-फटा चेहरा दिखाई देता है।

रोहन (हैरान होकर):
“यह… यह क्या है? कौन हो तुम?”

भूतिया आवाज (गहरी और डरावनी):
“तुमने मेरी जगह पर कदम रखा है। अब तुम कभी यहाँ से नहीं जा सकोगे।”

अर्जुन और पूजा डर के मारे बाहर भागने लगते हैं, लेकिन हवेली के दरवाजे अचानक बंद हो जाते हैं। उसी समय, गाँव में बाबा चंद्रमणि आते हैं, जो इस क्षेत्र के काले जादू और तंत्र विद्या के बारे में जानते हैं। वह अर्जुन और पूजा को अपनी मदद देने के लिए हवेली में आते हैं।

बाबा चंद्रमणि (गंभीर स्वर में):
“तुम दोनों ने बड़ी गलती की है। यह हवेली केवल एक पुरानी इमारत नहीं है, बल्कि यह काले जादू की शक्ति का केंद्र है। यहाँ एक तंत्रिका बाबा ने अपनी आत्मा को शक्तियों में बाँध लिया था। उसने यहाँ एक अंधेरे समझौते को अंजाम दिया था, जिसे अब कोई तोड़ नहीं सकता।”

पूजा (डरी हुई):
“क्या यह सच है, बाबा? तो वह चीखें और यह सब क्या है?”

बाबा चंद्रमणि (सिर झुकाकर):
“वह तंत्रिका बाबा था, जिसने अपने जादू से यहाँ की आत्माओं को क़ैद कर लिया था। और अब उसकी शक्ति हवेली में बसी हुई है। यदि तुमने इसे नष्ट करने का प्रयास किया, तो तुम भी उसकी चपेट में आ जाओगे।”

बाबा चंद्रमणि ने उन्हें बताया कि इस हवेली में एक खतरनाक काले जादू का मंत्र छिपा हुआ है, जो सिर्फ एक विशेष तंत्र क्रिया से समाप्त हो सकता है। लेकिन इसके लिए उस तंत्र विद्या के महान ज्ञान की आवश्यकता थी।

अर्जुन (सहज होकर):
“हमने यहाँ आकर जो गलती की है, उसे ठीक करना होगा। बाबा, हमें उस तंत्र विद्या को सीखने की जरूरत है। क्या तुम हमारी मदद कर सकते हो?”

बाबा चंद्रमणि (गंभीर होकर):
“यह तुम दोनों के लिए आसान नहीं होगा। इस तंत्र विद्या को सीखना, इसका अभ्यास करना, और वह शक्ति हासिल करना बहुत खतरनाक हो सकता है। लेकिन अगर तुम इसे सही तरीके से प्रयोग करते हो, तो तुम उस काले जादू को नष्ट कर सकोगे।”

अर्जुन और पूजा बाबा चंद्रमणि से तंत्र विद्या का अभ्यास करने लगते हैं। यह एक कठिन और खतरनाक प्रक्रिया थी। जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते हैं, हवेली में अजीब घटनाएँ घटने लगती हैं। दीवारों पर खून के धब्बे दिखाई देने लगते हैं, और चीखें तेज़ होती जाती हैं।

पूजा (काँपते हुए):
“यह… यह क्या हो रहा है? क्या हम गलत रास्ते पर हैं?”

अर्जुन (धैर्य से):
“नहीं, पूजा! हम सही रास्ते पर हैं। हमें सिर्फ अपना ध्यान केंद्रित रखना होगा। यह जादू हमारी चेतना को अपने जाल में फंसा सकता है, लेकिन हम इस पर काबू पाएंगे।”

फिर एक रात, जब वे तंत्र क्रिया को पूरी तरह से सीख चुके होते हैं, हवेली में अचानक एक भयंकर बिजली गिरती है। चारों ओर अंधेरा फैल जाता है। वे दोनों तंत्र मंत्र का उच्चारण करते हैं और अचानक एक तेज़ रोशनी फैलती है।

हवेली के भीतर एक भयंकर हलचल होती है। बाबा के काले जादू का रूप सामने आता है, और हवेली के भीतर की सारी आत्माएँ प्रकट होती हैं।

भूतिया आवाज (गुस्से में):
“तुम दोनों ने मुझे हराने की कोशिश की, लेकिन अब तुम सबको मेरे कब्जे में लूँगा।”

अर्जुन और पूजा तंत्र मंत्र का उच्चारण करते हुए पूरी ताकत से काले जादू का सामना करते हैं। एक ज़ोरदार आवाज़ के साथ हवेली का पूरा वातावरण बदल जाता है। बाबा का रूप काली धुंध में बदलकर गायब हो जाता है। हवेली में शांति छा जाती है।

अर्जुन और पूजा ने आखिरकार काले जादू को समाप्त कर दिया था। अब हवेली में कोई बुरी शक्ति नहीं थी। गाँववालों ने राहत की साँस ली और उनकी शांति लौट आई।

अर्जुन (संतुष्ट होकर):
“हमने यह किया, पूजा। अब गाँव फिर से सुरक्षित है।”

पूजा (सुकून से):
“हाँ, अर्जुन। लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि अंधेरे शक्तियाँ कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अगर हमारा इरादा मजबूत हो, तो हम उन्हें हराकर शांति पा सकते हैं।”

अर्जुन और पूजा ने बाबा के काले जादू को नष्ट कर दिया था, लेकिन गाँव में शांति लौटने के बावजूद, उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। अजीब घटनाएँ अभी भी उन्हें परेशान कर रही थीं। गाँव के कुछ लोग फिर से अजीब व्यवहार करने लगे थे, और कुछ ने बताया कि वे रात के समय अजीब बातें सुनते हैं। यह घटनाएँ तब बढ़ने लगीं जब गाँव के किनारे एक और पुराना मंदिर पाया गया।

अर्जुन (साक्षी से):
“साक्षी, मुझे ऐसा लगता है कि हम असली खतरे को पूरी तरह से नहीं समझ पाए। बाबा का जादू खत्म होने के बावजूद, कहीं न कहीं उसकी छाया अभी भी हमारे आस-पास हो सकती है।”

पूजा (डरी हुई):
“अर्जुन, तुम सही कह रहे हो। यह महसूस हो रहा है कि कुछ और बुरी ताकतें हमारे साथ हैं। मुझे डर है कि कहीं बाबा की आत्मा फिर से लौटकर हमारे रास्ते में न आ जाए।”

साक्षी की बातों से चिंतित, अर्जुन और पूजा गाँव के बुजुर्ग बाबा चंद्रमणि के पास जाते हैं। वे अब पूरी तरह से उस अंधेरे से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे थे, लेकिन बाबा चंद्रमणि का चेहरा अब भी गहरे चिंता में डूबा हुआ था।

बाबा चंद्रमणि (साँसें भरते हुए):
“तुम दोनों ने जो किया, वह साहसिक था, लेकिन असली खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। बाबा की आत्मा को नष्ट करने के बावजूद, उसका प्रभाव अब इस गाँव और आसपास के इलाकों में फैला हुआ है। उसने अपनी शक्ति सिर्फ हवेली तक नहीं छोड़ी थी, बल्कि इस भूमि की ऊर्जा को भी प्रभावित किया है।”

अर्जुन (आश्चर्यचकित होकर):
“तो क्या इसका मतलब यह है कि हम इस समस्या को पूरी तरह से नहीं सुलझा पाए?”

बाबा चंद्रमणि (गंभीर स्वर में):
“नहीं, अर्जुन। बाबा ने जो काले जादू के मंत्रों का उच्चारण किया, उनका प्रभाव अब इस क्षेत्र में बसी हुई शक्तियों को जागृत कर रहा है। वह सिर्फ एक साधारण आत्मा नहीं था, वह अंधेरे दुनिया के एक गहरे जादू का हिस्सा था। उसके जादू ने आसपास के इलाकों में बुरी आत्माओं और तंत्र शक्तियों को आकर्षित किया है। अब तुम्हें एक और कदम उठाना होगा।”

बाबा चंद्रमणि ने उन्हें बताया कि गाँव के पास एक पुराना मंदिर है, जो एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहाँ काले जादू के प्रतीक और तंत्र मंत्रों का असर अधिक होता है। वह मंदिर अब एक खतरनाक स्थल बन चुका था, और वहाँ की ज़मीन अब उन बुरी शक्तियों का घर बन चुकी थी।

साक्षी (घबराते हुए):
“बाबा, क्या हमें फिर से उस मंदिर में जाना होगा? हम पहले ही बहुत कुछ झेल चुके हैं।”

बाबा चंद्रमणि (सशक्त स्वर में):
“तुम्हें जाना होगा। अगर तुम काले जादू की असली ताकत को नष्ट करना चाहते हो, तो उस मंदिर में जाकर, उस बुरी आत्मा और तंत्र विद्या को समाप्त करना होगा। उस मंदिर में छिपी हुई शक्तियाँ अब तुमसे लड़ने की तैयारी कर चुकी हैं। तुम दोनों को वहाँ जाना होगा और वह तंत्र समाप्त करना होगा।”

अर्जुन और पूजा बाबा चंद्रमणि की बातों को सुनकर गाँव के बाहर एक बार फिर से निकलते हैं। इस बार, वे जानते थे कि उनका सामना किसी साधारण खतरे से नहीं था। यह एक ऐसे अंधेरे जादू का मुकाबला था, जिसने इस क्षेत्र को पूरी तरह से जकड़ लिया था।

अर्जुन (पूजा से):
“हम इसे अब खत्म करेंगे, पूजा। हमें डरने की कोई जरूरत नहीं है। अगर हम पीछे हटे तो हम कभी भी इस अंधेरे से बाहर नहीं निकल पाएंगे।”

पूजा (सहज होकर):
“तुम सही कह रहे हो, अर्जुन। मुझे डर जरूर लग रहा है, लेकिन अब हमें पूरी तरह से इस बुराई का सामना करना होगा।”

वे दोनों मंदिर की ओर बढ़ते हैं। जैसे-जैसे वे पास पहुँचते हैं, चारों ओर की हवा में एक अजीब सी ठंडक महसूस होती है, और वातावरण में एक दबाव सा महसूस होने लगता है।

जब अर्जुन और पूजा मंदिर के भीतर प्रवेश करते हैं, तो वे पाते हैं कि यह स्थान पूरी तरह से बर्बाद हो चुका था। हर कोने से काले धागे लटक रहे थे, और मंदिर में एक खौ़फनाक खामोशी थी। जैसे ही वे अंदर कदम रखते हैं, उनके चारों ओर हवा अचानक ठंडी हो जाती है और दीवारों से खून के धब्बे बहने लगते हैं।

अर्जुन (सामने देखते हुए):
“यह… यह क्या है? यह क्या हो रहा है?”

पूजा (डरी हुई):
“यह उस तंत्र का असर है, अर्जुन! यह अब हमें नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।”

तभी एक भूतिया आत्मा प्रकट होती है, जो मंदिर के अंदर भूतिया आवाज़ों के साथ घूमती है। उसकी आँखें पूरी तरह काली होती हैं, और वह अर्जुन और पूजा की ओर बढ़ने लगती है।

आत्मा (चिल्लाते हुए):
“तुम दोनों ने मेरी शक्ति को चुनौती दी है! अब तुम मुझे रोकने की कोशिश कर रहे हो? तुम सब खत्म हो जाओगे!”

अर्जुन और पूजा तंत्र मंत्र का उच्चारण करने के लिए बाबा चंद्रमणि द्वारा सिखाए गए मंत्रों का जाप करने लगते हैं। जैसे ही वे मंत्र पढ़ते हैं, पूरे मंदिर में घबराहट फैल जाती है। दीवारों पर लटके धागे बुरी तरह हिलने लगते हैं, और अजीब सी चीखें सुनाई देती हैं।

अर्जुन (काँपते हुए):
“यह काफी कठिन है, पूजा। हमें और जोर लगाना होगा। हम इसे अब खत्म कर देंगे।”

मंत्र की शक्ति और अधिक बढ़ती है, और एक रोशनी का गोला उत्पन्न होता है। जैसे ही वह गोला बढ़ता है, वह बुरी आत्मा चीखते हुए गायब हो जाती है।

पूजा (सांत्वना से):
“हमने यह किया, अर्जुन! वह बुरी आत्मा अब नहीं है।”

मंदिर के भीतर से अंधेरे की शक्तियाँ खत्म हो जाती हैं, और अब चारों ओर शांति और सुकून छा जाता है। अर्जुन और पूजा मंदिर से बाहर निकलते हैं, और गाँव में शांति वापस लौट आती है। अब काले जादू की कोई ताकत गाँव में नहीं थी।

अर्जुन (संतुष्ट होकर):
“हमने इसे खत्म किया, पूजा। अब गाँव फिर से सुरक्षित है।”

पूजा (सुकून से):
“हाँ, अर्जुन। हम अब इस डर से मुक्त हो चुके हैं। लेकिन यह अनुभव हमें हमेशा याद रहेगा।”

गाँव में अब सबकुछ सामान्य हो चुका था। लोग फिर से अपने जीवन को शांतिपूर्वक जीने लगे थे। अर्जुन और पूजा को एहसास हो चुका था कि अंधेरे शक्तियों से लड़ने के बाद शांति की वापसी होती है।

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