अध्याय 1 — बंद दरवाज़ा
शहर के बाहरी हिस्से में,
एक पुराना, जर्जर-सा अस्पताल था — “सिटी जनरल हॉस्पिटल नंबर 13″।
पिछले 20 साल से वहाँ इलाज बंद था।
लोग कहते थे कि वहाँ रात में लाइटें जलती हैं…
जबकि बिजली का कनेक्शन काट दिया गया है।
राहुल, एक फ्रीलांस फ़ोटोग्राफ़र,
हमेशा से सुनता आया था कि उस अस्पताल में भूत है।
एक रात, उसने सच पता लगाने का फ़ैसला किया।
अध्याय 2 — अँधेरे में कदम
राहुल ने कैमरा, टॉर्च और अपना रिकॉर्डर उठाया।
आधी रात को, वो अस्पताल पहुँचा।
बड़ी लोहे की गेट जंग खाकर बंद था,
लेकिन दीवार के टूटे हिस्से से वो अंदर घुस गया।
अस्पताल के अंदर…
सिर्फ़ सन्नाटा था।
लेकिन जैसे ही उसने टॉर्च ऑन की,
उसने देखा — रिसेप्शन की दीवार पर पुराने खून के छींटे थे।
अध्याय 3 — अतीत की परछाइयाँ
उसने पहले फ़्लोर पर कदम रखा।
कमरों के दरवाज़े टूटे हुए थे।
कुछ दरवाज़ों पर मरीजों के नाम अब भी लिखे थे,
लेकिन पेंट उखड़ चुका था।
अचानक…
उसे पीछे से किसी के तेज़ चलने की आवाज़ आई।
उसने टॉर्च घुमाई —
कोई नहीं था।
अध्याय 4 — महिला की चीख
दूसरी मंज़िल पर पहुँचते ही,
राहुल ने एक महिला की दर्दभरी चीख सुनी।
चीख… ऑपरेशन थिएटर से आ रही थी।
वो धीरे-धीरे दरवाज़े के पास गया।
अंदर अंधेरा था, लेकिन मेज पर ऑपरेशन के औज़ार रखे थे —
जैसे किसी ने अभी-अभी इस्तेमाल किए हों।
अध्याय 5 — डॉक्टर का साया
जैसे ही उसने कैमरे से फोटो ली,
फ्लैश में उसने देखा —
एक लंबा आदमी, सफ़ेद कोट पहने,
खून से सना मास्क लगाए, उसके पीछे खड़ा है।
राहुल ने पीछे मुड़कर देखा —
कोई नहीं था।
अध्याय 6 — वार्ड नंबर 7
राहुल तीसरी मंज़िल की तरफ़ बढ़ा।
वार्ड नंबर 7 का दरवाज़ा आधा खुला था।
अंदर…
10 पुराने बेड पड़े थे,
और हर बेड पर कोई बैठा हुआ था —
लेकिन सबके चेहरे सफ़ेद कपड़े से ढके हुए थे।
राहुल ने डरते हुए एक बेड के पास जाकर कपड़ा हटाया…
नीचे सिर्फ़ हड्डियाँ थीं।
अध्याय 7 — सायरन की आवाज़
अचानक पूरे अस्पताल में एंबुलेंस का सायरन गूंजने लगा।
राहुल खिड़की की तरफ़ भागा —
बाहर कोई एंबुलेंस नहीं थी।
सायरन के साथ-साथ…
मरीजों के रोने और नर्सों के चिल्लाने की आवाज़ें आने लगीं।
अध्याय 8 — रिकॉर्डिंग का सच
उसने जेब से अपना रिकॉर्डर निकाला।
रिकॉर्डर ऑन होते ही…
एक ठंडी, धीमी आवाज़ आई —
“तुम यहाँ क्यों आए हो… हमें शांति से रहने दो।”
राहुल ने रिकॉर्डर फेंक दिया और बाहर भागने लगा।
अध्याय 9 — बंद निकास
सीढ़ियों तक पहुँचकर उसने देखा —
गेट बंद था।
जिस रास्ते से आया था, वहाँ अब दीवार थी।
अचानक उसके पीछे कदमों की आहट हुई…
वो मुड़ा —
और देखा —
सैकड़ों मरीज, टूटे-फूटे शरीर, उसकी तरफ़ बढ़ रहे थे।
अध्याय 10 — अंतिम सच
उन्हीं में सबसे आगे एक डॉक्टर था।
उसके हाथ में खून से सना चाकू था।
“हम सब यहाँ 1985 की आग में मारे गए…
और अब, तुम भी यहीं रहोगे।”
उसने राहुल का गला पकड़ लिया।
राहुल चीखने लगा…
लेकिन उसकी आवाज़ बाहर तक नहीं पहुँची।
एपिलॉग
अगली सुबह,
कुछ बच्चों ने अस्पताल के पास राहुल का कैमरा पाया।
आख़िरी तस्वीर में…
वो डॉक्टर कैमरे के बहुत पास खड़ा था,
और पीछे…
राहुल का चेहरा पूरी तरह सफ़ेद हो चुका था।
कहते हैं,
अब अस्पताल में एक नया भूत है —
कैमरा लिए एक नौजवान…
जो हर आने वाले का फोटो खींचता है।