(किलाहाट गाँव में, लोग एक अजीब सी खौ़फनाक चुप्पी में घिरे थे। गांव वाले आपस में बातें कर रहे थे, किलाहाट के किले के बारे में।)
गाँववाला 1: “किलाहाट किला… क्या तुमने सुना है? वहाँ कुछ अजीब सी घटनाएँ घट रही हैं।”
गाँववाला 2: “हाँ, हर रात वहाँ से खौ़फनाक आवाजें आती हैं। कई लोग उस किले से गायब हो चुके हैं। कहते हैं, वह किला किसी खौ़फनाक सजा का केंद्र है।”
गाँववाला 3: “जो भी उस किले में घुसा, कभी बाहर नहीं निकला। कहते हैं, वहाँ एक भूतिया आत्मा है, जो बदला लेने आई है।”
(लोग डर के साथ किले का नाम लेते हैं। एक युवक, राहुल, जो इन अफवाहों को झूठ मानता था, वह किले का रहस्य जानने के लिए निकल पड़ता है।)
(राहुल एक रात किलाहाट किले की ओर बढ़ता है, उसके दिल में डर तो था, लेकिन वह खुद को यकीन दिलाता है कि यह सब अफवाहें हैं।)
राहुल (सोचते हुए): “अभी मैं देखता हूँ, क्या यह सच है कि लोग गायब हो जाते हैं। यह सिर्फ एक गाँव की कहानी है, और मुझे इसे खत्म करना होगा।”
(वह किले के पास पहुँचता है, जो अब जर्जर हो चुका था। किले की दीवारें टूट चुकी थीं, और हवाएँ सर्द और घनी हो रही थीं। एक अजीब सी खामोशी छाई थी।)
राहुल (जोर से): “किलाहाट किले में कोई है? आओ सामने आओ!”
(लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता, और राहुल दरवाजे को धक्का देता है। दरवाजा जैसे ही खुलता है, एक कड़ी गंध आती है, जो उसे अंदर जाने से रोकने की कोशिश करती है।)
(राहुल किले के अंदर प्रवेश करता है। उसके कदमों की आवाज़ गूंजती है, और अंधेरे में केवल उसकी सांसें सुनाई देती हैं। वह हर कदम पर घबराया हुआ था।)
राहुल (डरे हुए): “क्या सच में कोई यहाँ है, या यह सब मेरी कल्पना है?”
(तभी, एक तेज़ हवा चलती है, और किले का एक पुराना कक्ष अचानक से खुल जाता है। राहुल उसमें प्रवेश करता है और अंदर एक खौ़फनाक आवाज़ सुनता है।)
राहुल (डरा हुआ): “क… कोई है क्या?”
(कमरे में अचानक एक पुराना फांसी का तख्ता लटकता हुआ दिखाई देता है। राहुल के कदम थम जाते हैं, और वह कमरे में और अंदर बढ़ता है।)
(राहुल कमरे के अंदर जाता है और एक पुरानी किताब पाता है। वह किताब खोलता है, और उसमें किले का एक खौ़फनाक इतिहास लिखा होता है।)
राहुल (पढ़ते हुए): “यह किला उन दिनों का है जब यहाँ एक क्रूर राजा राज करता था। उसने अपने शासन की शक्ति बढ़ाने के लिए कई निर्दोषों को फांसी दी थी। उनकी आत्माएँ इस किले में बसी हुई हैं।”
(जैसे ही राहुल यह पढ़ता है, अचानक किले की दीवारें हिलने लगती हैं, और हवा तेज़ हो जाती है। वह महसूस करता है कि कुछ अजीब हो रहा है।)
राहुल (शोर में): “क्या यह सच है? क्या उन लोगों की आत्माएँ वाकई यहाँ हैं?”
(उसकी आंखों के सामने अचानक एक भूतिया छाया उभरती है। वह छाया धीरे-धीरे सामने आती है, और राहुल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं।)
(राहुल को सामने एक लटकी हुई आकृति नजर आती है। वह वही आत्मा थी, जो उस किले के राजा की क्रूरता से परेशान थी। आत्मा की आंखों से घृणा और बदला दिखता है।)
आत्मा (गुस्से में): “तुमने इस किले में कदम रखा है, अब तुम नहीं बच पाओगे। तुम वही सजा पाओगे, जो उन निर्दोषों को मिली थी।”
(राहुल अब समझ जाता है कि किला केवल एक खौ़फनाक स्थान नहीं था, बल्कि यह एक बदला लेने वाली आत्मा का घर था।)
राहुल (काँपते हुए): “क्या… क्या तुम मुझे मार डालोगी?”
आत्मा (दूर से): “यह सजा नहीं होगी, राहुल। यह मौत से भी भयानक होगी। तुम हमेशा के लिए इस किले का हिस्सा बन जाओगे।”
(राहुल डर के साथ आत्मा के सामने खड़ा होता है, और अचानक किले की दीवारों से आवाज़ें आनी लगती हैं। दीवारें खून से सनी दिखती हैं। किले की हवा और भी ठंडी और घनी हो जाती है।)
राहुल (सोचते हुए): “मैं अब क्या करूँ? मुझे तो निकलना था, लेकिन यहाँ तो सब कुछ उल्टा हो गया है।”
(तभी, किले में चारों ओर से क़ैदियों की कर्कश आवाज़ें सुनाई देने लगती हैं। वे सब राहुल से कहते हैं कि वह कभी बाहर नहीं जा पाएगा।)
क़ैदी 1 (हैरान): “यह किला एक आत्मा का घर है, और यहां एक ही सजा है। वह तुम्हें कभी नहीं छोड़ेगी।”
क़ैदी 2 (डरते हुए): “तुम्हें यही रहना होगा, राहुल। यही तुम्हारी सजा है।”
(राहुल ने एक आखिरी प्रयास किया और वह आत्मा से लड़ने की कोशिश करता है। उसने किताब में जो मंत्र पढ़ा था, वह फिर से पढ़ता है, ताकि आत्मा को शांत कर सके।)
राहुल (मंत्र पढ़ते हुए): “तुम्हें शांति मिले, तुम्हारे भटकते कदम रुक जाएं…”
(जैसे ही राहुल मंत्र पढ़ता है, किले में हलचल कम होती है और अचानक किले का वातावरण शांत हो जाता है। लेकिन आत्मा फिर भी सामने आती है।)
आत्मा (धीरे से): “तुमने मेरे खौ़फनाक रूप को समझ लिया, राहुल। अब तुम भी हमेशा के लिए यहीं रहोगे।”
(आत्मा अचानक गायब हो जाती है, और किला पूरी तरह से खामोश हो जाता है। राहुल फिर से किले में फंसा हुआ महसूस करता है।)
(किले के अंदर, राहुल की हालत अब खराब हो चुकी थी। वह पूरी तरह से थक चुका था, और उसने हार मान ली थी। किले की दीवारों में अब खून के धब्बे और क़ैदियों के चेहरे झलकने लगे थे।)
राहुल (आखिरी बार, खुद से): “क्या मैं सच में यहाँ हमेशा के लिए फंसा रहूँगा? क्या यह मेरी सजा है?”
(किला अब फिर से उसी खौ़फनाक स्थिति में लौट आता है, और राहुल की आत्मा किले के रहस्य में खो जाती है। किला फिर से उन सभी आत्माओं को अपने में समेट लेता है।)
अंत:
(कहानी का अंत एक अनुत्तरित सवाल के साथ होता है – क्या राहुल अब भी किलाहाट के किले में फंसा है, या वह आत्माओं का हिस्सा बन चुका है?)