अजनबी हवेली का सच | The Mystery of the Old Mansion

सोनिया और रवि, दो अच्छे दोस्त, एक दिन अपने हफ्ते भर के छुट्टी के दौरान एक पुरानी हवेली की खोज में निकले। उन्हें सुना था कि यह हवेली कई सालों से वीरान पड़ी हुई है, लेकिन कुछ लोग कहते थे कि वह हवेली किसी अजनबी ताकत से भरी हुई थी। कुछ कहते थे कि वह हवेली किसी प्राचीन परिवार का था, जो एक रात अचानक गायब हो गया।

रवि ने हमेशा हवेलियों और अजनबी घटनाओं में रुचि दिखाई थी, जबकि सोनिया की एक अलग राय थी। वह इन सब बातों को सिर्फ अफवाह समझती थी। हालांकि, रवि ने उसे मनाया और दोनों अपनी यात्रा पर निकल पड़े। रात का समय था, और हवेली का रुख करना अब और भी ज्यादा डरावना लगता था।

जैसे ही वे हवेली के पास पहुँचे, एक अजीब सी खामोशी ने उन्हें घेर लिया। हवेली का विशाल दरवाजा बंद था, लेकिन एक खिड़की खुली हुई थी। दोनों ने चुपचाप खिड़की से अंदर झाँका। वहां, अंधेरे में कुछ हलचल सी महसूस हो रही थी, लेकिन कुछ साफ दिखाई नहीं दे रहा था। रवि ने हिम्मत जुटाई और दरवाजे को धक्का दिया। दरवाजा खटके के साथ खुला, और दोनों अंदर प्रवेश कर गए।

हवेली के अंदर, उन्हें पुरानी फर्नीचर, टूटे-फूटे चित्र और दीवारों पर फटी हुई पेड़ की छाया दिखाई दी। वह ठंडी हवाओं से घिर गए थे, और हर कदम के साथ उन्हें एक डरावनी आहट सुनाई देती थी।

जैसे-जैसे वे आगे बढ़े, उन्होंने देखा कि हवेली के हर कोने में पुरानी तस्वीरें लटक रही थीं। कुछ तस्वीरों में एक महिला और पुरुष का परिवार दिखाया गया था, जिनके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी। रवि ने एक तस्वीर के पास जाकर गौर से देखा। “यह वह परिवार हो सकता है जिसके बारे में हम सुन रहे थे,” रवि ने कहा।

तभी, उन्हें एक और अजीब चीज़ दिखाई दी। दीवार के पास एक पुरानी किताब पड़ी हुई थी। किताब के पन्ने उलटे हुए थे, और उनके ऊपर कुछ अस्पष्ट शब्द लिखे थे। सोनिया ने किताब उठाई, लेकिन जैसे ही उसने किताब खोली, एक तेज़ हवाहट आई और कुछ क्षण के लिए अंधेरा सा हो गया।

अचानक, हवेली के भीतर हलचल तेज़ हो गई। दीवारों पर अजीब सी आवाजें गूंजने लगीं, जैसे कोई कदमों की आवाज सुनाई दे रही हो। रवि ने सोनिया से कहा, “क्या तुमने वह सुनी?” सोनिया ने डरते हुए सिर हिलाया और कहा, “यह तो बहुत अजीब है।”

फिर, एक झटका सा लगा और एक खिड़की अचानक से बंद हो गई। दोनों ने समझा कि शायद हवा ने ऐसा किया होगा, लेकिन फिर भी उनका मन घबराया हुआ था। उन्होंने तय किया कि हवेली से बाहर जाना सबसे अच्छा रहेगा।

लेकिन जैसे ही वे बाहर निकलने के लिए मुड़े, एक घना कोहरा छा गया। कोहरे में कुछ आकृतियाँ उन्हें दिखाई देने लगीं। अचानक, एक धुंधली सी आकृति सामने आई, जो एक औरत की थी। वह अजीब तरीके से हंस रही थी, और उसकी आँखें पूरी तरह से खाली थीं। सोनिया और रवि दोनों डर से कांप उठे। “तुम कौन हो?” रवि ने डरते हुए पूछा।

आकृति ने धीरे-धीरे जवाब दिया, “मैं वह आत्मा हूँ जो इस हवेली में बसी हुई है। यह घर मेरा है।”

यह आवाज़ सोनिया और रवि को और भी डरावनी लगी। उन्होंने देखा कि आकृति का चेहरा धीरे-धीरे बदल रहा था। वह महिला थी, लेकिन उसका चेहरा एक औरत की लाश जैसा लग रहा था। उसकी आँखें पूरी तरह से सूजी हुई थीं, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।

“तुमने इस हवेली में क्यों कदम रखा?” महिला ने पूछा। “यहाँ एक खतरनाक रहस्य छिपा हुआ है।”

“हम सिर्फ देखना चाहते थे,” रवि ने डरते हुए कहा। “हमने सुना था कि यह हवेली अजीब घटनाओं से भरी हुई है।”

महिला ने एक लंबी सांस ली और कहा, “यह सच है। यहाँ के लोग एक दिन अचानक गायब हो गए। वे मेरी आत्मा को शांत करने में विफल रहे, और अब मैं इस हवेली में बसी हुई हूँ। अगर तुमने यहाँ से बाहर निकलने की कोशिश की, तो तुम भी मेरी तरह यहाँ फंस जाओगे।”

रवि और सोनिया ने एक-दूसरे की ओर देखा और फिर हवेली के दरवाजे की ओर दौड़े। लेकिन अचानक, दरवाजा बंद हो गया। “अब तुम्हारे पास सिर्फ एक रास्ता है,” महिला की आवाज़ फिर से सुनाई दी। “तुम्हें मेरे सवाल का जवाब देना होगा।”

“क्या तुम हमारी मदद करोगी?” सोनिया ने पूछा।

“तुम्हें यहाँ से जाने का एक ही तरीका है, और वह है मेरे सवाल का सही जवाब देना,” महिला ने कहा।

महिला ने एक सवाल पूछा, “मैं कौन हूँ?” दोनों चुप थे। सोनिया और रवि को समझ में नहीं आ रहा था कि यह सवाल उनका क्या मतलब रखता है।

आखिरकार, रवि ने सही उत्तर दिया, “तुम उस परिवार की सदस्य हो जो यहाँ कभी रहा करते थे। तुम वही महिला हो जो इस हवेली की आत्मा बन चुकी है।”

फिर महिला की आकृति धीरे-धीरे मुरझाई और हवेली में एक नई चुप्प सी छाई।

फिर अचानक, हवेली का दरवाजा खुला। सोनिया और रवि बाहर निकल आए। हवेली की खामोशी अब उन्हें अजनबी नहीं लगी। वे जानते थे कि वे उस रहस्य का हिस्सा बन गए थे, जिसे कोई भी समझ नहीं सकता था।

हवेली के उस भूतिया रहस्य को छोड़कर वे वापसी के रास्ते पर थे, लेकिन उन्हें यह एहसास हो चुका था कि उनकी जिंदगी कभी पहले जैसी नहीं रहेगी।

क्या यह सच था? क्या हवेली में अब भी वही आत्मा बसी हुई थी? यह सवाल हमेशा के लिए उनके मन में बना रहा।

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