अल्मोड़ा, उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में स्थित एक शांत और सुंदर स्थान था, जहां की हवाओं में हमेशा ठंडक होती थी और प्राकृतिक सुंदरता मन को सुकून देती थी। लेकिन इस गांव के बाहरी इलाके में एक पुराना, खंडहर घर था, जिसे “काली हवेली” कहा जाता था। यह घर पूरी तरह से जर्जर हो चुका था, और उसकी दीवारों पर काई जमी हुई थी। गांववाले कहते थे कि यह घर वर्षों से सुनसान पड़ा हुआ था और वहाँ किसी के जाने की हिम्मत नहीं थी।
कहा जाता था कि इस हवेली में कभी एक परिवार रहता था, लेकिन एक रात वे अचानक गायब हो गए। उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, और तब से यह हवेली भूतिया मानी जाने लगी। लोग कहते थे कि हवेली में रात के समय अजीब-अजीब आवाजें आती थीं, जैसे किसी ने मदद के लिए चीखें मारी हों, या किसी के कदमों की आवाज हो।
इस खौ़फनाक कहानी को सुनकर एक युवक, अर्जुन, जो अल्मोड़ा में एक पर्यटक के रूप में आया था, ने तय किया कि वह उस हवेली का सच पता लगाएगा। अर्जुन एक साहसी और जिज्ञासु लड़का था। उसे डर नाम की चीज़ नहीं थी, और वह इस पहाड़ी इलाके में चुपके-चुपके घुमने का मन बना चुका था। उसने सुना था कि एक बार एक व्यक्ति उस हवेली में घुसा था, लेकिन वह फिर कभी बाहर नहीं आया।
अर्जुन ने एक शाम को हवेली की ओर रुख किया। जंगल की संकरी पगडंडी से होकर वह हवेली तक पहुँचा। हवेली का माहौल बहुत ही डरावना था। चारों ओर खामोशी थी, और हवेली की खिड़कियाँ पूरी तरह से बंद थीं। अर्जुन ने हिम्मत जुटाई और हवेली के अंदर जाने का फैसला किया।
अर्जुन ने हवेली के दरवाजे को खटखटाया, लेकिन दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया। अंदर घुसते ही उसे एक अजीब सी ठंडी हवा का झोंका महसूस हुआ। हवेली के अंदर सब कुछ पुराना और जर्जर था। दीवारों पर पुरानी तस्वीरें लगी हुई थीं, और हर जगह धूल की मोटी परत जमी हुई थी। अर्जुन ने एक कमरे में कदम रखा, और अचानक उसे महसूस हुआ कि वह अकेला नहीं है। उसके आसपास कोई था।
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा, और तभी उसे एक कमरे में किसी के हंसने की आवाज़ सुनाई दी। अर्जुन की धड़कन तेज़ हो गई। उसने आवाज़ की दिशा में कदम बढ़ाए। कमरे के अंदर एक कटा-फटा चेहरा दिखा, और अर्जुन के होश उड़ गए।
“तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” उस चेहरे ने पूछा। अर्जुन ने घबराकर जवाब दिया, “मैं सिर्फ सच जानने आया हूँ, यहाँ क्या हुआ था?”
चेहरे ने उसे घूरते हुए कहा, “यह मेरा घर था। तुम नहीं जानते कि इस घर में क्या-क्या हुआ है। तुम जितना जानना चाहोगे, उतना ही तुम खुद को इस घर का हिस्सा बना लोगे।”
अर्जुन का दिल तेजी से धड़कने लगा, और उसने कमरे से बाहर निकलने की कोशिश की। लेकिन कमरे का दरवाजा अचानक बंद हो गया। अर्जुन ने हर तरफ देखा, और पाया कि घर के अंदर की हर चीज़ मानो अब अपनी जगह से बदल चुकी थी। एक अजीब सी खौ़फनाक चुप्पी चारों ओर फैली हुई थी।
अर्जुन ने उस डर को नकारते हुए, अपनी हिम्मत जुटाई और कमरे का दरवाजा खोला। जैसे ही दरवाजा खोला, उसने देखा कि हवेली के अंदर अब एक अलग ही दुनिया बन चुकी थी। दीवारों पर खून के धब्बे थे, और छत से रेशमी धागों जैसे धुंए की लकीरें निकल रही थीं। अर्जुन ने एक बार फिर से शोर सुनने की कोशिश की, और वह फिर से कमरे के अंदर गया, जहाँ उसे एक पुराना दरवाजा दिखाई दिया।
यह दरवाजा बिल्कुल अलग था। जैसे ही उसने उसे खोला, उसे एक बहुत अजीब सी गंध आई, जैसे सड़ी हुई चीज़ों की। वह डरते हुए दरवाजे से बाहर निकला, और जैसे ही बाहर आया, देखा कि हवेली के बाहर के आंगन में किसी की छाया दिखाई दी। अर्जुन ने समझा कि यह कोई और नहीं, वही बुरी आत्मा हो सकती है।
अर्जुन ने साहसिक कदम उठाया और उस छाया की दिशा में बढ़ने लगा। जैसे ही वह छाया के करीब पहुँचा, अचानक वह घड़ी के टिक-टिक करने की आवाज़ सुनने लगा। उसकी नजरें उस घड़ी पर पड़ी, और उसे लगा कि जैसे घड़ी का समय उल्टा चल रहा हो। अर्जुन की समझ में कुछ नहीं आ रहा था, लेकिन उसके अंदर एक आवाज़ आ रही थी, “तुमने हमारी शांति भंग की है, अब तुमसे पीछा नहीं छोड़ा जाएगा।”
अर्जुन के रोंगटे खड़े हो गए, और उसने दौड़ते हुए हवेली से बाहर निकलने की कोशिश की। जैसे ही वह बाहर पहुँचा, उसे एक कटा-फटा चेहरा सामने खड़ा दिखाई दिया। अर्जुन ने समझ लिया कि वह उस भूतिया हवेली से कभी बाहर नहीं जा सकेगा। लेकिन तभी, अचानक एक ज़ोरदार आवाज़ आई और सब कुछ चुप हो गया। अर्जुन ने देखा कि वह चेहरा अब गायब हो चुका था, और हवेली पूरी तरह से शांत हो चुकी थी।
अर्जुन ने भागते हुए हवेली से बाहर निकला, और वह जान गया कि यह हवेली कभी भी इंसान की समझ में नहीं आ सकती। उसे यह एहसास हो गया कि कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं, जिनसे हमें दूर रहना चाहिए।
अर्जुन हवेली से बाहर भागकर एक पुराने पेड़ के नीचे रुका। उसकी सांसें तेज़ थीं, और वह पूरी तरह से थक चुका था। उसकी आँखों के सामने वह खौ़फनाक चेहरा और वह सारी घटनाएँ घूम रही थीं। लेकिन उसके अंदर एक अजीब सी जिज्ञासा भी थी। उसने तय किया कि वह हवेली में फिर से जाएगा, क्योंकि अब तक जो कुछ भी हुआ था, वह उससे ज्यादा डरने वाला था। उसे यह जानने की जरूरत थी कि वह सब कुछ क्यों हो रहा था, और क्या उस हवेली के भीतर कोई राज़ छिपा हुआ था।
अर्जुन ने फिर से हवेली की ओर रुख किया। रात का अंधेरा और भी गहरा हो चुका था, और हवेली की ऊँची दीवारों पर चाँद की हल्की रौशनी पड़ रही थी। हवेली की खिड़कियों से एक अजीब सी धुंआ उठ रहा था, जैसे कोई अदृश्य शक्ति वहाँ से निकलने की कोशिश कर रही हो। अर्जुन ने साहसिक कदम उठाया और हवेली के अंदर प्रवेश किया।
जैसे ही वह अंदर गया, हवा का एक तेज़ झोंका महसूस हुआ, और हवेली की दरवाजे की सांकल खुद-ब-खुद बंद हो गई। अर्जुन ने ध्यान से चारों ओर देखा, और पाया कि हवेली के हर कोने में कुछ और था। अब वह पहले से कहीं अधिक डर महसूस कर रहा था, लेकिन उसने अपनी हिम्मत को नकारते हुए, उन खौ़फनाक आवाज़ों का पीछा करने का फैसला किया।
वह एक कमरे में दाखिल हुआ, जहाँ दीवारों पर अजीब चित्र और खून के धब्बे लगे हुए थे। कमरे में एक पुरानी मेज़ पर एक संदूक रखा था। अर्जुन ने धीरे-धीरे उस संदूक की ओर बढ़ने का फैसला किया। जैसे ही उसने संदूक खोला, उसके अंदर एक पुरानी किताब पड़ी हुई थी। अर्जुन ने वह किताब उठाई, और उसे खोलते ही किताब में लिखा हुआ एक मंत्र पढ़ने लगा। जैसे ही उसने मंत्र का उच्चारण किया, कमरे की हवा और भी ठंडी हो गई, और दीवारों से अजीब सी हलचल महसूस हुई।
अर्जुन ने महसूस किया कि वह मंत्र उसे किसी और दुनिया में खींच रहा था, और कुछ ही पल में उसे सामने एक घनी अंधेरी छाया दिखाई दी। वह छाया एक भूतिया आकृति में बदल गई, और अर्जुन के सामने खड़ी हो गई। “तुमने हमें नहीं पहचाना, अर्जुन,” वह छाया बोली, और उसकी आवाज़ में एक भयानक गूंज थी। अर्जुन घबराया हुआ था, लेकिन उसने डर के बावजूद उस छाया से पूछा, “तुम कौन हो? और क्यों मुझे यहाँ लाया गया है?”
छाया ने उसकी ओर देखा और बोली, “हम वही आत्माएँ हैं, जो इस हवेली में फंसी हुई हैं। कई साल पहले, इस हवेली के मालिक ने हमसे धोखा किया और हमें मार डाला। हम अपनी मौत का बदला लेना चाहते हैं, और अब तुम हमारे साथ हो।”
अर्जुन ने समझा कि वह इस हवेली में बसी हुई आत्माओं के बीच फंस चुका है, और अब वह न तो बाहर जा सकता था और न ही किसी से मदद ले सकता था। लेकिन अर्जुन ने ठान लिया कि वह इन आत्माओं की मुक्ति के लिए कुछ करेगा। उसने मन ही मन सोचा, “अगर मैं इन आत्माओं को शांति दिला सकता हूँ, तो शायद मैं भी इस हवेली से बाहर निकल सकूँ।”
अर्जुन ने एक बार फिर से वह किताब खोली, जिसमें उस हवेली के बारे में लिखा था। वह किताब अब उसे कोई रहस्यमयी रास्ता दिखाने लगी थी। किताब में एक तरीका था, जिससे हवेली में बसी आत्माओं को शांति मिल सकती थी। अर्जुन को समझ में आ गया कि वह जिस रास्ते पर जा रहा था, वह इतना आसान नहीं था। उसे आत्माओं के साथ-साथ हवेली के मालिक की आत्मा से भी निपटना होगा।
अर्जुन ने हवेली के अंदर एक पुराने मंदिर को खोजा, जहाँ वह आत्माओं की शांति के लिए पूजा कर सकता था। मंदिर का माहौल बहुत अजीब था। चारों ओर काले धुंए के बादल थे, और हवा में एक अजीब सी गंध आ रही थी। अर्जुन ने उस मंदिर में दीया जलाया और मंत्रोच्चारण करना शुरू किया। जैसे ही उसने मंत्र पढ़ना शुरू किया, हवेली की दीवारों में एक जोरदार कंपन हुआ, और अचानक मंदिर के भीतर से एक तेज़ चीखने की आवाज़ आई। अर्जुन ने डर के बावजूद अपनी आवाज़ को ऊँचा किया और मंत्र जारी रखा।
कुछ ही समय में, मंदिर के भीतर अंधेरा छंटने लगा, और हवेली की दीवारों से बुराई की छायाएँ गायब होने लगीं। अर्जुन ने महसूस किया कि वह आत्माओं के बीच शांति ला सका था। अचानक, हवेली के भीतर की आत्माएँ धीरे-धीरे गायब होने लगीं, और हवेली की दीवारों से वह भयानक गंध भी अब खत्म हो गई थी।
अर्जुन ने राहत की सांस ली और हवेली से बाहर निकल आया। अब वह जान चुका था कि कभी-कभी डर का सामना करना भी जरूरी होता है, क्योंकि इससे ही हम अपने भीतर की शक्ति को पहचान पाते हैं। गाँव में लौटते हुए अर्जुन ने यह तय किया कि वह इस रहस्यमयी हवेली के बारे में कभी नहीं बोलेगा, क्योंकि कुछ जगहें होती हैं, जिन्हें हमें छोड़ देना चाहिए।